Romantic shayari

हैं परेशानियाँ यूँ तो बहुत सी ज़िंदगी में;
तेरी मोहब्बत सा मगर, कोई तंग नहीं करता!
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तुम्हारी एक मुस्कान से सुधर गई तबियत मेरी;
बताओ ना तुम इश्क करते हो या इलाज करते हो!
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इश्क़ कर लीजिये बेइंतेहा किताबों से;
एक यही हैं जो अपनी बातों से पलटा नहीं करतीं!
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बंध जाये किसी से रूह का बंधन;
तो इजहार ए मोहब्बत को अल्फ़ाज़ों की जरुरत नहीं होती!
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इतना शौंक मत रखो इन इश्क की गलियों में जाने का;
क़सम से रास्ता जाने का है आने का नहीं!
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एक बार उसने कहा था मेरे सिवा किसी से प्यार ना करना;
बस फिर क्या था तब से मोहब्बत की नजर से हमने खुद को भी नहीं देखा!
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सिर्फ बिछड़ जाने से ही तो रिश्ता खतम नहीं होता;
प्यार वो कुआ है जिसका पानी कभी कम नहीं होता!
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कौन कहता है मुर्दे जिया नहीं करते;
मैंने आशिकों की बस्ती में लाशों को चलते देखा है!
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खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं;
दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं;
चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुज़ूर;
इश्क़ की राह में मनमर्जियाँ नहीं चलतीं!
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पलकों से पानी गिरा है तो उसे गिरने दो;
सीने में कोई पुरानी तमन्ना पिघल रही होगी!
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तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में एक बार;
दर्द हो तो समझ लेना मोहब्बत अभी बाकी है!
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कितनी मोहब्बत है तुमसे, कोई सफाई ना देंगे;
साये की तरह रहेंगे तेरे साथ, पर दिखाई ना देंगें।!
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लफ़्ज़ों के इत्तेफाक़ में, यूँ बदलाव करके देख;
तू देख कर न मुस्कुरा, बस मुस्कुरा के देख!
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आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की;
लम्हें तो अपने आप मिल जाते हैं!
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कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है;
कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है;
पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से;
तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है!
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ख़ुदा तो उसकी आँखों में था;
हम खामखाँ आयतें पढ़ते रहे!
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तेरा इश्क़ ही है मेरी बंदगी, मुझे और कुछ तो खबर नहीं;
तुझे देख कर देखूँ और कहीं, अब मेरे पास वो नज़र नहीं!
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गीली लकड़ी सा इश्क तुमने सुलगाया है;
न पूरा जल पाया कभी न ही बुझ पाया है!
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उसके लिये तो मैंने यहा तक दुआएं की है;
कि कोई उसे चाहे भी तो बस मेरी तरह चाहे!
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एहसासों की अगर जुबाँ होती;
दुनियां फिर खूबसूरत कहाँ होती;
लफ़्ज़ बन जातें हैं पर्दे जज़्बात के;
अजी फिर कैसे ये मोहोब्बत बयाँ होती!
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लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत पर, फिर डर लगता है;
कहीं हर कोई तुझे पाने का तलबगार ना हो जाये!
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उम्र निसार दूं तेरी उस एक नज़र पे;
जो तू मुझे देखे और मैं तेरा हो जाउं!
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सिर्फ एक बार आओ दिल में, देखने मुहब्बत अपनी;
फिर लौटने का इरादा हम तुम पर छोड़ देंगे!
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राख से भी आएगी खुशबू मोहब्बत की;
मेरे खत तुम सरेआम जलाया ना करो!
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वो सज़दा ही क्या, जिसमे सर उठाने का होश रहे;
इज़हार-ए-इश्क़ का मजा तब, जब मैं बेचैन रहूँ और वो ख़ामोश रहे!
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चलेगा मुक़दमा आसमान में सब आशिकों पर एक दिन;
जिसे देखो अपने महबूब को चाँद जो बताता है!
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तुम्हारी दुनिया से जाने के बाद;
हम तुम्हें हर एक तारे में नज़र आया करेंगे;
तुम हर पल कोई दुआ माँग लेना;
और हम हर पल टूट जाया करेंगे!
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तेरा अक्स गढ़ गया है, आँखों में कुछ ऐसा;
सामने खुदा भी हो तो, दिखता है हू-ब-हू तुझ जैसा!
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अदा है, ख्वाब है, तकसीम है, तमाशा है;
एक शख्स मेरी इन आँखो में बेतहाशा है!
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मेरे आँसुओं से भी आती है खुशबू, जब से इन आँखों में तुझे बसाया है;
जख्म भी मीठे लगते हैं, जब से तूने ये मेरा दिल चुराया है!
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इश्क की बहुत सारी उधारियां है, तुम पर;
चुकाने की बात करो तो, कुछ किश्तें तय कर लें!
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मोहब्बत तो वो बारिश है, जिसे छूने की चाहत में;
हथेलियां तो गीली हो जाती हैं, पर हाथ खाली ही रह जाते हैं!
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बरसो बाद तेरे करीब से गुज़रे,
जो न संभलते तो गुज़र ही जाते।
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दिल में है जो बात किसी भी तरह कह डालिये,
जिंदगी ही ना बीत जाये कहीं बताने में।
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सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा;
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा;
ना जाने क्या बात थी उनमे और हम में;
सारी महफ़िल भूल गए बस वो चेहरा याद रहा।
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कितना प्यार है तुमसे, वो लफ्ज़ों के सहारे कैसे बताऊँ,
महसूस कर मेरे एहसास को, अब गवाही कहाँ से लाऊँ।
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मुझे हुक्म हुआ है कुछ और माँग उसके सिवा;
मैं महफ़िल से उठ गया, कि मुझे ज़ुस्तुजू नहीं किसी और की।
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रात ख़्वाबों में आए थे तुम, और देखो;
अभी तक महक रहा है, तुम्हारी ख़ुशबू से वो सिरहाना मेरा।
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नफरतों के जहान में हमको प्यार की बस्तियां बसानी हैं;
दूर रहना कोई कमाल नहीं, पास आओ तो कोई बात बने।
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पहली मुलाकात थी, हम दोनों ही थे बेबस;
वो जुल्फें न संभाल पाए और हम खुद को।
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इबादत की खुशबू पहुँचे तुम तक, अपने यकीन का इम्तिहान कर दूँ;
आज मैं अपने अश्क को गंगा, और इश्क को कुरान कर दूँ।
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तुम्हें सोचा तो हर सोच से खुशबू आई,
तुम्हें लिखा तो हर अल्फ़ाज महकता पाया।
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तू मेरी मज़बूरी बन गयी है ऐसे;
कि साँस लेना जरुरी है जैसे।
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कौन कहता है मुलाक़ात हमारी आज की है;
तू मेरी रूह के अंदर तो कई सदियों से है।
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भूख रिश्तों को भी लगती है,
कभी प्यार परोस कर तो देखिये।
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हमने ज़िन्दगी बितायी आँख सिरहाने लेकर;
रात दुल्हन सी आयी ख़्वाब सुहाने लेकर।
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तेरी इबादत का रंग इस कदर गहरा चढ़ा;
नजर जहाँ पड़ी वहीं तेरा दीदार हुआ।
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नहीं बसती किसी और की सूरत अब इन आँखो में,
काश कि हमने तुम्हें इतने गौर से ना देखा होता।
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जीने के लिए जान जरुरी है, हमारे लिए तो आप जरुरी हैं;
मेरे चेहरे पे चाहे गम हो, आपके चेहरे पे मुस्कान जरुरी है।
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ये कहाँ मुमकिन है कि हर लफ़्ज़ बयाँ हो;
कुछ परदे हो दरमियाँ ये भी तो लाज़मी है।
~ Rahi Mastana
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तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की,
ना जाने देखते देखते कब तुम लत बन गए।
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सुनो बहुत इंतजार करता हूँ तुम्हारा;
सिर्फ एक कदम बढा दो बाकी के फासले मैं खुद तय कर लूँगा।
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याद रखते हैं हम आज भी उन्हें पहले की तरह;
कौन कहता है फासले मोहब्बत की याद मिटा देते हैं।
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तुझे छोड़ दूं तुझे भूल जाँऊ, कैसी बातें करते हो;
सूरत तो फिर भी सूरत है, मुझे तो तेरे नाम के लोग भी अच्छे लगते हैं।
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तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की;
ना जाने देखते-देखते कब तुम लत बन गये।
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मैं तुम्हारी कुछ मिसाल तो दे दूँ मगर जानां,
जुल्म ये है कि बे-मिसाल हो तुम।
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प्यार अगर सच्चा हो तो कभी नहीं बदलता,
ना वक्त के साथ ना हालात के साथ।
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तेरी वफ़ा के तकाजे बदल गये वरना,
मुझे तो आज भी तुझसे अजीज कोई नहीं।
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होती अगर मोहब्बत बादल के साये की तरह,
तो मैं तेरे शहर में कभी धूप ना आने देता।
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हर बात का कोई जवाब नही होता,
हर इश्क का नाम खराब नही होता,
यूँ तो झूम लेते हैं नशे में पीने वाले,
मगर हर नशे का नाम शराब नही होता।
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मेरी चाहतें तुमसे अलग कब हैं, दिल की बातें तुम से छुपी कब हैं;
तुम साथ रहो दिल में धड़कन की जगह, फिर ज़िन्दगी को साँसों की ज़रूरत कब है।
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घायल कर के मुझे उसने पूछा, करोगे क्या फिर मोहब्बत मुझसे;
लहू-लहू था दिल मगर होंठों ने कहा बेइंतहा-बेइंतहा।
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रिश्ते किसी से कुछ यूँ निभा लो, कि उसके दिल के सारे गम चुरा लो;
इतना असर छोड दो किसी पे अपना, कि हर कोई कहे हमें भी अपना बना लो।
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कुछ कह भी दो कुछ सुन भी लो;
अधूरे लफ्ज़, अधूरे अफ़साने अक्सर कहानी बन जाया करते हैं।
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आँखों से दूर दिल के करीब था, मैं उस का वो मेरा नसीब था;
न कभी मिला न जुदा हुआ, रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था।
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मैं नासमझ ही सही मगर वो तारा हूँ जो,
तेरी एक ख्वाहिश के लिए सौ बार टूट जाऊं।
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आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की,
लम्हें तो खुद-ब-खुद मिल जाया करते हैं।
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वो मेरी आखिरी सरहद हो जैसे,
सोच जाती ही नहीं उससे आगे।
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तेरे उतारे हुए दिन पहन के, अब भी मैं,
तेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँ।
~ Gulzar
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सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,
नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,
हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर,
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।
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वजह पूछोगे तो उम्र गुजर जायेगी,
कहा ना अच्छे लगते हो तो बस लगते हो।
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तस्वीर में ख्याल होना तो लाज़मी सा है;
मगर एक तस्वीर है, जो ख्यालों में बनी है।
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मैंने रंग दिया हर पन्ना तेरे नाम से,
मेरी किताबों से, मेरी यादों से पूछ इश्क किसे कहते हैं।
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तेरी मोहब्बत की तलब थी इस लिए हाथ फैला दिए,
वरना हमने तो कभी अपनी ज़िंदगी की दुआ भी नही माँगी।
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आँखों में आंसुओं की लकीर बन गयी;
जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गयी;
हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी;
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी।
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इश्क ने कब इजाजत ली है आशिक़ों से,
वो होता है, और होकर ही रहता है।
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तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी,
एक हम हैं कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
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छुपे-छुपे से रहते हैं सरेआम नही हुआ करते,
