Zindagi shayari

मैंने तो माँगा था थोड़ा सा उजाला अपनी जिंदगी में;
वाह रे चाहने वाले तूने तो आग ही लगा दी जिंदगी में!
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किसी ने हम से पूछा इतने छोटे से दिल में इतने सारे दोस्त कैसे समां जाते हैं;
हम ने कहा वैसे ही जैसे छोटी सी हथेली में सारे जिंदगी की लकीरें समां जाती हैं!
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नज़रिया बदल के देख, हर तरफ नज़राने मिलेंगे;
ऐ ज़िन्दगी यहाँ तेरी तकलीफों के भी दीवाने मिलेंगे!
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कोई तो है मेरे अंदर मुझको संभाले हुए;
कि बेकरार होकर भी बरक़रार हूँ मैं!
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जेब में क्यों रखते हो खुशी के लम्हें जनाब;
बाँट दो इन्हें ना गिरने का डर, ना चोरी का!
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ना जाने कितनी अनकही बातें, कितनी हसरतें साथ ले जाएगें;
लोग झूठ कहते हैं कि, खाली हाथ आए थे और खाली हाथ जाएगें!
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एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी;
जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं;
हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।
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जिन्दगी की राहों में मुस्कुराते रहो हमेशा;
क्योंकि उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, पर हमसफ़र नहीं!
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ना जाने कब खरच हो गए पता ही नहीं चला;
वो लम्हें जो बचा कर रखे थे जीने के लिये!
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तमन्ना ने जिंदगी के आँचल में सिर रख कर पूछा "मैं कब पूरी होउंगी";
जिंदगी ने हँसकर जवाब दिया "जो पूरी हो जाये वो तमन्ना ही क्या!
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जिंदगी दो लफ्ज़ों में यूँ अर्ज है;
आधी कर्ज है, तो आधी फर्ज है!
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सख़्त हाथों से भी छूट जाती हैं कभी उंगलियाँ;
रिश्ते ज़ोर से नहीं तमीज़ से थामे जाते हैं!
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मोहब्बत की कहूँ देवी या तुमको बंदगी कह दूँ;
बुरा मानो न गर हमदम तो तुमको ज़िन्दगी कह दूँ!
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ज़िन्दगी तो सभी के लिए रंगीन किताब है;
फर्क है तो बस इतना कि कोई;
हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है;
और कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है!
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लगता है, आज ज़िन्दगी कुछ ख़फ़ा है;
चलिए छोड़िये, कौन सा पहली दफ़ा है!
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फासलें इस कदर हैं आजकल रिश्तों में;
जैसे कोई घर खरीदा हो किश्तों में!
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चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी;
लोगो को सिखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है!
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रास्ते कहाँ ख़त्म होते हैं, जिन्दगी के सफ़र में;
मंजिल तो वहीं है जहाँ, ख्वाहिशें थम जाए!
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हाल पूछ लेने से कौन सा हाल ठीक हो जाता है;
बस एक तसल्ली सी हो जाती है कि इस भीड़ भरी दुनिया में कोई अपना भी है।
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हर एक लकीर, एक तजुर्बा है जनाब,
झुर्रियां चेहरों पर, यूँ ही आया नही करती।
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बड़ी चालाक होती है ये जिंदगी हमारी,
रोज़ नया कल देकर, उम्र छीनती रहती है।
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हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ए जिंदगी,
हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी।
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"दरिया" बन कर किसी को डुबोना बहुत आसान है,
मगर "जरिया" बनकर किसी को बचायें तो कोई बात बने।
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रास्ते कहाँ खत्म होते हैं जिंदगी के इस सफर में,
मंजिल तो वही है जहाँ ख्वाहिशें थम जायें।
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समझ ना आया ए ज़िन्दगी तेरा ये फ़लसफ़ा,
एक तरफ़ कहते हैं सब्र का फल मीठा है
और दूसरी तरफ़ कहते हैं वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता।
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जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाये,
शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाये;
जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ए जिंदगी,
तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ले ही लिया जाये।
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ऐ जिन्दगी तेरे जज्बे को सलाम,
पता है कि मंजिल मौत है फिर भी दौड रही है तू।
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बारिश में रख दो इस जिंदगी के पन्नों को, ताकि धुल जाए स्याही,
ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी-कभी।
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एक नींद है जो लोगों को रात भर नहीं आती,
और एक जमीर है जो हर वक़्त सोया रहता है।
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ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही ख्वाहिशों का है,
ना तो किसी को गम चाहिए और ना ही किसी को कम चाहिए।
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मुश्किल हालात से कह दो आज हमसे ना उलझे,
दुआओं से हाथ भरे है मेरे तुम्हें कहाँ संभाल पाउँगा।
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लोग तो बेवजह खरीदते हैं आईने,
आँख बंद करके भी अपनी हक़ीक़त जानी जा सकती है।
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खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो,
कुछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं।
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ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे,
सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिए।
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छोटी सी जिन्दगी है, हर बात में खुश रहो,
जो चेहरा पास ना हो उसकी आवाज में खुश रहो,
कोई रूठा हो आप से उसके अंदाज में खुश रहो,
जो लौट के नही आने वाले उनकी याद में खुश रहो,
कल किसने देखा अपने आज में खुश रहो।
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जो दिल में शिकवे कम और जुबान पर शिकायतें कम रखते हैं,
वही लोग हर रिश्ता निभाने का दम रखते हैं।
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आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी कुछ क़र्ज़ चुकाने बाकी हैं,
कुछ के दर्द मिटाने बाकी हैं कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं।
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अब समझ लेता हूँ मीठे लफ़्ज़ों की कड़वाहट,
हो गया है ज़िन्दगी का तज़ुर्बा थोड़ा थोड़ा।
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ज़िन्दगी शायद इसी का नाम है,
दूरियां मज़बूरियां तन्हाईयाँ।
~ Kaif Bhopali
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कुछ चंद लम्हें ज़िंदगी के ज़िंदगी को मायनों से भर देते हैं,
वरना ज़िंदगी तो अक्सर यूँ ही बेमानी सी गुज़र जाती है।
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जिंदगी ने मेरे मर्ज का एक बढ़िया इलाज़ बताया;
वक्त को दवा कहा और ख्वाहिशों का परहेज बताया।
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उदासियों की वजह तो बहुत है ज़िन्दगी में;
पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है।
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क्यों जुड़ता है तू इस जहान से,
एक दिन ये गुज़र ही जायेगा;
चाहे कितना भी समेट ले तू इस जहान को,
मुट्ठी से तो एक दिन फिसल ही जायेगा।
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मुस्कुराते रहोगे तो दुनिया आपके क़दमों में होगी;
वरना आंसुओं को तो तो आँखें भी जगह नहीं देती।
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तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम;
ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम।
~ Sahir Ludhianvi
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खुशियों से नाराज़ है मेरी ज़िन्दगी;
बस प्यार की मोहताज़ है मेरी ज़िन्दगी;
हँस लेता हूँ लोगों को दिखाने के लिए;
वैसे तो दर्द की किताब है मेरी ज़िन्दगी।
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जिंदगी ज़ख्मों से भरी है वक़्त को मरहम बनाना सीख लो;
हारना तो मौत के सामने है फिलहाल जिंदगी से जीतना सीख लो।
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं;
सब के दिल से उतर गया हूँ मैं;
कैसे अपनी हँसी को ज़ब्त करूँ;
सुन रहा हूँ कि घिर गया हूँ मैं।
~ Jon Elia
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किसी के काम न जो आए वह आदमी क्या है;
जो अपनी ही फिक्र में गुजरे, वह जिन्दगी क्या है।
~ Asar Lakhnavi
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कितना और बदलूं खुद को जिंदगी जीने के लिए;
ऐ जिंदगी, मुझको थोडा सा... मुझमे बाकी रहने दे!
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साथ रहते यूँ ही वक़्त गुज़र जायेगा;
दूर होने के बाद कौन किसे याद आयेगा;
जी लो ये पल जब हम साथ हैं;
कल क्या पता वक़्त कहाँ ले जायेगा।