कुछ रिश्ते बस एहसास होते हैं उनके नाम नहीं हुआ करते।
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'नजर' 'नमाज' 'नजरिया' सब कुछ बदल गया,
एक रोज इश्क़ हुआ और मेरा खुदा बदल गया।
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मैं घर से तेरी तमन्ना पहन के जब निकलूँ,
बरहना शहर में कोई नज़र ना आए मुझे।
~ Qateel Shifai
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मैं फ़रमाईश हूँ उसकी, वो इबादत है मेरी,
इतनी आसानी से कैसे निकाल दूँ उसे अपने दिल से,
मैं ख्वाब हूँ उसका, वो हकीकत है मेरी।
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फिर इश्क़ का जूनून चढ़ रहा है सिर पे,
मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे।
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क्या जरूरत है मुझे इतर की बदन पर लगाने के लिए,
तेरा ख्याल ही बहुत है मुझे महकाने के लिए।
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देखो आपकी आँखों से गुफ्तगू करके साहब,
मेरी आँखों ने भी बोलना सीख लिया।
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देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं,
दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं,
नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर,
फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।
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लोग पूछते हैं कौन सी दुनिया में जीते हो,
हमने भी कह दिया मोहब्बत में दुनिया कहाँ नजर आती है।
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अकेले हम ही शामिल नहीं हैं इस जुर्म में जनाब,
नजरें जब भी मिली थी मुस्कराये तुम भी थे।
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तमन्ना तेरे जिस्म की होती तो छीन लेते दुनिया से,
इश्क तेरी रूह से है इसलिए खुदा से मांगते हैं तुझे।
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शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो,
मैं आँखों से सुन सकता हूँ तुम आँखों से बोलो।
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यह कौन शरमा रहा है, यूँ फ़ुर्सत में याद कर के,
कि हिचकियाँ आना तो चाहती हैं, पर हिच-किचा रही हैं।
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जिसका वजूद नहीं, वह हस्ती किस काम की,
जो मजा न दे, वह मस्ती किस काम की,
जहाँ दिल न लगे, वो बस्ती किस काम की,
हम आपको याद न करें, तो फिर ये मोहब्बत किस काम की।
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नकाब तो उनका सिर से लेकर पाँव तक था,
मगर आँखें बता रही थी कि मोहब्बत की शौकीन वो भी थी।
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फ़क़ीर मिज़ाज़ हूँ मैं, अपना अंदाज़ औरों से जुदा रखता हूँ;
लोग मंदिर मस्जिदों में जाते हैं, मैं अपने दिल में ख़ुदा रखता हूँ।
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कुछ और भी हैं काम हमें ऐ ग़म-ए-जानाँ,
कब तक कोई उलझी हुई ज़ुल्फ़ों को सँवारे।
~ Habib Jalib
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माना कि उनमें अलग कुछ भी नहीं है,
मगर जो बात उसमें है किसी और में नही है।
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हमने जब कहा नशा शराब का लाजवाब है,
तो उसने अपने होठो से सारे वहम तोड़ दिए।
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अदा है, ख्वाब है, तकसीम है, तमाशा है,
मेरी इन आँखों में एक शख्स बेतहाशा है।
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तू नाराज न रहा कर तुझे वास्ता है खुदा का,
एक तेरा ही चेहरा खुश देख कर तो हम अपना गम भुलाते हैं।
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ये आशिकोँ का शहर है जनाब,
यहाँ सवेरा सूरज से नही, किसी के दीदार से होता है।
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अक्सर नींदें चुरा लेता हूँ देखो रिस्क ही रिस्क हूँ मैं,
बिन बताये दिल में उतर जाता हूँ इश्क़ ही इश्क़ हूँ मैं।
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मैं कुछ कहूँ और तेरा ज़िक्र ना आये,
उफ्फ, ये तो तौहीन होगी, तेरी चाहत की।
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ज़िन्दगी के किस मोड़ पर ले आई है यह जवानी भी,
जलना होगा या डूबना होगा "अक्स" इश्क़ आग भी है और पानी भी।
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बेपनाह मोहब्बत का एक ही उसूल है,
मिले या ना मिले तू हर हाल मे कबूल है।
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सब पूछते हैं मुझ से क्यों रातों को मैं जागता हूँ और दिन में खोया हुआ सा रहता हूँ,
चुप रहूँ या कह दूँ अब सब से कि इस बेचैन दिल की वजह तुम हो।
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नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नही देता।
~ Anu Sood
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तेरा अक्स गढ़ गया है आँखों में कुछ ऐसा,
सामने खुदा भी हो तो दिखता है हू-ब-हू तुझ जैसा।
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मुझ से रूठकर वो खुश है तो शिकायत ही कैसी,
अब मैं उनको खुश भी ना देखूं तो हमारी मोहब्बत ही कैसी।
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तुझे कोई और भी चाहे इस बात से दिल थोड़ा जलता है,
पर फखर है मुझे इस बात पर कि हर कोई मेरी पसंद पे ही मरता है।
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हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।
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तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी,
एक हम हैं कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
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ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ,
तेरी गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है,
मैं रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ।
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अदा है, ख्वाब है, तकसीम है, तमाशा है;
मेरी इन आँखों में एक शख्स बेतहाशा है।
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बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये,
कि वो आज नजरों से हमें अपनी पिलायें;
मजा तो तब ही पीने का यारो,
इधर हम पियें और नशा उनको हो जाये।
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मुद्दत के बाद उसने जो आवाज़ दी मुझे,
कदमों की क्या बिसात थी, साँसे ठहर गयीं।
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मैंने अपने आप को हमेशा बादशाह समझा,
एहसास तब हुआ जब तुझे माँगा फकीरों की तरह।
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तेरे जल्वों ने मुझे घेर लिया है ऐ दोस्त,
अब तो तन्हाई के लम्हे भी हसीं लगते हैं।
~ Seemab Akbarabadi
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ये न जाने थे कि उस महफ़िल में दिल रह जाएगा,
हम ये समझे थे चले आएँगे दम भर देख कर।
~ Mamnoon Nizamuddin
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छीनकर हाथों से जाम वो इस अंदाज़ से बोली,
कमी क्या है इन होठों में जो तुम शराब पीते हो।
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ये याद है तुम्हारी या यादों में तुम हो,
ये ख्वाब हैं तुम्हारे या ख्वाबों में तुम हो,
हम नहीं जानते हमें बस इतना बता दो,
हम जान हैं तुम्हारी या हमारी जान तुम हो।
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतश ग़ालिब,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
~ Mirza Ghalib
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मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो,
मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो,
दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात,
मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो।
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अज़ीज़ इतना ही रखो कि जी संभल जाये,
अब इस कदर भी ना चाहो कि दम निकल जाये।
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मुझको चाहते होंगे और भी बहुत लोग,
मगर मुझे मोहब्बत सिर्फ अपनी मोहब्बत से है।
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दूर रह कर भी जो समाया है मेरी रूह में;
पास वालों पर वो शख्स कितना असर रखता होगा।
~ Surjit Patar
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यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इन्तहा,
कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से।
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कर दे इश्क़ में अपने मदहोश तरह कि,
होश भी आने से पहले इज़ाज़त माँगे।
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मोहब्बत का कोई रंग नहीं फिर भी वो रंगीन है,
प्यार का कोई चेहरा नहीं फिर भी वो हसीन है।
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होगी कितनी चाहत उस दिल में,
जो खुद ही मान जाये कुछ पल खफा होने के बाद।
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मत देखो हमें तुम यूँ इस कदर,
इश्क़ तुम कर बैठोगे और इलज़ाम हम पे लग जायेगा।
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देख लेते हो मोहब्बत से यही काफी है,
दिल धड़कता है सहूलत से यही काफी है,
हाल दुनिया के सताए हुए कुछ लोगों का,
पूछ लेते हो शरारत से यही काफी है।
~ Badar Munir
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तुम को चाहने की वजह कुछ भी नहीं,
बस इश्क़ की फितरत है बेवजह होना।
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तुम्हारी आँखों में बसा है आशियाना मेरा,
अगर ज़िन्दा रखना चाहो तो कभी आँसू मत लाना।
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गुफ्तगू उनसे होती यह किस्मत कहाँ,
ये भी उनका करम है कि वो नज़र तो आये।
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सजा है मौसम तुम्हारी महक से आज फिर;
लगता है हवायें तुम्हें छू कर आयी हैं।
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चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं;
मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते हैं;
बच के रहना इन हुस्न वालों से यारो;
इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं।
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कौन सी बात है जो उस में नहीं,
उस को देखे मेरी नज़र से कोई।
~ Shahryar
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अगर तुम्हें यकीन नहीं तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास,
अगर तुम्हें यकीन हैं तो मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।
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हम उनके दिल पर राज़ करते थे,
मेरा दिल जिनका गुलाम आज भी है।
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याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ,
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है।
~ Jamaal Ehsani
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जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा कैसे कहें;
और जिसे जान लिया हो वो ख़ुदा कैसे हो।
~ Shehzad Ahmed
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रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को,
मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी।
~ Jaleel Manikpuri
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बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह,
जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है।
~ Mirza Ghalib
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कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे,
जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।
~ Jigar Moradabadi
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया,
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया।
~ Meer Taqi Meer
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ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,
इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।
~ Daagh Dehlvi
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चंद साँसे बची हैं आखिरी बार दीदार दे दो,
झूठा ही सही एक बार मगर तुम प्यार दे दो,
जिंदगी वीरान थी और मौत भी गुमनाम ना हो,
मुझे गले लगा लो फिर मौत मुझे हजार दे दो।
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सौ बार कहा दिल से चल भूल भी जा उसको,
सौ बार कहा दिल ने तुम दिल से नहीं कहते।
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इंतज़ार मेरी उम्र से लंबा हो शायद,
तेरा आना इस मर्ज़ की दवा हो शायद।
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इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी;
ढूंढ रहे थे हम जिन्हें आखिर उन से बात हो गयी;
देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम;
बस यूँ समझो दोस्तो वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।
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तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे;
तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंगे;
तुम ना मिले तो जीते जी ही मर जायेंगे;
तुम्हें जो पा लिया तो मर कर भी जी जायेंगे।
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फ़िज़ा की महकती शाम हो तुम,
प्यार में छलकता जाम हो तुम,
सीने में छुपाये फिरता हूँ यादें तुम्हारी,
इसलिए मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!
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जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।
~ Akhtar Ansari
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उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,
मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।
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कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।
~ Hasrat Jaipuri
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धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल,
अभी तो पलकें झुकाई हैं मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।
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मोहब्बत मुझे थे उसी से सनम,
यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा,
मौत भी मेरी चाहत को न रोक सकी,
क़ब्र में भी यह दिल उसके लिए धड़कता रहा।
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अब तक ख़बर न थी कि मोहब्बत गुनाह है;
अब जान कर गुनाह किए जा रहा हूँ मैं।
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लिखा था राशि में आज खज़ाना मिल सकता है,
कि अचानक गली में सनम पुराना दिख गया।
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कोई समझे तो एक बात कहूँ,
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं।
~ Firaq Gorakhpuri
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तोहमतेँ तो लगती रही रोज़ नयी नयी हम पर,
मगर जो सबसे हसीन इलज़ाम था वो तेरा नाम था।
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आदत सी हो गयी है तेरे करीब रहने की,
बस इतना बता तेरी साँसों की खुशबू वाला इत्र मिलेगा कहाँ!
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तुम हमें कभी दिल कभी आँखों से पुकारो,
ये होंठो के तकल्लुफ तो ज़माने के लिए हैं।
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सूरज ढलते ही रख दिये उसने मेरे होठों पर होंठ,
इश्क का रोज़ा था और गज़ब की इफ्तारी।
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है,
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता।
~ Ahmad Faraz
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नहीं है अब कोई तमन्ना इस दिल में,
मेरी पहली और आखिरी जुस्तजू बस तुम हो।
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नहीं भाता अब तेरे सिवा किसी और का चेहरा,
तुझे देखना और देखते रहना दस्तूर बन गया है।
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उसे कह दो अपनी ख़ास हिफाज़त किया करे,
बेशक साँसें उसकी हैं मगर जान तो वो हमारी है।
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दिल से हर मामला कर के चले थे साफ़ हम,
कहने में उनके सामने बात बदल गयी।
~ Faiz Ahmad Faiz
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दिल अपने को एक मंदिर बना रखा है,
उस के अंदर बस तुझ को बसा रखा है,
रखता हूँ तेरी चाहत की तमन्ना रात दिन,
तेरे आने की उम्मीद का दिया जला रखा है।
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अब आ गए हैं आप तो आता नहीं है याद;
वर्ना कुछ हम को आप से कहना ज़रूर था।
~ Firaq Gorakhpuri
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किसी की क्या मज़ाल थी जो कोई हमें खरीद सकता;
हम तो खुद ही बिक गए खरीददार देख कर।
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अभी कम-सिन हो रहने दो कहीं खो दोगे दिल मेरा;
तुम्हारे ही लिए रखा है ले लेना जवाँ हो कर।
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ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना;
बन गया रक़ीब आख़िर था जो राज़-दाँ अपना।
~ Mirza Ghalib
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दिल में आप हो और कोई खास कैसे होगा;
यादों में आपके सिवा कोई पास कैसे होगा;
हिचकियॉं कहती हैं आप याद करते हो;
पर बोलोगे नहीं तो मुझे एहसास कैसे होगा।
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क्या अच्छा क्या बुरा क्या भला देखा;
जब भी देखा तुझे अपने रु ब रु देखा;
सोचा बहुत भूल कर ना सोचूंगा तुझे;
जिस रात आँख लगी फिर तुझे हर ख्वाब में देखा।
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आहिस्ता आहिस्ता आपका यकीन करने लगे हैं;
आहिस्ता आहिस्ता आपके करीब आने लगे हैं;
दिल तो देने से घबराते हैं मगर;
आहिस्ता आहिस्ता आपके दिल की कदर करने लगे हैं।
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कल तेरा जिक्र हुआ महफ़िल में,
और महफ़िल देर तक महकती रही।
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ऐ काश कुदरत का कहीं ये नियम हुआ करे,
तुझे देखने के सिवा ना मुझे कोई काम हुआ करे।
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मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना;
जरा से भी चूक हुई तो मोहब्बत हो जायेगी।
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उनके लबो पर देखो फिर आज मेरा नाम आया है;
लेकर नाम मेरा देखो महबूब आज कितना शरमाया है;
पूछे मेरी ये आँखे उनसे कि कितनी मोहब्बत है मुझसे;
बोले वो पलके झुका कि मेरी हर साँस में बस तू ही समाया है।
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मैं जो चाहूँ तो अभी तोड़ लूँ नाता तुम से;
पर मैं बुझ-दिल हूँ मुझे मौत से डर लगता है।
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हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका;
मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया।
~ Jigar Moradabadi
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हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी;
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।
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मुझे याद करने से ये मुद्दा था;
निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते।
~ Daagh Dehlvi
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जब पास हों तो रुख से निगाहें ना मोड़ना;
जब दूर हों तो मेरा तस्सावुर न छोड़ना;
सोच लेना दिल लगाने से पहले एक बार;
मुश्किल बहुत है निभाने रिश्ते,
भूल कर भी कभी इनकी ज़ंजीरें ना तोडना।
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आँखों में देख कर वो दिल की हकीकत जानने लगे;
उनसे कोई रिश्ता भी नहीं फिर भी अपना मानने लगे;
बन कर हमदर्द कुछ ऐसे उन्होंने हाथ थामा मेरा;
कि हम खुदा से दर्द की दुआ मांगने लगे।
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वादा करके और भी आफ़त में डाला आपने;
ज़िन्दगी मुश्किल थी, अब मरना भी मुश्किल हो गया।
~ Jaleel Manikpuri
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इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं;
चंद लम्हों में फ़ैसला न करो।
~ Sudarshan Faakir
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देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं;
दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं;
नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर;
फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।
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ना छोड़ना मेरा साथ ज़िन्दगी में कभी;
शायद मैं ज़िंदा हूँ तेरे साथ की वजह से।
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उसे मैं ढाँप लेना चाहता हूँ अपनी पलकों में;
इलाही उस के आने तक मेरी आँखों में दम रखना।
~ Qateel Shifai
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आँखों की गहराई को समझ नहीं सकते;
होंठों से हम कुछ कह नहीं सकते;
कैसे बयाँ करें हम यह हाल-ए-दिल आपको;
कि तुम्हीं हो जिसके बगैर हम रह नहीं सकते।
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बहुत वक़्त लगा हमें आप तक आने में;
बहुत फरियाद की खुदा से आपको पाने में;
कभी यह दिल तोड़ कर मत जाना;
हमने उम्र लगा दी आप जैसा सनम पाने में।
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कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम-कश को;
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।
~ Mirza Ghalib
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तेरी चुप्पी अगर तेरी कोई मज़बूरी है;
तो रहने दे इश्क़ कौन सा ज़रूरी है।
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क़दमों की दूरी से दिलों के फांसले नहीं बढ़ते;
दूर होने से एहसास नहीं मरते;
कुछ क़दमों का फांसला ही सही हमारे बीच;
लेकिन ऐसा कोई पल नहीं जब हमको याद नहीं करते।
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उनके ख्याल से ही जब इतनी सुहानी लगती है ये दुनिया;
सोचो अगर वो साथ होंगे तब क्या बात होगी।
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होती अगर मोहब्बत बादल के साये की तरह;
तो मै तेरे शहर मे कभी धूप ना आने देता।
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हर बार संभाल लूंगा गिरो तुम चाहो जितनी बार;
बस एक ही इल्तिज़ा है कि मेरी नज़रों से ना गिरना तुम कभी।
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यूँ तो तमन्ना दिल में ना थी लेकिन;
ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक बन बैठे।
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ये तो कहिए इस ख़ता की क्या सज़ा;
मैं जो कह दूँ आप पर मरता हूँ मैं।
~ Daagh Dehlvi
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कहा ये किसने कि फूलों से दिल लगाऊं मैं;
अगर तेरा ख्याल ना सोचूं तो मर जाऊं मैं;
माँग ना मुझसे तू हिसाब मेरी मोहब्बत का;
आ जाऊं इम्तिहान पर तो हद्द से गुज़र जाऊं मैं।
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वो कहते हैं मुझसे कोई और बात करो;
लाऊँ कहाँ से बात अब उनकी बात के सिवा।
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प्यार की तरह आधा अधूरा सा अल्फाज था मैं;
तुमसे क्या जुडा ज़िंदगी की तरह पूरी गजल बन गया।
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मेरी यादों में तुम हो, या मुझ में ही तुम हो;
मेरे खयालों में तुम हो, या मेरा ख़याल ही तुम हो।
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सुना है प्यार में मुश्किल नहीं कुछ भी;
चलो समंदर में आग लगा कर आज़माते हैं।
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ज़िंदा रहे तो हर दिन तुम्हें याद करते रहेंगे;
भूल गए तो समझ लेना खुदा ने हमें याद कर लिया।
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वो मुलाक़ात कुछ अधूरी सी लगी;
पास होकर भी कुछ दूरी सी लगी;
होंठों पे हँसी आँखों में नमी;
पहली बार किसी की चाहत ज़रूरी सी लगी।
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आँखों में बस बसी है सूरत आपकी;
दिल में छुपी है मूरत आपकी;
महसूस होता है जीने के लिए;
हमें तो बस है ज़रूरत आपकी।
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ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता;
आँख उन से जो मिलती है तो क्या क्या नहीं होता।
~ Akbar Allahabadi
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दो कदम चलने के लिए साथ माँगा है;
बस पल दो पल के लिए प्यार माँगा है;
हम समझते हैं उसकी मज़बूरियों को;
इसलिए उसे उसकी मज़बूरियों के साथ माँगा है।
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मैं तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती;
मैं जवाब बनता अगर तू सवाल होती;
सब जानते है मैं शरब नहीं पीता;
मगर मैं भी पी लेता अगर तू शराब होती।
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दो बातें उनसे की तो दिल का दर्द खो गया;
लोगों ने हमसे पूछा कि तुम्हें क्या हो गया;
बेकरार आँखों से सिर्फ हँस के रह गए;
ये भी ना कह सके कि हमें प्यार हो गया।
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मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन;
आवाजों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन;
सदियों सदियों वही तमाशा रस्ता रस्ता लम्बी खोज;
लेकिन जब हम मिल जाते हैं खो जाता है जाने कौन।
~ Noshi Gilani
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मैं यूँ भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ;
कोई मासूम क्यों मेरे लिए बदनाम हो जाए।
~ Bashir Badr
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चलो उसका नही तो खुदा का एहसान लेते हैं;
वो मिन्नत से ना माना तो मन्नत से मांग लेते हैं।
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भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील';
आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए।
~ Shakeel Badayuni
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तेरा अंदाज़-ए-सँवरना भी क्या कमाल है;
तुझे देखूं तो दिल धड़के, ना देखूं तो बेचैन रहूँ।
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क्या मज़ा देती है बिजली की चमक मुझ को रियाज़;
मुझ से लिपटे हैं मिरे नाम से डरने वाले।
~ Riyaz Khairabadi
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वो खुद पर गरूर करते है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं;
जिन्हें हम चाहते है, वो आम हो ही नहीं सकते।
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अपनी ज़िन्दगी में मुझ को करीब समझना;
कोई ग़म आये तो उस ग़म में भी शरीक समझना;
दे देंगे मुस्कुराहट आँसुओं के बदले;
मगर हज़ारों में मुझे थोड़ा अज़ीज़ समझना।
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वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिये;
रात दिन सूरत को देखा कीजिये;
चाँदनी रातों में एक एक फूल को;
बेखुदी कहती है सज़दा कीजिये।
~ Akhtar Sheerani
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कुछ मतलब के लिए ढूँढते हैं मुझको;
बिन मतलब जो आए तो क्या बात है;
कत्ल कर के तो सब ले जाएँगे दिल मेरा;
कोई बातों से ले जाए तो क्या बात है।
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अपनी ज़िन्दगी का अलग उसूल है;
प्यार की खातिर तो काँटे भी कबूल हैं;
हँस के चल दूँ काँच के टुकड़ों पर;
अगर तू कह दे ये मेरे बिछाये हुए फूल हैं।
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ज़रा साहिल पे आकर वो थोड़ा मुस्कुरा देती;
भंवर घबरा के खुद मुझ को किनारे पर लगा देता;
वो ना आती मगर इतना तो कह देती मैं आँऊगी;
सितारे, चाँद सारा आसमान राह में बिछा देता।
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जब कोई ख्याल दिल से टकराता है;
दिल ना चाह कर भी खामोश रह जाता है;
कोई सब कुछ कह कर प्यार जताता है;
तो कोई कुछ ना कह कर प्यार निभाता है।
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वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है;
बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है;
उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से;
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है।
~ Bashir Badr
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क्या कहें कुछ भी कहा नहीं जाता;
दर्द मिलता है पर सहा नहीं जाता;
हो गयी है मोहब्बत आपसे इस कदर;
कि अब तो बिन देखे आप को जिया नहीं जाता।
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तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ;
ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ;
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी;
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ।
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हम उस से थोड़ी दूरी पर हमेशा रुक से जाते हैं;
न जाने उस से मिलने का इरादा कैसा लगता है;
मैं धीरे धीरे उन का दुश्मन-ए-जाँ बनता जाता हूँ;
वो आँखें कितनी क़ातिल हैं वो चेहरा कैसा लगता है।
~ Syed Abdul Hameed Adam
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आँखों से आँखें मिलाकर तो देखो;
हमारे दिल से दिल मिलाकर तो देखो;
सारे जहान की खुशियाँ तेरे दामन में रख देंगे;
हमारे प्यार पर ज़रा ऐतबार करके तो देखो।
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ना जाने कब वो हसीन रात होगी;
जब उनकी निगाहें हमारी निगाहों के साथ होंगी;
बैठे हैं हम उस रात के इंतज़ार में;
जब उनके होंठों की सुर्खियां हमारे होंठों के साथ होंगी।
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मोहब्बत एक दम दुख का मुदावा कर नहीं देती;
ये तितली बैठती है ज़ख़्म पर आहिस्ता आहिस्ता।
~ Abbas Tabish
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मेरी चाहत को अपनी मोहब्बत बना के देख;
मेरी हँसी को अपने होंठो पे सज़ा के देख;
ये मोहब्बत तो हसीन तोहफा है एक;
कभी मोहब्बत को मोहब्बत की तरह निभा कर तो देख।
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इश्क़ में कोई खोज नहीं होती;
यह हर किसी से हर रोज नहीं होती;
अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवजह मत समझना;
क्योंकि पलकें कभी आँखों पर बोझ नहीं होती।
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रोज कहता हूँ न जाऊँगा कभी घर उसके;
रोज उस के कूचे में कोई काम निकल आता है।
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साथ अगर दोगे तो मुस्कुराएंगे ज़रूर;
प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे ज़रूर;
कितने भी काँटे क्यों ना हों राहों में;
आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएंगे ज़रूर।
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क्यों तू अच्छा लगता है, वक़्त मिला तो सोचेंगे;
तुझ में क्या क्या देखा है, वक़्त मिला तो सोचेंगे;
सारा शहर शहंशाही का दावेदार तो है लेकिन;
क्यों तू हमारा अपना है, वक़्त मिला तो सोचेंगे।
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रात से शिकायत क्या बस तुम्हीं से कहना है;
बस तुम ज़रा ठहर जाओ रात कब ठहरती है।
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प्यार वो है जिसमे सच्चाई हो;
साथी की हर बात का एहसास हो;
उसकी हर अदा पर नाज़ हो;
दूर रह कर भी पास होने का एहसास हो।
----------
आये जो वो सामने तो अज़ब तमाशा हुआ;
हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली।
----------
मेरे दिल ने जब भी कभी कोई दुआ माँगी है;
हर दुआ में बस तेरी ही वफ़ा माँगी है;
जिस प्यार को देख कर जलते हैं यह दुनिया वाले;
तेरी मोहब्बत करने की बस वो एक अदा माँगी है।