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मौत उसकी है करे जिसका ज़माना अफ़सोस;
यूँ तो ज़िंदगी में आये हैं सभी मरने के लिए।
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रोया हूँ बहुत तब जरा करार मिला है;
इस जहाँ में किसे भला सच्चा प्यार मिला है;
गुजर रही है जिंदगी इम्तिहान के दौर से;
एक ख़तम तो दूसरा तैयार मिला है।
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काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था;
खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था;
कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में;
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था।
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सबके कर्ज़े चुका दूँ मरने से पहले, ऐसी मेरी नीयत है;
मौत से पहले तू भी बता दे ज़िंदगी, तेरी क्या कीमत है।
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उम्र-ऐ-जवानी फिर कभी ना मुस्करायी बचपन की तरह;
मैंने साइकिल भी खरीदी, खिलौने भी लेके देख लिए।
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लम्हों की खुली किताब हैं ज़िन्दगी;
ख्यालों और सांसों का हिसाब हैं ज़िन्दगी;
कुछ ज़रूरतें पूरी, कुछ ख्वाहिशें अधूरी;
इन्ही सवालों के जवाब हैं ज़िन्दगी।
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सो सुख पा कर भी सुखी न हो;
पर एक ग़म का दुःख मनाता है;
तभी तो कैसी करामात है कुदरत की;
लाश तो तैर जाती है पानी में;
पर ज़िंदा आदमी डूब जाता है!
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चाहा है तुझ को तेरी तग़ाफ़ुल के बावजूद;
ए ज़िन्दगी तू याद करेगी कभी हमें!
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सफ़र ज़िन्दगी का बहुत ही हसीन है;
सभी को किसी न किसी की तालाश है;
किसी के पास मंज़िल है तो राह नहीं;
और किसी के पास राह है तो मंज़िल नहीं।
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तुने तो रुला के रख दिया ए-जिन्दगी​;
जा कर पूछ मेरी माँ से ​ कितने लाडले थे हम...
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​अपनी ही तरह से परेशान है हर कोई;
इस तपती धूंप के लिए कोई दरख़्त नहीं है;
किसी के पास खाने के लिये रोटी नहीं है;
और किसी के पास रोटी खाने का वक़्त नहीं है...
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इन कमबख्त़​ ​जरूर​तो और चाहतों ने मार डाला;​​
​कभी ​जरूरतें पूरी नही होती​ तो ​कभी चाह​तें​ बिखर जाती है;​​
​कभी चाहतें ​के पीछे भागो तो कभी ​जरूरतों पूरी करों;​
बस ​इसी में ​तालमेल बिठाते-बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है।
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खबर नहीं मुझे यह जिन्दगी कहाँ ले जाए;​​
कहीं ठहर के मेरा इंतज़ार मत करना।
~ Munawwar Rana
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देने वाले ने दिया सब कुछ अजब अंदाज से;
​सामने दुनिया पड़ी है और उठा सकते नहीं... ​​
~ Bashir Badr
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यूँ ही रखते रहे बचपन से दिल साफ़ हम अपना​​;​
पता नहीं था कि कीमत तो चेहरों ​की होती है दिल ​की नहीं​..
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उस रात गरीब माँ ने यह कह के बच्चों को सुला दिया;
फ़रिश्ते ख्वाब में आते है रोटियां ले कर​।
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​बिना लिबास आए थे इस जहां में;
बस एक कफ़न की खातिर, इतना सफ़र करना पड़ा...
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​​​नज़र-नज़र में उतरना कमाल होता है;​​​​
नफ़स-नफ़स में बिखरना कमाल होता है;​​​​
बुलंदियों पे पहुंचना कोई कमाल नहीं;​​​​
बुलंदियों पे ठहरना कमाल होता है।
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दुनिया का हर शौंक पाला नही जाता;
कांच के खिलौनों को उछाला नही जाता;
मेहनत करने से मुश्किल हो जाती है आसान;
क्योंकि हर काम तक़दीर पर टाला नही जाता।
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ज़िंदगी जीने को एक यहाँ ख्वाब मिलता है​;
​यहाँ हर सवाल ​का झूठा जवाब मिलता है​;​
​किसे समझे अपना किसे पराया​;​
​यहाँ हर चेहरे पे एक नकाब मिलता है​। ​
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अपनी जिंदगी के अंधेरों का शुक्रगुजार हूँ मैं;​​​
​जब से मुझे पता चला है कि;​
​तेरी ​​रौशनी ने​ ​ तुझे अंधा बना दिया...
~ Lata Chaudhary
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बच्चा था भूखा और आँखों में अश्क जरुर था​​​​;
​​उस फरिश्ते का करिश्मा भी एक फितूर था​​;
​गोद में बसी माया ने उस भूख को भुला दिया​​;
​​माँ की लोरी के जादू ने उसे फिर से सुला दिया​।
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सर-ऐ-आम ​मुझे ​ये शिकायत है ज़िन्दगी से​;​
क्यूँ मिलता नहीं मिजाज मेरा किसी से...​?​
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ये चाहतें​, ये रौनकें​, पाबन्द है मेरे जीने तक​;​​​
बिना रूह के नहीं रखते​, घर वाले भी ज़िस्म को​।
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ये ना पूछ कि शिकायतें कितनी है तुझसे​;​
ए जिंदगी, सिर्फ ये बता कि तेरा कोई और​;​​
​ सितम बाकि तो नहीं है।​
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ज़िंदगी को बेनियाजे आर्ज़ू करना पड़ा;
आह किन आँखों से अंजामे तमन्ना देखते।
~ Sahir Ludhianvi
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​फुर्सत में करेंगे तुझसे हिसाब​-​ए​-​ज़िन्दगी​;
अभी तो उलझे है खुद को सुलझाने में​...​
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यूँ तो हादसों में गुजरी है हमारी ज़िंदगी;
हादसा ये भी कम नहीं कि हमें मौत ना मिली।
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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है, जिसमें;
हर घड़ी, दर्द के पैबंद लगे जाते है।
~ Faiz Ahmad Faiz
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​बिना लिबास आए थे इस जहां में​;​
बस एक कफ़न की खातिर​;​
इतना सफ़र करना पड़ा​।
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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है, जिसमें;
हर घड़ी, दर्द के पैबंद लगे जाते हैं।
~ Faiz Ahmad Faiz
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रब ने नवाजा हमें जिंदगी देकर;
और हम शौहरत मांगते रह गये;
जिंदगी गुजार दी शौहरत के पीछे;
फिर जीने की मौहलत मांगते रह गये।
~ Lata Chaudhary
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हीरों की बस्ती में हमने कांच ही कांच बटोरे हैं;
कितने लिखे फ़साने, फिर भी सारे कागज़ कोरे है।
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आराम से कट रही थी तो अच्छी थी;
जिंदगी तू कहाँ इन आँखों की बातों में आ गयी!
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दुनियाँ में इतनी रस्में क्यों हैं;
प्यार अगर ज़िंदगी है तो इसमें कसमें क्यों हैं;
हमें बताता क्यों नहीं ये राज़ कोई;
दिल अगर अपना है तो किसी और के बस में क्यों है।
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​रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ है जिन्दगी की​;
कि सुबह का दर्द शाम को, पुराना हो जाता है​।
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यहाँ मज़दूर को मरने की जल्दी यूँ भी है;
कि ज़िंदगी की कश्मकश में कफ़न महंगा ना हो जाए।
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शायद यह वक़्त हम से कोई चाल चल गया;
रिश्ता वफ़ा का और ही रंगों में ढ़ल गया;
अश्क़ों की चाँदनी से थी बेहतर वो धूप ही;
चलो उसी मोड़ से शुरू करें फिर से जिंदगी ।
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​तु ही बता ​ए ज़िंदगी;
इस ज़िंदगी का क्या होगा;
कि हर पल मरने वालों को;
जीने के लिए भी वक़्त नहीं।
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ज़िंदगी हसीं है इससे प्यार करो;
हर रात की नयी सुबह का इंतज़ार करो;
वो पल भी आएगा, जिसका आपको इंतज़ार है;
बस अपने रब पर भरोसा और वक़्त पर ऐतबार करो।
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​रूठी सी ज़िन्दगी को मनाना तो आता है​;​​​​
लोगों को ​हँसाना तो आता है​;​​
क्या हुआ जो न बस सके किसी के दिल में​;​​
लोगों को अपने दिल में बसाना तो आता है।
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जीवन में ज़ख्म बड़े नहीं होते हैं;
उनको भरने वाले बड़े होते हैं;
रिश्ते बड़े नहीं होते हैं;
लेकिन रिश्तों को निभाने वाले बड़े होते हैं।
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चेहरा बता रहा था कि मारा है भूख ने;
सब लोग कह रहे थे कि कुछ खा के मर गया।
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अब तो अपनी तबियत भी कुछ जुदा सी लगती है;
सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा सी लगती है;
कभी राज़ी तो कभी मुझसे खफा सी लगती है;
ज़िंदगी तु ही बता कि तु मेरी क्या लगती है।
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जियो जिंदगी जरुरत के मुताबिक;​
ख्वाइशों के मुताबिक नहीं;​​
जरुरत फ़क़ीर भी कर लेता हैं पूरी;​​
ख्वाइश कभी​ ​बादशाह की ​भी ​पूरी नहीं हुई।​
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​ज़िंदगी भर के लिए है मौत से अनुबंध मेरा​​;
​जब तलक जिंदा रहूँगा पास फटकेगी नहीं वो​।
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​हमारा चार दिन की ज़िंदगी में हाल है ऐसा​;
न जाने लोग कैसे हैं जो सौ सौ साल जीते है​।
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हादसों की ज़द में हैं तो क्या मुस्कुराना छोड़ दें;
जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़ दें??