----------
इश्क़ करने में नही पूछी जाती जात मोहबत की;
चलो कुछ तो है दुनिया में जो मज़हबी नहीं हुआ।
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ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा;
तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है;
भूल जाता हूँ सारे ग़म और सितम उसके;
जब ही उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।
----------
तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहाँ पहुँचेगा;
शमा होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा।
~ Bahadur Shah Zafar
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कभी दोस्ती कहेंगे कभी बेरुख़ी कहेंगे;
जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी कहेंगे;
तेरा देखना है जादू तेरी गुफ़्तगू है खुशबू;
जो तेरी तरह चमके उसे रोशनी कहेंगे।
----------
ये दिल भुलाता नहीं है मोहब्बतें उसकी;
पड़ी हुई थी मुझे कितनी आदतें उसकी;
ये मेरा सारा सफर उसकी खुशबू में कटा;
मुझे तो राह दिखाती थी चाहतें उसकी।
~ Noshi Gilani
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दिल की हसरत मेरी ज़ुबान पे आने लगी;
तुमने देखा और ये ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी;
ये इश्क़ के इन्तहा थी या दीवानगी मेरी;
हर सूरत में मुझे सूरत तेरी नज़र आने लगी।
----------
ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा;
क्योंकि हशर की परवाह मैं नहीं करता;
फनाह होना तो रिवायत है तेरी;
इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।
----------
रात होगी तो चाँद दुहाई देगा;
ख्वाबों में आपको वह चेहरा दिखाई देगा;
ये मोहब्बत है ज़रा सोच कर करना;
एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा।
----------
इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी;
ढूंढ रहे थे हम जिन्हें आखिर उन से बात हो गयी;
देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम;
बस यूँ समझो दोस्तो वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।
----------
तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे;
तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंगे;
तुम ना मिले तो जीते जी ही मर जायेंगे;
तुम्हें जो पा लिया तो मर कर भी जी जायेंगे।
----------
जाने कहाँ थे और और चले थे कहाँ से हम;
बेदार हो गए किसी ख्वाब-ए-गिराँ से हम;
ऐ नौ-बहार-ए-नाज़ तेरी निकहतों की खैर;
दामन झटक के निकले तेरे गुलसिताँ से हम।
~ Ahmad Nadeem Qasimi
----------
तुम को तो जान से प्यारा बना लिया;
दिल को सुकून आँख का तारा का बना लिया;
अब तुम साथ दो या ना दो तुम्हारी मर्ज़ी;
हम ने तो तुम्हें ज़िन्दगी का सहारा बना लिया।
----------
लफ़्ज़ों में कैसे तारीफ करूँ,
लफ़्ज़ों में आप कैसे समा पाओगे;
जब भी पूछेंगे कभी लोग आपके बारे में,
हमारी आँखों में देख कर वो सब जान जायेंगे।
----------
नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं;
क़रीब उन के आने के दिन आ रहे हैं;
जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है;
सब उनको सुनाने के दिन आ रहे हैं।
~ Faiz Ahmad Faiz
----------
हर ख़ुशी से खूबसूरत तेरी शाम करूँ;
अपना प्यार सिर्फ मैं तेरे नाम करूँ;
मिल जाए अगर दोबारा ये ज़िंदगी;
हर बार ये ज़िंदगी मैं तेरे नाम करूँ।
----------
है इश्क़ भी जूनून भी, मस्ती भी जोश-ए-खून भी;
कहीं दिल में दर्द, कहीं आह सर्द, कहीं रंग ज़र्द;
है यूँ भी और यूँ भी।
~ Hafeez Jalandhari
----------
अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे;
तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब कर मर जाने दे;
ज़ख्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;
सोचता हूँ कहूँ, फिर सोचता हूँ कि छोड़ जाने दे।
----------
पल पल के रिश्ते का वादा है आपसे;
अपनापन कुछ इतना ज्यादा है आपसे;
ना सोचना कि भूल गए हम आपको;
ज़िन्दगी भर चाहेंगे ये वादा है आपसे।
----------
तेरे ही क़दमों में मरना भी और जीना भी;
कि तेरा प्यार है दरिया भी और सफ़ीना भी;
मेरी नज़र में तो अब सब बराबर हैं;
मेरे लिए तो तू ही है काशी तू ही मदीना भी।
----------
ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ;
मुझे तुम से मोहब्बत है मगर जताना भूल जाता हूँ;
तेरी गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है;
मैं रास्ता याद रखता हूँ मगर ठिकाना भूल जाता हूँ।
----------
हम रूठे तो किसके भरोसे;
कौन है जो आयेगा हमे मनाने के लिए;
हो सकता है तरस आ भी जाये आपको;
पर दिल कहाँ से लायें आपसे रूठ जाने के लिये।
----------
होश आये तो क्योंकर तेरे दीवाने को;
एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को।
----------
कभी मोहब्बत करो तो हमसे करना;
दिल की बात जुबान पर आये तो हम से कहना;
न कह सको कुछ तो आँखें झुका लेना;
हम समझ जायेंगे हमें तुम न कुछ कहना।
----------
गलत सुना था कि मोहब्बत आँखों से होती है;
दिल तो वो भी चुरा लेते हैं जो पलकें नहीं उठाते।
----------
दिल एक हो तो कई बार क्यों लगाया जाये;
बस एक इश्क़ ही काफी है अगर निभाया जाये।
----------
हम वो फूल हैं जो रोज़ रोज़ नहीं खिलते;
यह वो होंठ हैं जो कभी नहीं सिलते;
हम से बिछड़ोगे तो एहसास होगा तुम्हें;
हम वो दोस्त हैं जो रोज़ रोज़ नहीं मिलते।
----------
हक़ीक़त खुल गई हसरत तेरे तर्क-ए-मोहब्बत की;
तुझे तो अब वो पहले से भी बढ़ कर याद आते हैं।
~ Hasrat Mohani
----------
खुशबू की तरह मेरी हर साँस में;
प्यार अपना बसाने का वादा करो;
रंग जितने तुम्हारी मोहब्बत के हैं;
मेरे दिल में सजाने का वादा करो।
----------
तन्हाइयों में मुस्कुराना इश्क़ है;
एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है;
यूँ तो नींद नहीं आती हमें रात भर;
मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागते सोना ही इश्क़ है।
----------
कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझे;
अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझे;
तुम को आँखों में तसावुर की तरह रखता हूँ;
दिल में धड़कन की तरह तुम भी बसाना मुझे।
----------
ताल्लुक हो तो रूह से रूह का हो;
दिल तो अकसर एक दूसरे से भर जाया करते हैं।
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उस एक चेहरे में आबाद थे कई चेहरे;
उस एक शख़्स में किस किस को देखता था मैं।
~ Saleem Ahmed
----------
हमें तो खैर कोई दूसरा अच्छा नहीं लगता;
उन्हें खुद भी कोई अपने सिवा अच्छा नहीं लगता;
~ Mohsin Zaidi
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उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं;
तेरे दिल में हूँ पर तेरे पास नहीं;
झूठ कहूँ तो सब कुछ है मेरे पास;
और सच कहूँ तो तेरे सिवा कुछ नहीं।
----------
धोखा ना देना कि तुझपे ऐतबार बहुत है;
ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है;
तेरी सूरत ना दिखे तो दिखाई कुछ नही देता;
हम क्या करें कि तुझसे हमें प्यार बहुत है।
----------
उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है;
उनके इंतज़ार में दिल तरसता है;
क्या कहें इस कमबख्त दिल को अब;
अपना होकर भी जो किसी और के लिए धड़कता है।
----------
दिल की किताब में गुलाब उनका था;
रात की नींद में एक ख्वाब उनका था;
है कितना प्यार हमसे जब यह हमने पूछ लिया;
मर जायेंगे बिन तेरे यह जवाब उनका था।
----------
आँखों के सामने हर पल आपको पाया है;
अपने दिल में सिर्फ आपको ही बसाया है;
आपके बिना हम जियें भी तो कैसे;
भला जान के बिना भी कोई जी पाया है।
----------
मोहब्बत के लबोँ पर फिर वही तकरार बैठी है;
एक प्‍यारी सी मीठी सी कोई झनकार बैठी है;
तुझसे दूर रहकर के हमारा हाल है ऐसा;
मैँ तेरे बिन यहाँ तू मेरे बिन वहाँ बेकार बैठी है।
----------
निकला करो इधर से भी होकर कभी कभी;
आया करो हमारे भी घर पर कभी कभी;
माना कि रूठ जाना यूँ आदत है आप की;
लगते मगर हैं अच्छे आपके ये तेवर कभी कभी।
----------
बगैर जाने-पहचाने इक़रार ना कीजिये;
मुस्कुरा कर यूँ दिलों को बेक़रार ना कीजिये;
फूल भी दे जाते हैं ज़ख़्म गहरे कभी-कभी;
हर फूल पर यूँ ऐतबार ना कीजिये।
----------
आप को भूल जाऊं यह नामुमकिन सी बात है;
आप को न हो यकीन यह और बात है;
जब तक रहेगी साँस तब तक आप रहोगे याद;
टूट जाये यह साँस तो यह और बात है।
----------
कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है;
कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है;
कब तक छुपाऊँ दिल की बात;
उसकी हर अदा पर मुझे प्यार आ जाता है।
----------
कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के;
वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के।
~ Khumar Barabankvi
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मेरे दिल ने जब भी कभी कोई दुआ माँगी है;
तो हर दुआ में बस तेरी वफ़ा माँगी है;
जिस प्यार को देख कर दुनिया वाले जलते हैं;
तेरी मोहब्बत करने की बस वो एक अदा माँगी है।
----------
अजीब नशा है होशियार रहना चाहता हूँ;
मैं उस के ख़्वाब में बेदार रहना चाहता हूँ;
ये मौज-ए-ताज़ा मेरी तिश्नगी का वहम सही;
मैं इस सराब में सरशार रहना चाहता हूँ।
~ Irfan Siddiqi
----------
चंद फाँसले हों दरमियाँ ये भी लाज़मी है;
डरता हूँ अगर नज़दीकियाँ बढ़ गई तो;
कहीं मोहब्बत ना हो जाए शख़्सियत से तेरी!
----------
तेरे मिलने की आस न होती;
तो ज़िंदगी आज यूँ उदास न होती;
मिल जाती कभी तस्वीर जो तेरी;
तो हमको आज तेरी तलाश न होती।
----------
कब उनके लबों से इज़हार होगा;
दिल के किसी कोने में हमारे लिए भी प्यार होगा;
गुज़र रही हैं अब तो यह रातें बस इसी सोच में;
कि शायद उनको भी हमारा इंतज़ार होगा।
----------
वो सामने आये तो अज़ब तमाशा हुआ;
हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली।
----------
याद आयेगी हमारी तो बीते कल की किताब पलट लेना;
यूँ ही किसी पन्ने पर मुस्कुराते हुए हम मिल जायेंगे।
----------
लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया;
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया;
पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा;
दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।
~ Jigar Moradabadi
----------
जज़्बात मचलते हैं जब तुमसे मिलता हूँ;
अरमान मचलते हैं जब तुमसे मिलता हूँ;
साथ हम दोनों का कोई बर्दाश्त नहीं करता;
जलती है देख कर दुनिया जब मैं तुमसे मिलता हूँ।
----------
करते हैं हम तुमसे मोहब्बत;
हमारी खता यह माफ़ करना;
है अगर बदनाम मोहब्बत हमारी;
तुम प्यार को बदनाम मत करना।
----------
इस वहम में वो दाग़ को मरने नहीं देते;
माशूक़ न मिल जाए कहीं ज़ेर-ए-ज़मीं और।
~ Daagh Dehlvi
----------
तू महक बन कर मुझ से गुलाबों में मिला कर;
जिसे छू कर मैं महसूस कर सकूँ;
तू मस्ती की तरह मुझ से शराबों में मिला कर;
मैं भी इंसान हूँ, डर मुझ को भी है बहक जाने का;
इस वास्ते तू मुझ से हिजाबों में मिला कर।
----------
उसे मैं ढाँप लेना चाहता हूँ अपनी पलकों में;
इलाही उस के आने तक मेरी आँखों में दम रखना।
~ Qateel Shifai
----------
आँखों की गहराई को समझ नहीं सकते;
होंठों से हम कुछ कह नहीं सकते;
कैसे बयाँ करें हम यह हाल-ए-दिल आपको;
कि तुम्हीं हो जिसके बगैर हम रह नहीं सकते।
----------
न आज लुत्फ़ कर इतना कि कल गुज़र न सके;
वह रात जो कि तेरे गेसुओं की रात नहीं;
यह आरजू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम;
विसाले यार फकत आरजू की बात नहीं।
~ Faiz Ahmad Faiz
----------
आपसे दूर भला हम कैसे रह पाते;
दिल से आपको कैसे भुला पाते;
काश कि आप इस दिल के अलावा आईने में भी रहते;
देखते जब आइना खुद को देखने को तो वहाँ भी आप ही नज़र आते।
----------
चाहतों ने किया मुझ पे ऐसा असर;
जहाँ देखूं मैं देखूं तुझे हमसफ़र;
मेरी खामोशियाँ भी जुबान बन गयी;
मेरी बेचैनियां इश्क़ की दास्तान बन गयी।
----------
आप को देख कर यह निगाह रुक जाएगी;
ख़ामोशी अब हर बात कह जाएगी;
पढ़ लो अब इन आँखों में अपनी मोहब्बत;
कसम से सारी कायनात इसे सुनने को थम जाएगी।
----------
ना मैं ख्याल में तेरे ना मैं गुमान में हूँ;
यकीन दिल को नहीं है कि इस जहान में हूँ;
खुदाया रखियेगा दुनिया में सरफ़राज़ मुझे;
मैं पहले इश्क़ के, पहले इम्तिहान में हूँ।
----------
रूठी हो अगर ज़िंदगी तो मना लेंगे हम;
मिले जो गम अगर वो भी सह लेंगे हम;
बस आप रहना हमेशा साथ हमारे तो;
निकलते हुए आँसुओं में भी मुस्कुरा लेंगे हम।
----------
यूँ नज़रों से आपने बात की और दिल चुरा ले गए;
हम तो समझे थे अजनबी आपको;
पर दे कर बस एक मुस्कुराहट अपनी;
आप तो हमें अपना बना गए।
----------
उनके आने की बंधी थी आस जब तक हमनशीं;
सुबह हो जाती थी अक्सर जानिब-ए-दर देखते।
~ Asar Lakhnavi
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इश्क़ में हर लम्हा ख़ुशी का एहसास बन जाता है;
दीदार-ए-यार भी खुदा का दीदार बन जाता है;
जब होता है नशा मोहब्बत का;
तो अक्सर आईना भी ख्वाब बन जाता है।
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सिर्फ नज़र से जलाते हो आग चाहत की;
जलाकर क्यों बुझाते हो आग चाहत की;
सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे;
हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की।q
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इत्तेफ़ाक़ से यह हादसा हुआ है;
चाहत से मेरा वास्ता हुआ है;
दूर रह कर बड़ा बेताब था दिल;
पास आ कर भी हाल बुरा हुआ है।
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खुदा भी मांगे ये दिल तो निकाल देंगे;
अगर दिल ने कहा तुम बेवफा हो;
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।
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मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही;
अब रातों को जागना अच्छा लगता है;
मुझे नहीं मालूम वो मेरी किस्मत में है या नहीं;
मगर उसे खुदा से माँगना अच्छा लगता है।
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कब तक वो मेरा होने से इंकार करेगा;
खुद टूट कर वो एक दिन मुझसे प्यार करेगा;
इश्क़ की आग में उसको इतना जला देंगे;
कि इज़हार वो मुझसे सर-ए-बाजार करेगा।
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तुम्हारी नफरत पर भी लुटा दी ज़िंदगी हमने;
सोचो अगर तुम मोहब्बत करते तो हम क्या करते।
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सब भूल जाता हूँ आप के सिवा, यह क्या मुझे हुआ है;
क्या इसी एहसास को दुनिया ने इश्क़ का नाम दिया है।
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कैसे कहूँ कि अपना बना लो मुझे;
बाहों में अपनी समा लो मुझे;
बिन तुम्हारे एक पल भी कटता नहीं;
आ कर एक बार मुझ से चुरा लो मुझे।
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उसके साथ जीने का एक मौका दे दे ऐ खुदा;
तेरे साथ तो हम मरने के बाद भी रह लेंगे।
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सामने मंज़िल थी और पीछे उसका वजूद, क्या करते हम भी यारों;
रुकते तो सफर रह जाता, चलते तो हमसफ़र रह जाता।
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दूरियों की ना परवाह कीजिये;
दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये;
कहीं दूर नहीं हैं हम आपसे;
बस अपनी पलकों को आँखों से मिला लीजिये।
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सीने में दिल तो हर एक के होता है;
लेकिन हर एक दिल में प्यार नहीं होता;
प्यार करने के लिए तो दिल होता है;
दिल में छुपाने के लिए प्यार नहीं होता।
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अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा;
जिस पर तेरा नाम लिखा है उस तारे को ढूँढूँगा;
तुम भी हर शब दिया जला कर पलकों की दहलीज़ पर रखना;
मैं भी रोज़ एक ख़्वाब तुम्हारे शहर की जानिब भेजूँगा।
~ Amjad Islam Amjad
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तुम को हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त;
उल्फ़त वो राज़ है कि छुपाया न जाएगा।
~ Altaf Hussain Hali
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इश्क़ फिर वो रंग लाया है कि जी जाने है;
दिल का ये रंग बनाया है कि जी जाने है;
नाज़ उठाने में जफ़ाएं तो उठाई लेकिन;
लुत्फ़ भी ऐसा उठाया है कि जी जाने है।
~ Nazeer Akbarabadi
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मैं तेरे प्यार में इतना ग़ुम होने लगा हूँ;
जहाँ भी जाऊं बस तुम्हें ही सामने पाने लगा हूँ;
हालात यह हैं कि हर चेहरे में तू ही तू दिखता है;
ऐ मेरे खुदा अब तो मैं खुद को भी भुलाने लगा हूँ।
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दिल के लुट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं;
यह तमाशा सरे बाजार ज़रूरी तो नहीं;
मुझे था इश्क़ तेरी रूह से और अब भी है;
जिस्म से कोई सरोकार ज़रूरी तो नहीं।
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दुःख में ख़ुशी की वजह बनती है मोहब्बत;
दर्द में यादों की वजह बनती है मोहब्बत;
जब कुछ भी अच्छा ना लगे हमें दुनिया में;
तब हमारे जीने की वजह बनती है मोहब्बत।
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फूलों की याद आती है काँटों को छूने पर;
रिश्तों की समझ आती है फासलों पे रहने पर;
कुछ जज़्बात ऐसे भी होते हैं जो आँखों से बयां नहीं होते;
वो तो महसूस होते हैं ज़ुबान से कहने पर।
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तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ;
ज़िंदगी अपनी तेरी चाहत में सवार लूँ;
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी;
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ।
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अब आएं या न आएं इधर पूछते चलो;
क्या चाहती है उनकी नज़र पूछते चलो;
हम से अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ;
यारो कोई तो उनकी ख़बर पूछते चलो।

शब्दार्थ:
तर्क-ए-ताल्लुक = टूटा हुआ रिश्ता
~ Sahir Ludhianvi
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फ़िज़ा में महकती शाम हो तुम;
प्यार में झलकता जाम हो तुम;
सीने में छुपाये फिरते हैं चाहत तुम्हारी;
तभी तो मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
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अगर मैं हद से गुज़र जाऊं तो मुझे माफ़ करना;
तेरे दिल में उतर जाऊं तो मुझे माफ़ करना;
रात में तुझे तेरे दीदार की खातिर;
अगर मैं सब कुछ भूल जाऊं तो मुझे माफ़ करना।
----------
कुछ पल के लिए हमें अपनी बाहों में सुला दो;