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जुगनुओं की रोशनी से तीरगी हटती नहीं;
आइने की सादगी से झूठ की पटती नहीं;
ज़िंदगी में गम नहीं फिर ज़िंदगी में क्या मजा;
सिर्फ खुशियों के सहारे ज़िंदगी कटती नहीं।
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क़ब्र की मिट्टी हाथ में लिए सोच रहा हूँ;
लोग मरते हैं तो ग़ुरूर कहाँ जाता है।
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जिदंगी तेरे ख्वाब भी कमाल के है;
तु गरीबों को उन महलों के सपने दिखाती है;
जिसमें अमीरों को नींद नहीं आती।
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मुझको थकने नहीं देता, ये जरूरतों का पहाड़;
मेरे बच्चे मुझे बूढा होने नहीं देते।
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लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ;
सर झुकाना नहीं आता तो झुकाए कैसे।
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मुश्किल में भाग जाना आसान होता है;
हर पहलु जिंदगी का इम्तिहान होता है;
डरने वाले को कुछ नहीं मिलता और;
लड़ने वाले के क़दमों में जहान होता है।
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साहिल पे पहुंचने से इनकार किसे है लेकिन;
तूफ़ान से लड़ने का मज़ा ही कुछ और है;
कहते है, कि किस्मत खुदा लिखता है लेकिन;
उसे मिटा के खुद गढ़ने का मजा ही कुछ और है।
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रोया है बहुत तब जरा करार मिला है;
इस जहाँ में किसे भला सच्चा प्यार मिला है;
गुजर रही है जिंदगी इम्तिहान के दौर से;
एक ख़तम तो दूसरा तैयार मिला है।
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दुनिया सलूक करती है हलवाई की तरह;
तुम भी उतारे जाओगे मलाई की तरह।
~ Munawwar Rana
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जो तेरा है, वो कभी कही भी नहीं जाएगा;
जो तेरा नहीं है, तु उसे कभी नहीं पाएगा;
नेक नीयत रख अपनी तु सदा बन्दे;
एक दिन खुदा भी चलकर तेरे पास आएगा।
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उस फलक के तीर का क्या निशाना था;
जहाँ थी मेरी मंजिल वहीँ तेरा आशियाना था;
बस पहुंच ही रही थी कश्ती साहिल पे;
इस तूफ़ान को भी अभी आना था।
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ज़िंदगी की हर एक उड़ान बाकी है;
हर मोड़ पर एक इम्तिहान बाकी है;
अभी तो सिर्फ़ आप ही परेशान है मुझसे;
अभी तो पूरा हिन्दुस्तान बाकी है।
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तेरी नेकी का लिबास ही तेरा बदन ढकेगा, ऐ बंदे;
सुना है ऊपर वाले के घर, कपड़ों की दुकान नहीं होती।
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जीना चाहता हूँ मगर जिंदगी रास नहीं आती;
मरना चाहता हूँ मगर मौत पास नहीं आती;
उदास हूँ इस जिंदगी से इसलिए क्योंकि;
उसकी यादें तडपाने से बाज नहीं आती।
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ज़िंदगी जिंदादिली का नाम है;
मुर्दादिल ख़ाक जिया करते है?
~ Nasikh
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असफलताए इंसान को तोड़ देती है;
जीवन की राहों को नया मोड़ देती है;
जो करते हैं, जी-जान से प्रयास पूरा;
असफलताएं उनका पीछा छोड़ देती है।
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जिन्दगी की उलझनों ने;
कम कर दी हमारी शरारते;
और लोग समझते हैं कि;
हम समझदार हो गये।
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मौत अंजाम-ए-ज़िन्दगी है मगर;
लोग मरते हैं ज़िन्दगी के लिए।
~ Sahil Manak Puri
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कौन देता है उम्र भर का सहारा;
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं!
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तेरे आज़ाद बन्दों की ना ये दुनिया ना वो दुनिया;
यहाँ मरने की पाबंदी, वहां जीने की पाबंदी!
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जिंदगी जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने;
हम तो नाकाम ही रहे चाहने वालों की तरह!
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आंधियां गम की चलेंगी तो संवर जाऊंगा;
मैं तो दरिया हूँ समंदर में उतर जाऊंगा;
मुझे सूली पे चढाने की ज़रूरत क्या है;
मेरे हाथ से कलम छीन लो मैं मर जाऊंगा!
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देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतना करीब से, कि चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से;
इस रेंगती हयात का कब तक उठाएं भार, बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से;
कुछ इस तरह दिया है ज़िन्दगी ने हमारा साथ जैसे कोई निभा रहा हो रकीब से;
ए रूह-ए-असर जाग कहाँ सो रही है तू, आवाज़ दे रहे हैं पयम्बर सलीब से!
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खुशनसीब हैं वो जो दिल मे किसी को जगह देते हैं;
बेचैनी सहकर भी दूसरों को हंसना सिखा देते हैं;
दुनियावाले लाख चाहें बदनाम उन्हें कर लें;
मगर वो अपनी सादगी से हर दिल में जगह बना लेतें हैं!
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थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ;
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ;
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें;
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ।
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ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म थी और कुछ नहीं;
ये मेरा ही हौंसला है की दरम्यां से गुज़र गया!
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न ख्वाहिशें हैं न शिकवे हैं अब न ग़म हैं कोई;
ये बेख़ुदी भी कैसे कैसे ग़ुल खिलाती है!
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जब टूटने लगे हौंसला तो बस ये याद रखना;
बिना मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते;
ढूढ़ लेना अंधेरे में ही मंजिल अपनी दोस्तों;
क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज़ नहीं होते।
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आगे तो परीजाद ये रखते थे हमें घेर;
आते थे चले आप जो लगती थी ज़रा देर;
सो आके बुढ़ापे ने किया हाय ये अंधेरे;
जो दौड़ के मिलते थे वो अब हैं मुंह फेर।
~ Nazeer Akbarabadi
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कौन अंदाजा मेरे गम का लगा सकता है;
कौन सही राह दिखा सकता है;
किनारों वालों तुम उसका दर्द क्या जानो;
डूबने वाला ही गहराई बता सकता है।
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हंसने के बाद क्यों रुलाती है दुनिया;
जाने के बाद क्यों भुलाती है दुनिया;
जिंदगी में क्या कोई कसर बाकी है;
जो मर जाने के बाद भी जलाती है दुनिया।
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आबादी भी देखी है, वीराने भी देखे हैं;
जो उजड़े और फिर न बसे, दिल की निराली बस्ती है।
~ Fani Badayuni
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हर रिश्ते में विश्वास रहने दो;
जुबान पर हर वक़्त मिठास रहने दो;
यही तो अंदाज़ है जिंदगी जीने का;
न खुद रहो उदास, न दूसरों को रहने दो।
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जिंदगी ने कुछ इस तरह का रूख लिया;
जिसने जिस तरफ चाहा मोड़ दिया;
जिसको जितनी थी जरुरत साथ चला;
और फिर एक लम्हें में तन्हा छोड़ दिया!
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राह में निकले थे ये सोचकर, किसी को बना लेंगे अपना;
मगर इस ख्वाहिश ने, जिंदगी भर का मुसाफिर बना दिया।
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ये भी अच्छा है कि ये सिर्फ़ सुनता है;
दिल अगर बोलता तो क़यामत हो जाती।
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अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का;
सकून ढूढनें चले थे, नींद ही गवा बैठे!
~ अंजली देवी
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ना वो मिलती है, ना मैं रुकता हूँ;
पता नहीं रास्ता गलत है, या मंजिल!
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ठोकरें खाकर भी ना संभले तो मुसाफिर का नसीब;
राह के पत्थर तो अपना फ़र्ज़ अदा करते हैं!
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हजारों झोपड़िया जलकर राख होती हैं;
तब जाकर एक महल बनता है!
आशिको के मरने पर कफ़न भी नहीं मिलता;
हसीनाओं के मरने पर "ताज महल" बनता है!
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ज़िन्दगी तस्वीर भी है और तकदीर भी!
फर्क तो रंगों का है!
मनचाहे रंगों से बने तो तस्वीर;
और अनजाने रंगों से बने तो तकदीर!!!
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तकदीरें बदल जाती हैं, जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो;
वर्ना ज़िन्दगी कट ही जाती है 'तकदीर' को इल्ज़ाम देते देते!
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मेरी इबादतों को ऐसे कबूल कर ऐ, मेरे खुदा;
कि सजदे में मैं झुकूं और मुझसे जुड़े हर रिश्ते की ज़िन्दगी संवर जाये!
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बिना गम के ख़ुशी का पता कैसे चलेगा;
बिना रोंए हुए, हंसी का मज़ा कैसे मिलेगा;
जो उसे करता हैं, उसे वही जानता है;
अगर हम जान गए तो, उसे खुदा कौन कहेगा!
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रास्ते कहा खत्म होते हैं, ज़िन्दगी के इस सफ़र में;
मंजिल तो वही है, जहाँ ख्वाहिशें थम जाये!
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ऐ ज़िन्दगी, तोड़ कर हमको ऐसे बिखेरो इस बार;
न फिर से टूट पायें हम, और न फिर से जुड़ पाओ तुम!
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क्या कहूँ तुझे ख्वाब कहूँ, तो टूट जायेगा;
दिल कहूँ, तो बिखर जायेगा!
आ तेरा नाम ज़िन्दगी रख दूँ;
मौत से पहले तो तेरा साथ छूट न पायेगा!
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बैठ कर किनारे पर मेरा दीदार ना कर;
मुझको समझना है तो समन्दर में उतर के देख!
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किसी को अपना बनाने के लिए हमारी सारी खूबियाँ भी कम पड़ जाती हैं;
जबकि किसी को खोने के लिए एक कमी ही काफी है!
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कितना मुश्किल है ज़िन्दगी का ये सफ़र;
खुदा ने मरना हराम किया, लोगों ने जीना!
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तकदीरें बदल जाती है, जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो;
वरना ज़िन्दगी तो कट ही जाती है, तकदीर को इल्जाम देते देते!
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कुछ अमल भी ज़रूरी है, इबादत के लिए;
सिर्फ सजदा करने से, किसी को जन्नत नहीं मिलती!
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ज़िदगी जाने कितने मोड़ लेती है, हर मोड़ पर नए सवाल देती है;
तलाशते रहते हैं हम जवाब ज़िन्दगी भर;
और जब जवाब मिल जाये तो ज़िन्दगी सवाल बदल देती है!
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अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया क्या पाया?
तो बिना झिझक कह देना जो कुछ खोया वो मेरी नादानी है;
और जो पाया वो मेरे रब की मेहरबानी है!
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मरता नहीं कोई किसी के बगैर ये हकीकत है ज़िन्दगी की
लेकिन सिर्फ सांसें लेने को 'जीना' तो नहीं कहते!
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देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतना करीब से;
चहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से!
साहिर लुधियानवी!
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न सवाल बनकर मिला करो;
न जवाब बनकर मिला करो;
मेरी ज़िन्दगी मेरे ख्वाब हैं;
मुझे ख्वाब बनकर मिला करो!
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दर्द इतना था ज़िन्दगी में की;
धड़कन भी साथ देने से घबरा गयी!
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वक्त कहता है कि फिर नहीं आऊंगा;
तेरी आँखों को अब न रुलाऊंगा!
जीना है तो इस पल को जी ले;
शायद मैं कल तक न रुक पाऊंगा!
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रख हौसला वो मंजर भी आयेगा;
प्यासे के पास चल के समुन्दर भी आयेगा!
थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर;
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आयेगा!
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एक अजीब सी चुभन है आज दिल में कहीं;
कुछ टूट के बिखर गया है जर्रे जर्रे सा!
मत खाओ कसमें सारी ज़िन्दगी साथ निभाने की;
हमने सांसो को भी जुदा होते देखा है!
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काम करो ऐसा, कि पहचान बन जाये;
हर कदम ऐसा चलो, कि निशान बन जाये!
यहाँ ज़िन्दगी तो सभी काट लेते हैं;
ज़िन्दगी जियो ऐसी, कि मिसाल बन जाये!
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वक़्त बदलता है ज़िन्दगी के साथ;
ज़िन्दगी बदलती है वक़्त के साथ;
वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ;
बस अपने बदलते हैं वक़्त के साथ!
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आखिर ज़िन्दगी ने भी आज पूछ लिया मुझ से,
कहाँ है वो शक्स जो तुझे मुझ से भी अज़ीज़ था!
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जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है;
जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी है;
अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीं हमने;
अभी तो सारा आसमान बाकी है!
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छोड़ ये बात कि मिले ये ज़ख़्म कहाँ से मुझ को;
`ज़िन्दगी बस तू इतना बता!` कितना सफर बाकि है!
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बिना लिबास आये थे इस जहां में;
बस एक कफ़न की खातिर इतना सफ़र करना पड़ा!
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मंजिल तो मिल ही जाएगी, भटक के ही सही;
गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं!
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एक ही गलती हम सारी उम्र करते रहे;
धूल चेहरे पे थी;
और हम आइना साफ़ करते रहे!
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सारी उम्र अधुरा रहा मैं, जब सांस रुकी लोग कहते पूरा हो गया!
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आपके आने से ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!
दिल में बसाई है जो वो आपकी ही सूरत है!
दूर जाना नहीं हमसे कभी भूलकर भी!
हमे हर कदम पर आपकी ज़रूरत है!
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कल फुर्सत न मिली तो क्या होगा!
इतनी मोहलत न मिली तो क्या होगा!
रोज़ कहते हो कल मिलेंगे, कल मिलेंगे!
कल मेरी आँखे न खुली तो क्या होगा!
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तुम खफा हो गए तो कोई ख़ुशी न रहेगी!
तेरे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी!
क्या कहे क्या गुजरेगी दिल पर!
जिंदा तो रहेंगे पर ज़िन्दगी न रहेगी!
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कशिश होनी चाहिए किसी को याद करने की!
लम्हे तो अपने आप मिल जायेंगे!
वक़्त होना चाहिए किसी को मिलने का!
बहाने तो अपने आप मिल जायेंगे!
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ज़िन्दगी से पूछिये ये क्या चाहती है!
बस एक आपकी वफ़ा चाहती है!
कितनी मासूम और नादान है ये!
खुद बेवफा है और वफ़ा चाहती है!
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हंसरते रह जायेगी आपके बिना अधूरी!
ज़िन्दगी न होगी आपके बिना पूरी!
अब और सही जाये न यह दूरी!
जीने के लिये आपका साथ है बहुत ज़रूरी!
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कोशिश करो की कोई हम से न रूठे!
जिन्दगी में अपनों का साथ न छूटे!
रिश्ते कोई भी हो उसे ऐसे निभाओ!
कि उस रिश्ते की डोर ज़िन्दगी भर न छूटे!
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फिर न सिमटेगी अगर दोस्ती बिखर जायेगी!
ज़िन्दगी जुल्फ नहीं जो फिर से संवर जायेगी!
जो ख़ुशी दे तुम्हें थाम लो दामन उसका!
ज़िन्दगी रो कर नहीं हंस कर गुज़र जायेगी!
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जिंदगी की किताब के कुछ पन्ने होते है!
कुछ अपने और कुछ बेगाने होते हैं!
प्यार से संवर जाती है जिंदगी!
बस प्यार से रिश्ते निभाने होते है !
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भरी महफिल में तन्हा मुझे रहना सिखा दिया !
तेरे प्यार ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया !
किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो !
सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप -चाप सहना सिखा दिया !
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ज़िन्दगी जैसे एक सज़ा सी हो गयी है !
ग़म के सागर में कुछ इस कदर खो गयी है !
तुम आ जाओ वापिस यह गुज़ारिश है मेरी !
शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गयी है !
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साथ रहते रहते वक़्त गुज़र जाएगा!
दूर होने के बाद कौन किसे याद आएगा!
जी लो ये पल जब तक हम साथ है!
कल का क्या पता हम हो न हो!
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धीरे धीरे दिल ने धड़कना सीखा!
धीरे धीरे दिल ने सम्भलना सीखा!
धीरे धीरे हर राह पर चलना सीखा!
और धीरे धीरे हर मौसम में हमने हंसना सीखा!
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ज़िन्दगी, बस इतना अगर दे दो तो काफी है,
सिर से चादर ना हटे, पाँव भी चादर में रहें।
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यह ज़िन्दगी बस सिर्फ पल दो पल है;
जिसमें न तो आज और न ही कल है;
जी लो इस ज़िंदगी का हर पल इस तरह;
जैसे बस यही ज़िन्दगी का सबसे हसीं पल है।
----------
वक़्त सबको मिलता है ज़िंदगी बदलने के लिए;
पर ज़िंदगी दोबारा नहीं मिलती वक़्त बदलने के लिए।
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ज़िन्दगी तस्वीर भी है और तक़दीर भी,
फर्क तो सिर्फ रंगों का है।
मनचाहे रंगों से बने तो तस्वीर और अनजाने रंगों से बने तो तक़दीर।
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दर्द कैसा भी हो कभी आँख नम ना करो;
रात काली सही लेकिन ग़म ना करो;
एक सितारा बन जगमगाते रहो;
ज़िन्दगी में यूँ ही सदा मुस्कुराते रहो।
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चेहरे की हँसी से ग़म को भुला दो;
कम बोलो पर सब कुछ बता दो;
खुद ना रूठो पर सब को हँसा दो;
यही राज़ है ज़िन्दगी का जियो और जीना सीखा दो।
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छोटी सी है जिंदगी हँस के जियो;
भुला के सारे गम दिल से जियो;
उदासी में क्या रखा है मुस्कुरा के जियो;
अपने लिए न सही अपनों के लिए जियो।
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ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब है;
जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये;
ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे;
सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।
----------
देखो तो ख्वाब है ज़िन्दगी;
पढ़ो तो किताब है ज़िन्दगी;
सुनो तो ज्ञान है ज़िन्दगी;
पर हमें लगता है कि हँसते रहो तो आसान है ज़िन्दगी।
----------
ज़िंदगी तो सभी के लिए एक रंगीन किताब है;
फर्क बस इतना है कि कोई हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है;
और कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है।
----------