अगर आँखें खुली तो उठा देना ना खुली तो दफना देना।
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किसी की खातिर मोहब्बत की इन्तहा कर दो;
लेकिन इतना भी नहीं कि उसको खुदा कर दो;
मत चाहो किसी को टूट कर इस कदर;
कि अपनी ही वफाओं से उसको बेवफा कर दो।
----------
माना कि किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही;
पर ये सच है कि मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही;
उसके दिल में, उसकी यादो में कोई और है लेकिन;
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही।
----------
ऐसा जगाया आपने कि अब तक ना सो सके;
यूँ रुलाया आपने कि महफ़िल में हम ना रो सके;
ना जाने क्या बात है आप में सनम;
माना है जबसे तुम्हें अपना किसी के ना हम हो सके।
----------
लाख बंदिशें लगा दे यह दुनिया हम पर;
मगर दिल पर काबू हम कर नहीं पायेंगे;
वो लम्हा आखिरी होगा हमारी ज़िन्दगी का;
जिस पल हम तुझे इस दिल से भूल जायेंगे।
----------
किसी पत्थर में मूर्त है, कोई पत्थर की मूर्त है;
लो हम ने देख ली दुनिया, जो इतनी खूबसूरत है;
ज़माना अपनी न समझे कभी पर मुझे खबर है;
कि तुझे मेरी ज़रूरत है और मुझे तेरी ज़रूरत है।
----------
तेरा एहसान हम कभी चुका नहीं सकते;
तू अगर माँगे जान तो इंकार कर नहीं सकते;
माना कि ज़िंदगी लेती है इम्तिहान बहुत;
तू अगर हो हमारे साथ तो हम कभी हार नहीं सकते।
----------
ये इश्क भी नशा-ए-शराब जैसा है, यारो;
करें तो मर जाएँ और छोड़े तो किधर जाएँ।
----------
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है;
सब्र रुख़्सत हो रहा है इज़्तिराब आने को है।

अनुवाद:
इब्तिदा-ए-इश्क़ = इश्क़ की शुरुआत
लुत्फ़-ए-शबाब = जवानी का मज़ा
इज़्तिराब = बेचैनी
~ Fani Badayuni
----------
आँखों में चाहत दिल में कशिश है;
फिर क्यों ना जाने मुलाकात में बंदिश है;
मोहब्बत है हम दोनों को एक-दूसरे से;
फिर भी दिलों में ना जाने यह रंजिश क्यों है।
----------
कुछ उलझे हुए सवालों से डरता है दिल;
ना जाने क्यों तन्हाई में बिखरता है दिल;
किसी को पा लेना कोई बड़ी बात तो नहीं;
पर उनको खोने से डरता है यह दिल।
----------
क्या मांगू खुदा से तुम्हें पाने के बाद;
किसका करूँ इंतज़ार तेरे आने के बाद;
क्यों इश्क़ में जान लुटा देते हैं लोग;
मैंने भी यह जाना तुमसे इश्क़ करने के बाद।
----------
दुःख में ख़ुशी की वजह बनी है मोहब्बत;
दर्द में यादों की वजह बनी है मोहब्बत;
जब कुछ भी ना रहा था अच्छा इस दुनिया में;
तब हमारे जीने की वजह बनी है यह मोहब्बत।
----------
मेरी साँसों में बिखर जाओ तो अच्छा होगा;
बन के रूह मेरे जिस्म में उतर जाओ तो अच्छा होगा;
किसी रात तेरी गोद में सिर रख के सो जाऊं;
फिर उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा होगा।
----------
जब कोई ख्याल दिल से टकराता है;
दिल ना चाह कर भी, खामोश रह जाता है;
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है;
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है।
----------
कुछ खेल नहीं है इश्क़ करना;
ये ज़िंदगी भर का रत-जगा है।
~ Ahmad Nadeem Qasimi
----------
माना कि किस्मत पे मेरा कोई ज़ोर नही;
पर ये सच है कि मोहब्बत मेरी कमज़ोर नही;
उस के दिल मे, उसकी यादो मे कोई और है लेकिन;
मेरी हर साँस में उसके सिवा कोई और नही।
----------
करिये तो कोशिश हमको याद करने की;
फुर्सत के लम्हे तो अपने आप मिल जायेंगे;
दिल में अगर है चाहत हमसे मिलने की;
बहाने मिलने के खुद-ब-खुद बन जायेंगे।
----------
रात होगी तो चाँद दुहाई देगा;
ख्वाबों में आपको वह चेहरा दिखाई देगा;
ये मोहब्बत है ज़रा सोच कर करना;
एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा।
----------
ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा;
क्योंकि हशर की परवाह मैं नहीं करता;
फनाह होना तो रिवायत है तेरी;
इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।
----------
दिल के किसी कोने में अब कोई जगह नहीं ऐ सनम;
कि तस्वीर हमने हर तरफ तेरी ही लगा रखी है।
----------
जो रहते हैं दिल में वो जुदा नहीं होते;
कुछ एहसास लफ़्ज़ों से बयां नहीं होते;
एक हसरत है कि उनको मनाये कभी;
एक वो हैं कि कभी खफा नहीं होते।
----------
सोचता हूँ कि, कभी भी अब तुझे याद नहीं करूँगा;
फिर सोचता हूँ एक ये फ़र्क़ तो रहने दो हम दोनों में।
----------
तू ही मिल जाये मुझे ये ही काफ़ी है;
मेरी हर साँस ने बस यही दुआ माँगी है;
जाने क्यों दिल खींचा जाता है तेरी तरफ़;
क्या तुमने भी मुझे पाने की कोई दुआ माँगी है।
----------
ज़िंदगी जीने के लिए मुझे दुआ चाहिए;
उस पर किस्मत की भी वफ़ा चाहिए;
खुदा के रहम से सब कुछ है मेरे पास;
बस प्यार करने के लिए आप जैसा कोई महबूब चाहिए।
----------
कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के;
वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के।
~ Khumar Barabankvi
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चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;
मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;
देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना;
अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं।
----------
कभी मोहब्बत करो तो हमसे करना;
दिल की बात जुबाँ पर आये तो हम से कहना;
न कह सको कुछ तो आँखें झुका लेना;
हम समझ जायेंगे हमें तुम न कुछ कहना।
----------
ज़माने भर में आशिक कोई हमसा नही होगा;
खूबसूरत सनम भी कोई तुमसा नहीं होगा;
मर भी जाये उसकी बाहों में तो कोई गम नही यारो;
क्योंकी उसके आँचल से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होगा।
----------
जो एक बार दिल में बस जाये उसे हम निकाल नहीं सकते;
जिसे दिल अपना बना ले उसे फिर कभी भुला नहीं सकते;
वो जहाँ भी रहे ऐ खुदा हमेशा खुश रहे;
उनके लिए कितना प्यार है हमें ये कभी हम जता नहीं सकते।
----------
दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त;
हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते।
~ Akbar Allahabadi
----------
बड़ी मुद्दत से चाहा है तुम्हें;
बड़ी दुआओं से पाया है तुम्हें;
तुम ने भुलाने का सोचा भी कैसे;
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुम्हें।
----------
हर घडी एक नाम याद आता है;
कभी सुबह, कभी शाम याद आता है;
सोचते हैं हम कि कर लें फिर से मोहब्बत;
फिर हमें मोहब्बत का अंजाम याद आता है।
----------
वो कहीं भी गया लौटा तो मेरे पास आया;
बस यही बात अच्छी है मेरे हरजाई की।
~ Parveen Shakir
----------
इस दिल की हर धड़कन का एहसास हो तुम;
तुम क्या जानो हमारे लिए कितने ख़ास हो तुम;
जुदा होकर तुमने हमे मौत से भी बदतर सज़ा दी है;
फिर भी इस तड़पते हुए दिल ने तुम्हें खुश रहने की दुआ दी है।
----------
उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था;
कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था;
बेवफा भी नहीं कह सकते उसको ज़ालिम;
प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।
----------
प्यासी ये निगाहें तरसती रहती हैं;
तेरी याद में अक्सर बरसती रहती हैं;
हम तेरे ख्यालों में डूबे रहते हैं;
और ये ज़ालिम दुनिया हम पे हँसती रहती है।
----------
चाहत के ये कैसे अफ़साने हुए;
खुद नज़रों में अपनी बेगाने हुए;
अब दुनिया की नहीं कोई परवाह हमें;
इश्क़ में तेरे इस कदर दीवाने हुए।
----------
तेरी आवाज़ तेरे रूप की पहचान है;
तेरे दिल की धड़कन में दिल की जान है;
ना सुनूं जिस दिन तेरी बातें;
लगता है उस रोज़ ये जिस्म बेजान है।
----------
ना दिल से होता है, ना दिमाग से होता है;
ये प्यार तो इत्तेफ़ाक़ से होता है;
पर प्यार करके प्यार ही मिले;
ये इत्तेफ़ाक़ भी किसी-किसी के साथ होता है।
----------
फिर से वो सपना सजाने चला हूँ;
उमीदों के सहारे दिल लगाने चला हूँ;
पता है कि अंजाम बुरा ही होगा मेरा;
फिर भी किसी को अपना बनाने चला हूँ।
----------
मुश्किल था कुछ तो इश्क़ की बाज़ी को जीतना;
कुछ जीतने के ख़ौफ़ से हारे चले गए।
~ Shakeel Badayuni
----------
आईने में भी खुद को झांक कर देखा;
खुद को भी हमने तनहा करके देखा;
पता चल गया हमें कितनी मोहब्बत है आपसे;
जब तेरी याद को दिल से जुदा करके देखा।
----------
देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं;
दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं;
नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर;
फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।
----------
कहते हैं ग़ज़ल क़ाफ़िया-पैमाई है नासिर;
ये क़ाफ़िया-पैमाई ज़रा कर के तो देखो।
~ Nasir Kazmi
----------
बेवजह हम वजह ढूंढ़ते हैं तेरे पास आने को;
ये दिल बेकरार है तुझे धड़कन में बसाने को;
बुझी नहीं प्यास इन होंठों की अभी;
न जाने कब मिलेगा सुकून तेरे इस दीवाने को।
----------
यूँ तो तमन्नाएं दिल में ना थी हमें लेकिन;
ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक़ बन बैठे;
बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन;
ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।
----------
तुम बिन ज़िंदगी सूनी सी लगती है;
हर पल अधूरी सी लगती है;
अब तो इन साँसों को अपनी साँसों से जोड़ दे;