फूल बनकर मुस्कुराना है ज़िंदगी;
मुस्कुराते हुए सब ग़म भुलाना है ज़िंदगी;
जीत का जश्न तो हर कोई मना लेता है;
हार कर खुशियां मनाना भी है ज़िंदगी।
----------
ज़िंदगी में कभी उदास मत होना;
कभी किसी बात पर निराश ना होना;
ज़िंदगी है संघर्ष चलती ही रहेगी;
कभी हार कर अपने जीने का अंदाज़ मत खोना।
----------
कोई खुशियों की चाह में रोया;
कोई दुखों की पनाह में रोया;
अजीब सिलसिला है ये ज़िंदगी का;
कोई भरोसे के लिए रोया, कोई भरोसा करके रोया।
----------
वक़्त बदल जाता है इंसान बदल जाते हैं;
वक़्त वक़्त पे रिश्तों के अंदाज़ बदल जाते हैं;
कभी कह दिया अपना तो कभी कर दिया पराया;
दिन और रात की तरह ज़िंदगी के एहसास बदल जाते हैं।
----------
ज़िंदगी पल-पल ढलती है;
जैसे रेत बंद मुट्ठी से फिसलती है;
शिकवे कितने भी हो हर पल;
फिर भी हँसते रहना;
क्योंकि ये ज़न्दगी जैसी भी है,
बस एक बार ही मिलती है।
----------
ज़िंदगी ज़ख्मों से भरी है;
वक़्त को मरहम बनाना सीख लो;
हारना तो है मौत के सामने एक दिन;
फ़िलहाल ज़िंदगी से जीतना सीख लो।
----------
जब ज़िंदगी हंसाये तो समझना कि अच्छे कर्मों का फल मिल रहा है;
और जब ज़िंदगी रुलाये तो समझ लेना कि अच्छे कर्म करने का वक़्त आ गया है।
----------
हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का;
एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का;
बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते;
यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का।
----------
ज़िंदगी जब भी आपको रुलाने लगे;
आप इतना मुस्कुराओ कि दर्द भी शर्माने लगे;
निकले ना आँसू आँखों से आप के कभी;
किस्मत भी मज़बूर होकर आपको हँसाने लगे।
----------
फूल बनकर मुस्कुराना ही ज़िंदगी है;
मुस्कुरा कर गम भुलाना ही ज़िंदगी है;
जीत कर कोई खुश हो तो अच्छा है;
हार कर भी खुशियां मनाना ही ज़िंदगी है।
----------
वो यारों की महफ़िल वो मुस्कुराते पल;
दिल से जुदा है अपना बीता हुआ कल;
कभी गुज़रती थी ज़िंदगी वक़्त बिताने में;
अब वक़्त गुज़रता है चाँद कागज़ के नोट कमाने में।
----------
ख्वाहिश ऐसी करो कि आसमान तक जा सको;
दुआ ऐसी करो कि खुदा को पा सको;
यूँ तो जीने के लिए पल बहुत कम हैं;
जियो ऐसे कि हर पल में ज़िंदगी पा सको।
----------
बहुत कुछ सिखा जाती है ये ज़िंदगी;
हँसा के भी रुला जाती है ये ज़िंदगी;
जी सको जितना उतना जी लो दोस्तो;
क्योंकि बहुत कुछ बाकी रह जाता है और ख़त्म हो जाती है ज़िंदगी।
----------
बचपन में जब धागों के बीच माचिस को फसाकर फोन-फोन खेलते थे,
तो मालूम नहीं था एक दिन इस फोन में ज़िंदगी सिमटती चली जायेगी।
----------
हँस कर जीना यही दस्तूर है ज़िंदगी का;
एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का;
बीते हुए पल कभी लौटकर नहीं आते;
बस यही एक कसूर है ज़िंदगी का।
----------
क्या है यह ज़िंदगी:
देखो तो ख्वाब है ये ज़िंदगी;
पढ़ो तो किताब है ये ज़िंदगी;
सुनो तो ज्ञान है ये ज़िंदगी;
हँसते रहो तो आसान है ये ज़िंदगी।
----------
ज़िंदगी पल-पल ढलती है;
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है;
शिकवे कितने भी हों पर हर पल हँसते रहना;
क्योंकि ये ज़िंदगी जैसी भी एक है बस एक ही बार मिलती है।
----------
दिल से कभी तूने पुकारा ही नहीं;
चाह कर भी दूर कभी हुआ नहीं;
वक़्त की बेड़ियों ने किया कमज़ोर सही;
ज़िंदगी का सही मतलब समझा ही नहीं।
----------
मौत मिलती है न ज़िंदगी मिलती है;
ज़िंदगी की राहों में बेबसी मिलती है;
रुला देते हैं क्यों मेरे अपने;
जब भी मुझे कोई ख़ुशी मिलती है।
----------
तेरे ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ;
ज़िंदगी तेरी चाहत में सवार लूँ;
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह;
तमाम उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़र लूँ।
----------
ज़िंदगी में कभी उदास मत होना;
कभी किसी बात पर निराश मत होना;
ज़िंदगी संघर्ष है, चलती ही रहेगी;
कभी अपने जीने का अंदाज़ मत बदलना।
----------
फूल बनके खुशबु फैलना ही है ज़िंदगी;
हर दर्द को हँसी में छुपा लेना ही है ज़िन्दगी;
ज़िंदगी में जीत मिली तो क्या हुआ;
हार कर भी ख़ुशी जताना ही है ज़िंदगी।
----------
ज़िंदगी बहुत कुछ सिखाती है, कभी हँसाती है कभी रुलाती है;
पर जो हर हाल में खुश रहते हैं, ज़िंदगी उनके आगे सिर झुकाती है।
----------
सपना ऐसा देखो कि आसमान तक जा सको;
दुआ ऐसी करो कि खुदा को पा सको;
यूँ तो ज़िंदगी जीने में बहुत कम पल हैं;
पर जियो तो ऐसे कि हर पल में ज़िंदगी पा सको।
----------
ज़िंदगी ज़ख्मों से भरी है, वक़्त को मरहम बनाना सीख लो;
हारना तो है ही मौत के हाथों एक दिन, फिलहाल ज़िंदगी को जीना सीख लो।
----------
ज़िंदगी जाने कितने मोड़ लेती है;
हर मोड़ पर नए सवाल देती है;
तलाशते रहते हैं हम जवाब ज़िंदगी भर;
और जब जवाब मिल जाये तो ज़िंदगी सवाल बदल देती है।
----------
जिदंगी तेरे ख्वाब भी कमाल के है।
तू गरीबों को उन महलों के सपने दिखाती है;
जिसमें अमीरों को नींद नहीं आती।
----------
जाने कौन सा तराना है ये ज़िन्दगी;
बिना बात का फ़साना है ये ज़िन्दगी;
एक अरस गुज़र गया पत्तों के साथ गिरे हुए;
पर आज भी उम्मीद का खज़ाना है ज़िन्दगी!
----------
जिंदगी जीना आसान नहीं होता;
बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता;
जब तक न पड़े हथोड़े की चोट;
पत्थर भी भगवान नहीं होता।
----------
ज़िंदगी छोटी नहीं होती बस हमारी ख्वाहिश बढ़ जाती है;
उसी तरह कोई बुरा नहीं होता, बस हमारी सोच बदल जाती है।
----------
ना किसी के 'आभाव' में जियो, ना किसी के 'प्रभाव' में जियो;
ये जिंदगी आपकी है, बस इसे अपने मस्त 'स्वाभाव' में जियो।
----------
कभी-कभी ज़िंदगी में ये तय करना बड़ा मुश्किल हो जाता है कि गलत क्या है?
वो झूठ जो चेहरे पे मुस्कान लाए;
या वो सच जो आँखों में आंसू लाए।
----------
ज़िंदगी गुरु से ज्यादा सख्त होती है;
गुरु सबक देकर इम्तिहान लेता है और ज़िंदगी इम्तिहान लेकर सबक देती है।
----------
ज़िंदगी में हम ने कभी कुछ चाहा ही नहीं;
जिसे चाहा उसे कभी पाया ही नहीं;
जिसे पाया उसे यूँ खो दिया;
जैसे ज़िंदगी में कभी कोई आया ही नहीं।
----------
वक़्त सबको मिलता है ज़िंदगी बदलने के लिए;
पर ज़िंदगी दोबारा नहीं मिलती वक़्त बदलने के लिए।
----------
हर पल में प्यार है, हर लम्हें में ख़ुशी है;
कह दो तो यादें हैं,जी लो तो ज़िंदगी है।
----------
ज़िंदगी ने पुछा, "सपना क्या होता है?"
तो हक़ीक़त बोली, "बंद आँखों में जो अपना होता है, खुली आँखों में वही सपना होता है।"
----------
जिसकी सुबह अच्छी, उसका दिन अच्छा;
जिसकी शाम अच्छी, उसकी रात अच्छी;
जिसके दोस्त अच्छे, उसकी ज़िंदगी अच्छी।
----------
बहुत रोया था मैं, जब मेरा जन्म हुआ था और हँस रही थी यह दुनियाँ;
बदला लूंगा एक दिन मौत के समय हँसता हुआ जाउंगा और रोएगी यह दुनिया।
----------
खुशियाँ बटोरते बटोरते उम्र गुजर गई , पर खुश ना हो सके, एक दिन एहसास हुआ , खुश तो वो लोग थे जो खुशियाँ बांट रहे थे!
----------
सपनों की मंज़िल पास नहीं होती;
ज़िंदगी हर पल उदास नहीं होती;
ख़ुदा पे यकीन रखना मेरे दोस्त;
कभी-कभी वो भी मिल जाता है जिसकी आस नहीं होती।
----------
ज़िंदगी एक तीन पेज की पुस्तक की तरह है;
पहला और अंतिम पेज भगवान ने लिख दिया है;
पहला पेज जन्म और अंतिम पेज मृत्यु;
बीच के पेज को भरना है प्यार, विश्वास और मुस्कुराहट से।
----------
चेहरे की हंसी से हर ग़म छुपाओ;
बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना बताओ;
खुद ना रूठो कभी, पर सब को मनाओ;
राज़ है यह ज़िंदगी का बस जीते चले जाओ!
----------
मनुष्य का अपना क्या है?
जन्म दूसरे ने दिया;
नाम दूसरे ने दिया;
शिक्षा दूसरे ने दी;
काम करना भी दूसरे ने सिखाया;
अंत में शमशान भी दूसरे ले जायेंगे।
तुम्हारा अपना इस संसार में क्या है जो इतना घमंड करते हो।
----------
ज़िंदगी में टेंशन ही टेंशन है;
फिर भी इन लबों पर मुस्कान है;
क्योंकि जीना जब हर हाल में है;
तो मुस्करा के जीने में क्या नुक्सान है।
----------
ज़िन्दगी पल-पल ढलती है;
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है;
शिकवे कितने भी हो हर पल; फिर भी हँसते रहना...
क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है;
बस एक ही बार मिलती है।
----------
ख़्वाहिश ऐसी करो कि आसमान तक जा सको;
दुआ ऐसी करो कि खुद को पा सको;
यूँ तो जीने के लिए पल बहुत कम हैं;
जीयो ऐसे कि हर पल में ज़िंदगी पा सको!
----------
कैसे कहें कि ज़िंदगी क्या देती है;
हर कदम पे ये दगा देती है;
जिनकी जान से भी ज्यादा कीमत हो दिल में;
उन्ही से दूर रहने की सज़ा देती है।
----------
चाह रखने वाले, मंज़िलों को ताकते नहीं;
बढ़ कर थाम लिया करते हैं;
जिनके हाथों में हो वक़्त की कलम;
अपनी किस्मत वो खुद लिखा करते हैं।
----------
ज़िंदगी तो सभी के लिए एक रंगीन किताब है;
फर्क है तो बस इतना कि कोई हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है;
और
कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है।
----------
हँसाने के बाद क्यों रुलाती है दुनिया;
प्यार दे कर भी क्यों भूलती है दुनिया;
ज़िन्दगी में क्या क़सर बाकी रह गयी थी;
जो मर जाने के बाद भी जलाती है दुनिया।
----------
जिंदगी का सफ़र तो एक हसीन सफ़र है;
हर किसी को किसी की तलाश है;
किसी के पास मंजिल है तो राह नहीं;
और किसी के पास राह है तो मंजिल नहीं।
----------
कोई खुद से भी प्यारा होता है;
कोई तो दिल का सहारा होता है;
जरूरी नहीं जिंदगी अपने लिए ही प्यारी हो;
जिंदगी में कोई तो जिंदगी से भी प्यारा होता है।
----------
गम सहकर भी मुस्कुराओ दुनिया में;
यहाँ बुजदिलों की गुजर नहीं होती;
हँसना भी जरूरी है जीने के लिए;
रोकर जिंदगी बसर नहीं होती।
----------
दुनिया में कोई किसी के लिए कुछ नहीं करता;
मरने वाले के साथ हर कोई नहीं मरता;
अरे यहाँ मरने कि बात तो दूर रही;
यहाँ तो जिंदगी है, फिर भी कोई याद नहीं करता।
----------
ये साली जिंदगी भी इअर-फ़ोन के जैसी है;
लाख सुलझा के रखो, लेकिन उलझ ही जाती है।
----------
फूल बनकर मुस्कुराना जिंदगी;
मुस्कुरा के गम भुलाना जिंदगी;
जीत कर कोई खुश हो तो क्या हुआ;
हार कर खुशियाँ मनाना है जिंदगी।
----------
ख़ुशी की परछाईयों का नाम है जिंदगी;
ग़मों की गहराइयों का नाम है जिंदगी;
एक प्यारा सा प्यार है हमारा;
उसी की प्यारी सी हंसी का नाम है जिंदगी।
----------
ज़िंदगी बड़ी अजीब होती है;
कभी हार कभी जीत होती है;
तमन्ना रखो समंदर की गहराई छूने की;
किनारों पे तो बस ज़िंदगी की शुरुआत होती है।
----------
खोकर पाने का मज़ा ही कुछ और है;
रोकर मुस्कुराने का मज़ा ही कुछ और है;
हार तो जिंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त;
हार के बाद जीतने का मजा ही कुछ और है।
----------
जिंदगी से हम गिला नहीं करते;
किस्मत जिनकी न हो वो मिला नहीं करते;
दिल पे जख्म कुछ ऐसे खायें हैं हमने;
जितने यह गहरे हैं, उतने कभी सिला नहीं मिलते।
----------
जिंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं:
"सांस और साथ" सांस टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है;
पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल-पल मरता है।
----------
जिंदगी भर कोई साथ नहीं देता;
ये जान लिया है अब;
लोग भी तभी याद करते हैं;
जब वो खुद अकेले हों तब।
----------
मेरा हर लम्हा चुरा लिया आपने;
आँखों को एक चाँद दिया आपने;
हमें जिंदगी दी और किसी ने;
पर प्यार इतना देकर जीना सिखा दिया आपने।
----------
बड़े अजीब हैं ये जिन्दगी के रास्ते;
अनजाने मोड़ पर कुछ लोग दोस्त बन जाते हैं;
मिलने की खुशी दें या न दें;
बिछड़ने का गम जरुर दे जाते हैं।
----------
जिंदगी का सफ़र तो एक हसीन सफ़र है;
हर किसी को किसी की तलाश है;
किसी के पास मंजिल है, तो राह नहीं;
और किसी के पास राह है तो मंजिल नहीं।
----------
अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं;
यार की खातिर तो कांटे भी कबूल हैं;
हंस कर चल दूं कांच के टुकड़ों पर भी;
अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं।
----------
जिंदगी को क्या जरुरत है मंजिलों की;
वक्त हर मंजिल आसान बना देता है;
मरता नहीं किसी से जुदा होकर कोई;
ये वक सबको जीना सिखा देता है।
----------
जिंदगी ने कुछ इस तरह का रूख लिया;
जिसने जिस तरफ चाहा मोड़ दिया;
जिसको जितनी थी जरुरत साथ चला;
और फिर एक लम्हें में तन्हा छोड़ दिया।
----------
जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ - ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।
क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है;
और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है।
----------
गम न हो वहां जहाँ हो फ़साना आपका;
खुशियाँ ढूढती रहें आशियाना आपका;
वो वक़्त ही न आये जब आप उदास हों;
ये दुनिया भुला न सके मुस्कुराना आपका।
----------
जवानी भी जिंदगी का क्या दौर होती है;
निगाहें भी कम्बख्त दिलों का चोर होती हैं;
याद आते ही आज भी मुस्कान दे जाती है;
इश्क में इंतज़ार की बात ही कुछ और होती है।
----------
मत कर तलाश मंजिलों की;
खुदा खुद ही मंजिल दिखा देता है;
यूं तो मरता नहीं कोई किसी के बिना;
वक्त सबको जीना सिखा देता है।
----------
अजीब तरह से सोचा था जिंदगी के लिए;
जीना मरना था उसी के लिए;
वो मुझे तन्हा छोड़ गई तो यकीन आया;
कोई नहीं मरता किसी के लिए।
----------
बनती है अगर बात तो बांट लो हर ख़ुशी;
गम न ज़ाहिर करो तुम किसी से कभी;
दिल की गहराई में गम छुपाते रहो;
चार दिन की जिंदगी में सदा मुस्कुराते रहो।
----------
कोई खुशियों की चाह में रोया;
कोई दुखों की पनाह में रोया;
अजीब सिलसिला है ये जिंदगी का;
कोई भरोसे के लिए रोया;
तो कोई भरोसा करके रोया।
----------
जिंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं:
"सांस और साथ"
सांस टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है;
पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल-पल मरता है।
----------
जिंदगी जीना आसान नहीं होता;
बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता;
जब तक न पड़े हथोड़े की चोट;
पत्थर भी भगवान नहीं होता!
----------
जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है;
जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी हैं;
अभी तो नापी है मुटठी भर ज़मीन आपने;
आगे अभी सारा आसमान बाकी है।
----------
जिंदगी में 4 बातें आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगी:
1. दिल की धड़कन।
2. परछाईं।
3. खुशियां।
4. एक उससे रिश्ता जिसका आप मैसेज पढ़ रहे हो।
----------
जिंदगी तो सभी के लिए सामान्य है।
फर्क तो बस इतना है कि कोई दिल से जी रहा है;
और
कोई दिल रखने के लिए जी रहा है।
----------
जिंदगी हर हाल में ढलती है;
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है;
गिले शिकवे कितने भी हो;
लेकिन हर हाल में हँसते रहना;
क्योंकि जिंदगी ठोकरों से ही संभलती है।
----------
जिंदगी में कुछ फैसले हम खुद लेते हैं, और कुछ हमारी तकदीर।
बस अंतर तो सिर्फ इतना है कि तकदीर के फैसले हमें पसंद नहीं आते
और
हमारे फैसले तकदीर पसंद नहीं करती।
----------
मौत का डर, जिंदगी के डर से ही आता है;
जो शख्स भरपूर जिंदगी जीता है;
वह किसी भी वक्त मौत को गले लगाने के लिए तैयार रहता है।
----------
प्यार में वक्त गुजर जाता है;
और
वक्त में प्यार गुजर जाता है।
----------
देखो तो ख्वाब है जिंदगी;
पढ़ो तो किताब है जिंदगी;
सुनो तो ज्ञान है जिंदगी;
पर हँसते रहो तो आसान है जिंदगी।
----------
जिंदगी की उलझनों ने हमारी शरारतों को कम कर दिया;
और लोग समझते हैं कि हम समझदार हो गए।
----------
वक़्त भी लेता है करवटे ना जाने कैसे-कैसे;
उम्र इतनी तो नहीं थी, जितने सबक सीख लिए मैंने।
----------
छोटी सी जिंदगी है हंस के जिओ;
भुला के सारे गम दिल से जिओ;
उदासी में क्या रखा है मुस्कुरा के जिओ;
अपने लिए न सही अपनों के लिए जिओ।
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जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बैठाओ;
रोने का टाइम कहां, सिर्फ मुस्कुराओ;
चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा;
बस याद रखना "जिंदगी ना मिलेगी दोबारा"।
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जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है;
थोड़ा रुलाती है थोड़ा हसाती है;
खुद से ज्यादा किसी पे भरोसा मत करना;
क्योंकि अँधेरे में तो परछाईं भी साथ छोड़ जाती है।
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ख़ुशी ने वादा किया था कि वो 5 दिन बाद लौट आयेगी। पर जब हमने जिंदगी की किताब खोल के देखी तो कमबख्त जिंदगी ही 4 दिन की थी।
इसलिए हर दिन का आनंद लीजिये।
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ज़िन्दगी एक प्रतिस्पर्धा है; और दो ही विकल हैं:
1. भाग लो
या
2. भाग लो
मर्ज़ी आपकी है।
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जिंदगी आईसक्रीम की तरह है।
टेस्ट करो तो भी पिघलती है;
वेस्ट करो तो भी पिघलती है।
इसलिए जिंदगी को टेस्ट करना सीखो, वेस्ट तो हो ही रही है।
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मौत को तो मैंने कभी देखा नहीं;
पर वो यकीनन बहुत खूबसूरत होगी;
कमबख्त जो भी उससे मिलता है;
जिंदगी जीना ही छोड़ देता है।
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जिंदगी एक पल है;
जिसमें न आज है न कल है;
जी लो इसको इस तरह;
कि जो भी आपसे मिले वो यही कहे;
बस यही 'मेरी' जिंदगी का सबसे हसीन पल है।
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लफ्ज़ वही हैं, माईने बदल गये हैं;
किरदार वही, अफ़साने बदल गये हैं;
उलझी ज़िन्दगी को सुलझाते सुलझाते;
ज़िन्दगी जीने के बहाने बदल गये हैं।
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जिंदगी से आप जो भी बेहतर से बेहतर ले सको, ले लो;
क्योंकि
जब जिंदगी लेना शुरू करती है तो 'सांसे' भी नहीं छोड़ती।
शुभ दिवस।
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संता: रात में मैंने सपने में देखा कि एक लड़का तुम्हारी किस लेने की कोशिश कर रहा है।
जीतो: तो क्या लड़का सफल हुआ?
संता: नहीं।
जीतो: तो फिर कोई और होगी, मैं नहीं।
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जिंदगी से आप जो बेहतर से बेहतर ले सको ले लो;
क्योंकि
जिंदगी जब लेना शरू करती है तो सांसे भी नहीं छोड़ती।
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अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है;
जिस चीज़ को चाह है वो ही बेगानी है;
हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए;
वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है।
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अपनी तो ज़िन्दगी अजीब कहानी है;
जिस चीज़ को चाह वो ही बेगानी है;
हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए;
वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है।
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चेहरे की हंसी से हर गम चुराओ;
बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना छुपाओ;
खुद ना रूठो कभी पर सबको मनाओ;
राज़ है ये जिंदगी का बस जीते चले जाओ।
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जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है;
कभी हंसती है तो कभी रुलाती है;
पर जो हर हाल में खुश रहते हैं;
जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है।
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दिल तो करता है जिंदगी को किसी क़ातिल के हवाले कर दूँ;
जुदाई में यूँ रोज़ रोज़ मरना मुझे अच्छा नहीं लगता!
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जब से पता चला है, कि मरने का नाम है 'जिंदगी';
तब से, कफ़न बांधे कातिल को ढूढ़ते हैं!
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जीवन में सबसे कठिन दौर यह नहीं है जब कोई तुम्हें समझता नहीं है;
बल्कि यह तब होता है जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते।
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पैसे की दौड़ में पाप धोने को मिले ना मिले;
फिर से जीवन में पुण्य कमाने को मिले ना मिले;
कर लो कर्म दिल से;
क्या पता दोबारा ये जीवन मिले ना मिले।
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रोने से किसी को पाया नहीं जाता;
खोने से किसी को भुलाया नहीं जाता;
वक्त सबको मिलता है ज़िंदगी बदलने के लिए;
पर ज़िंदगी नहीं मिलती वक्त बदलने के लिए।
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मंजिल उन्हीं को मिलती है;
जिनके सपनो में जान होती है;
पंख से कुछ नहीं होता;
हौंसलों से ही उड़ान होती है।
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हम अपनी ज़िंदगी में हर किसी को इसीलिए एहमियत देते हैं;
क्योंकि जो अच्छा होगा वो ख़ुशी देगा;
और जो बुरा होगा वो सबक देगा।
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जीवन में किसी का 'भला' करोगे,
तो 'लाभ' होगा क्योंकि 'भला' का उल्टा 'लाभ' होता है।
और जीवन में किसी पर 'दया' करोगे,
तो वो 'याद' करेगा क्योंकि 'दया' का उल्टा 'याद' होता है।
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जब छोटे थे तो ज़ोर-ज़ोर से रोते थे अपनी पसंद को पाने के लिए;
अब बड़े हो गए हैं तो चुपके से रोते है अपनी पसंद छुपाने के लिए।
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मैंने ज़िंदगी से पुछा कि तू इतनी कठिन क्यों है?
ज़िंदगी ने हंसकर कहा, "दुनियां आसान चीज़ों की कद्र नहीं करती"।
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वक़्त बदलता है ज़िंदगी के साथ;
ज़िंदगी बदलती है वक़्त के साथ;
वक़्त नहीं बदलता है अपनों के साथ;
बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ।
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ज़िंदगी एक रात है;
जिसमें ना जाने कितने ख्वाब हैं;
जो मिल गया वो अपना है;
जो टूट गया वो सपना है।
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कोई नहीं होता हमेशा के लिए किसी का;
लिखा है साथ थोड़ा-थोड़ा सभी का;
मत बनाओ किसी को अपने जीने की वजह;
क्योंकि जीना है अकेले, यह असूल है ज़िंदगी का।
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हर सपना कुछ पाने से पूरा नहीं होता;
कोई किसी के बिन अधूरा नहीं होता;
जो चाँद रौशन करता है रात भर सब को;
हर रात वो भी तो पूरा नहीं होता।
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हँसना ज़िंदगी है;
हँस कर गम भुलाना ज़िंदगी है;
जीत कर हँसे तो क्या हँसे;
हार कर ख़ुशियाँ मनाना ज़िंदगी है।
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जीवन में सबसे कठिन दौर यह नहीं है जब कोई तुम्हें समझता नहीं है;
बल्कि;
यह तब होता है जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते।
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मरता नहीं कोई किसी के बगैर ये हकीकत है जिंदगी की; 
लेकिन
सिर्फ साँसें लेने को 'जीना' तो नहीं कहते।
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पैसे की रेस में पाप धोने को मिले ना मिले;
फिर से जीवन में पूण्य कमाने को मिले ना मिले;
कर लो कर्म दिल से;
क्या पता अगले जन्म ये जीवन मिले ना मिले।
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जीवन में एक बार जो फैसला कर लिया तो फिर पलट कर मत देखो;
क्योंकि;
पलट-पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते।
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जीवन में तीन गिफ्ट कभी मिस मत करना।
1. प्रेमी (Lover): भगवान का दिया गिफ्ट।
2. माता-पिता (Parents): गिफ्ट में आये भगवान।
3. दोस्ती (Friendship): भगवान को भी नहीं मिलने वाला गिफ्ट।
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नींद तो बचपन में आती थी.....
अब तो सिर्फ सोते है हम।
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आप अपने जीवन काल के लिए कुछ नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप इसे मूल्यवान बनाने के लिए कुछ अवश्य ही कर सकते हैं।
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जिंदगी ने पूछा, सपना क्या होता है?
तो हक़ीकत बोली, ''बंद आँखों में जो अपना होता है, खुली आँखों में वही सपना होता है।''
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जब कोई हमसे पूछता है, "हाल-चाल कैसा है, कैसी गुजर रही है?"
तो बस इतना कह देता हूँ:
ज़िन्दगी में ग़म है;
ग़म में ही मज़े हैं;
और मज़े में हम हैं!
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बिना लछ्य के जीवन, बिना पता लिफ़ाफ़े के समान है;
जो कहीं भी कभी नहीं पूहंच सकता!
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हे जिंदगी, ले चल मुझे वहाँ, जो मुकाम आखरी हो;
ज़िंदगी तेरी सफ़र का जो अंजाम आखरी हो!
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Jeene Ki Tamanna Toh Bohot Hai,
Par Koi Ata He nahi Zindagi me ZiNdagI Ban Kar.

Bhut thak gya tha parwah krte krte..
Jab se laparwah hua hu…aaram sa hai..

यूँ तो ए ज़िन्दगी तेरे सफर से शिकायते बहुत थी,
मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारे बहुत थी !!

Diwar ka calender toh badalta hai har saal,
ab ke baras Zindagi bhi badal de maula ….

Itni Bad-Saluki Na Kar Aye Zindgi,
Hum Kaun Sa Yehan Baar Baar Aane Wale Hain.

Zindagi se hum kuchh udhaar nahi lete….
Kafan bhi lete hain to apni zindagi de kar…..

सुबह सुबह उठना पड़ता है…, कमाने के लिए,,
आराम कमाने निकलता हूँ…, आराम छोड़कर..

Khareed sakte to use zindagi bech kar khareed lete,
Par kuchh log keemat se nahin kismat se mila karte hain…

Zindagi Hai So GuzaR Rahi Hai Warna,
Hume guzRe To Zamane Huye.!!

Zindagi mein bohat kum milli hain,,
Woh cheez jisse shiddat se chaha maine…!!

Wo Paish Lafz Tha Jisne Rula Dia Tujhay….
Sambhal Khud Ko Abhi Zindagi Baki Hai …

Tera Nazariya Mere Nazariye Se Alag Tha Shayad…
Tune Sirf Waqt Gujara Tha Or Hamne Zindagi….

जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुझसे!
रहने दे मगर आज इतवार हैं !!

है मोहलत “चार” दिन की,, और हैं “सौ” काम करने को,
हमें “जीना” भी है, “मरने” की तैयारी भी करनी है….!!

माथे को चूम लूँ मैं और उनकी जुल्फ़े बिखर जाये,
इन लम्हों के इंतजार में कहीं जिंदगी न गुज़र जाये..

ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही
जी जाती हे …
दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं

एक ही समानता है पतंग औऱ जिन्दगी मॆं,,
ऊँचाई में हो तब तक ही “वाह-वाह” होती हैं….!!

चौराहे पर खड़ी ज़िन्दगी, बीच रास्ते पड़ी ज़िन्दगी,
बच्चों सी है शायद आज अपनी जिद पर अड़ी ज़िन्दगी….

Sab zindagi ke daud me aage nikal gaye
mai dusro ko rah dikhane me rah gaya

कौन कहता है की ज़िन्दगी बहुत छोटी है. . .
सच तो ये है की हम जीना ही देर से शुरू करते है. . .

Tut Kar Wo Rishte Bhikar Jate Hain,
Jin Rishto Ko Aapni Manzil Nahi Milti.!!

Chalo Bikharne Dete Hain Zindgi Ko Ab,
Sabhaalne Ki Bhi to Ek Had Hoti Hai.

Zindagi Yoon He Bahut Kam Hai Mohabbat Ke Liye
Ruth Kar Aisey Yoon Waqt Zayar Na Kiya Karo.

Kaisi guzar rahi hai sabhi poochte hai,
Kaisa guzartaa hu koi nahi poochta.

Zindagi Guzar Rehi Hai Imtehano K Dour Se
Ek Zakham Bharta Nai or Dusra Aaney Ki Zidd Karta Hai.

bahut pahle se un qadmon ki aahaT jaan lete hain
tujhe ai zindagi hum dur se pahchan lete hain…

Zindagi sham se pehle he thak jaaye,
Toh Khwaab aankho mai hai woh kidhar jaaye.!!

Roya hai bahut tab jaakar karaar mila hai,
Iss jahan me kise bhala uska sacha pyar mila hai,
Guzar rahi hai zindagi imethaan ke daur se,
Ek khatam to dusra taiyaar mila hai…

Zindagi haseen hai zindagi se pyar karo,
Ho raat to subah ka intzar karo,
Wo pal bhi aayega jis pal ka intzar hai apko,
Bas rab pe bharosa aur waqt pe aitbar karo.

Kyu Mere Liye Koi Intzar Karega,
Apni Zindgi Mere Liye Bekrar Karega.
Me Kya Hu Meri Hasti Hi Kya Hai,
Kya Dekhkar Humse Koi Pyar Karega !!

Aye Zindagi Ek Baar Tu Nazdeek Aa Tanha Hoon Main,
Yaa Door Say Phir Day Koi Sada Tanha Hoon Main,
Duniya Ki Mehfil Main Kaheen Main Hoon Bhi Shayad Ya Nahee,
Ek Umar Say Iss Soch Main Dooba Hua Tanha Hoon Main!!

Zindagi Ke Mod Par Ek Eysa Waqt Aata Hai,
Jab Insaan Apane Aapko Tanha Pata Hai,
Wahi Tanhai to Batati Hai,
Ki Kon Kiska Kitna Sath Nibhata Hai !!

Mana Zindagi Ek Kawab Hai,
Par Har Kawab Ko Manzil Nahi Milti,
Mushkilon mein bhag jana asaan hota hai,
Har pehlu zindagi ka imtihan hota hai,
Darne walon ko kuchh milta nahi zindagi mein,
Aur ladne walon ke kadmon mein jahan hota hai.

Zindagi Pal – Pal Dhalti Hai, Jaise Ret Mutthi Se Phisalti Hai!!
Shikwe Kitne Bhi Ho Har Pal, Phir Bhi Haste Rahna..!!
Kyun Ki Ye Zindagi Jaise Bhi Hai, Bas Ek He Bar Milti Hai…!!

zindgi ki haqeeqat sirf itni hoti h,
jab jagta h insan to kismat soti h,
insan jis per apna haq khud se jyada samjhta h,
wo amant aksar kisi aur ki hoti h.!

Zindagi ka har zakham uski meharbani hai.
Meri zindagi to ek adhuri kahani hai.
Chahte to mita dete har dard ko.
Magar ye dard hi to uski Aakhri nishani hai…!!!

Zindagi Kanto Ka Safar Hai…
Hausla Is Ki Pahchan Hai
Raste Par To Sabhi Chalte Hain…
Jo Raste Banaye Wai To Insaan Hai…!!

Ab Toh Kuchh Apni Tabiyat Bhi Juda Lagti Hai,
Saans Leta Hun Toh Zakhmo Ko Hawa Lagti Hai,
Kabhi Razi Toh Kabhi Mujse Khafa Lagti Hai,
Zindgi Tu Hi Bata Tu Meri Kya Lagti Hai.

Mujh Se Naaraj Hai to Chhod De Tanha Mujhko,
Aye Zindagi, Mujhe Roz Roz Tamasha Na Banaya Kar.

Parhne Walon Ki Kami Ho Gayi Hai Aaj Is Zamaane Mein…
Varna Meri Zindagi Ka Har Panna, Puri Kitaab Hai!

Wohi Ranjishen Wohi Hasratein,
Na Hi Dard-E-Dil Me Kami Huyi,
Hai Azeeb Si Meri Zindagi,
Na Gujar Saki Na Khatm Huyi.

Na jane kiyo ate hai mere zindagi me wo log
wafaye ker nai sakty, wade hazar kerte hai.!!

Tum sath ho to Muqaddar pe Hukumat Apni
Bin Tere zindagi ki Auqaat hi kya hai..

Bahut kuch sikha jati h zindagi,
Hasa ke rula jati hain zindagi,
Jee sako jitna utna jee lo dosto,
Kyuki bahut kuch baki rah jata h Aur khatm ho jati hain zindagi.

Bade Ajeeb hai Yeh Zindgi ke Raste..
Anjane Mod par Kuch Log Dost Ban Jate hai
Milne ki Khushi de ya na de.
Bichadne ka Gam Jarur de Jate ha

Samajh Na Aaya Aye Zindagi Tera Ye Falsafa,
Ek Taraf Kahtey Hain Sabr Ka Fal Meetha Hai
Aur Doosri Taraf Kehte Hain Waqt Kisi Ka Intezaar Nahi Karta.