क्योंकि अब यह ज़िंदगी कुछ पल की मेहमान सी लगती है।
----------
'अनीस' आसान नहीं आबाद करना घर मोहब्बत का;
ये उन का काम है जो ज़िंदगी बर्बाद करते हैं।
~ Meer Anees
----------
तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे;
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे;
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो;
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।
----------
हम फिर उनके रूठ जाने पर फ़िदा होने लगे;
फिर हमे प्यार आ गया जब वो ख़फ़ा होने लगे।
----------
संगमरमर के महल में तेरी ही तस्वीर सजाऊंगा;
मेरे इस दिल में ऐ प्यार तेरे ही ख्वाब सजाऊंगा;
यूँ एक बार आजमा के देख तेरे दिल में बस जाऊंगा;
मैं तो प्यार का हूँ प्यासा जो तेरे आगोश में मर जाऊॅंगा।
----------
तपिश से बच के घटाओं में बैठ जाते हैं;
गए हुए कि सदाओं में बैठ जाते हैं;
हम इर्द-गिर्द के मौसम से घबरायें;
तेरे ख्यालों की छाओं में बैठ जाते हैं।
~ Farhat Abbas Shah
----------
हम जानते तो इश्क़ न करते किसी के साथ;
ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ।
~ Mir Taqi Mir
----------
इश्क़ का शुक्रिया कुछ इस तरह अदा करूँ;
आप भूल भी जाओ तो मैं हर पल याद करूँ;
इस इश्क़ ने बस इतना सिखाया है मुझे;
कि खुद से पहले आपके लिए दुआ करूँ।
----------
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं;
अब रातों को जागना अच्छा लगता है;
पता नहीं वो मेरी तकदीर में है कि नहीं;
पर उसे खुदा से माँगना अच्छा लगता है।
----------
यूँ तो तमन्ना दिल में ना थी लेकिन;
ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक बन बैठे;
बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन;
ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।
----------
तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहाँ पहुँचेगा;
शमा होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा।
~ Bahadur Shah Zafar
----------
ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;
ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;
आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;
आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।
----------
ऐसा क्या कह दूं कि तेरे दिल को छू जाए;
ऐसी किससे दुआ मांगू कि तू मेरी हो जाए;
तुझे पाना नहीं तेरा हो जाना है मन्नत मेरी;
ऐसा क्या कर दूं कि ये मन्नत पूरी हो जाए।
----------
तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;
एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
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हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं;
जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं।
~ Munawwar Rana
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आपके बिन टूटकर बिखर जायेंगे;
मिल जायेंगे आप तो गुलशन की तरह हम खिल जायेंगे;
अगर न मिले आप तो जीते जी मर जायेंगे;
पा लिया जो आपको तो मर कर भी जी जायेंगे।
----------
तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं;
तस्सवुर मैं तेरे तन्हाइयों से प्यार करते हैं;
जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले;
उन चर्चों से अब हम प्यार करते हैं।
----------
कोई तीर जैसे जिगर के पार हुआ है;
जाने क्यों दिल इतना बेक़रार हुआ है;
पहले कभी देखा न मैंने तुम्हें;
फिर भी क्यों ऐ अजनबी इस कदर तुमसे प्यार हुआ है।
----------
आँखें मुझे तलवे से मलने नहीं देते;
अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते;
खातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते;
सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं दते;
किसी नाज़ से कहते हैं झुंझला के शब-ए-वस्ल;
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।
~ Akbar Allahabadi
----------
वो लाख तुझे पूजती होगी मगर तू खुश न हो ऐ खुदा;
वो मंदिर भी जाती है तो मेरी गली से गुजरने के लिए!
----------
मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
लोगो में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
अब ये आइना भी किस काम का मेरे;
मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
----------
सपनों की दुनिया में हम खोते चले गए;
मदहोश न थे पर मदहोश होते चले गए;
ना जाने क्या बात थी उस चेहरे में;
ना चाहते हुए भी उसके होते चले गए।
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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या;
क्या बताऊँ कि मिरे दिल में हैं अरमाँ क्या क्या;
ग़म अज़ीज़ों का हसीनों की जुदाई देखी;
देखें दिखलाए अभी गर्दिश-ए-दौराँ क्या क्या।
~ Akhtar Sheerani
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जब कभी टूट कर बिखरो तो बताना हमको;
हम तुम्हें रेत के जर्रों से भी चुन सकते हैं।
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क्या इश्क़ एक ज़िंदगी-ए-मुस्तआर का;
क्या इश्क़ पाएदार से ना-पाएदार का;
वो इश्क़ जिस की शमा बुझा दे अजल की फूँक;
उस में मज़ा नहीं तपिश-ओ-इंतिज़ार का।
~ Allama Iqbal
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अजब अपना हाल होता जो वस्ल-ए-यार होता;
कभी जान सदके होती कभी दिल निसार होता;
कोई फ़ित्ना या क़यामत न फिर अश्कार होता;
तेरे दिल पे ज़ालिम काश मुझे इख़्तियार होता।
~ Daagh Dehlvi
----------
ऊपर से गुस्सा दिल से प्यार करते हो;
नज़रें चुराते हो दिल बेक़रार करते हो;
लाख़ छुपाओ दुनिया से मुझे ख़बर है;
तुम मुझे ख़ुद से भी ज्यादा प्यार करते हो।
----------
आप पहलू में जो बैठें तो संभल कर बैठें;
दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की।
~ Jaleel Manikpuri
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ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो;
नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें;
अब न वो मैं हूं न तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़'
जैसे दो साये तमन्‍ना के सराबों में मिलें।
~ Ahmad Faraz
----------
हमसफ़र तो साथ-साथ चलते हैं;
रास्ते तो बेवफ़ा बदलते हैं;
आपका चेहरा है जब से मेरे दिल में;
जाने क्यों लोग मेरे दिल से जलते हैं।
----------
घर से बाहर वो नक़ाब मे निकली;
सारी गली उनकी फिराक मे निकली;
इनकार करते थे वो हमारी मोहब्बत से;
और हमारी ही तस्वीर उनकी किताब से निकली।
----------
मैं खुद पहल करूँ या उधर से हो इब्तिदा;
बरसों गुज़र गए हैं यही सोचते हुए।
~ Ehsaan Danish
----------
निकलते हैं तेरे आशियां के आगे से यह सोच कर कि तेरा दीदार हो जायेगा;
खिड़की से तेरी सूरत न सही तेरा साया तो नजर आएगा।
----------
चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं;
मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते हैं;
बच के रहना इन हुस्न वालों से यारो;
इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं।
----------
साहिल पर खड़े-खड़े हमने शाम कर दी;
अपना दिल और दुनिया आप के नाम कर दी;
ये भी न सोचा कैसे गुज़रेगी ज़िंदगी;
बिना सोचे-समझे हर ख़ुशी आपके नाम कर दी।
----------
आँखों मे आ जाते है आँसू;
फिर भी लबों पे हँसी रखनी पड़ती है;
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो;
जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है।
----------
न हम कुछ कह पाते हैं, न वो कुछ कह पाते हैं;
एक दूसरे को देखकर गुजर जाया करते हैं;
कब तक चलता रहेगा ये सिलसिला;
ये सोचकर दिन गुजर जाया करते हैं।
----------
शायर तो हम है शायरी बना देंगे;
आपको शायरी मे क़ैद कर लेंगे;
कभी सुनाओ हमें अपनी आवाज़;
आपकी आवाज़ को हम ग़ज़ल बना देंगे।
----------
कब तक होश संभाले कोई, होश उड़े तो उड़ जाने दो;
दिल कब सीधी राह चला है, राह मुड़े तो मुड़ जाने दो।
----------
नक़ाब क्या छुपाएगा शबाब-ए-हुस्न को;
निगाह-ए-इश्क तो पत्थर भी चीर देती है।
----------
मोहब्बत एक नाम है दर्द और ख़ुशी की कहानी का;
मोहब्बत एक नाम है हर पल मुस्कुराने का;
ये कोई लम्हा दो लम्हों की पहचान नहीं है;
मोहब्बत एक नाम है हर पल साथ निभाने का।
----------
होठों पर मोहब्बत के फ़साने नहीं आते;
साहिल पर समंदर के खजाने नहीं आते;
पलकें भी चमक उठती हैं सोते हुए हमारी;
आँखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते।
~ Bashir Badr
----------
फ़िज़ा को महकाती शाम हो तुम;
प्यार में छलकता जाम हो तुम;
तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं;
मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
----------
मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;
मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
----------
यूँ ही तो नहीं दिल मेरा तुझे तलाशता फिरता;
कर यकीन मंज़िल का तू ही है किनारा मेरा;
यूँ ही तो नहीं आयी सदा तेरी हवाओं में बह कर;
हौले से तूने ही होगा नाम पुकारा मेरा।
----------
अरे आप क्यों नहीं समझते हो सनम;
दिल का दर्द दबता नहीं है दबाने से;
आपको मोहब्बत का इज़हार करना ही पड़ेगा;
क्योंकि मोहब्बत छुपती नहीं छुपाने से।
----------
वो बात क्या करूँ जिसकी खबर ही न हो;
वो दुआ क्या करूँ जिसमे असर ही न हो;
कैसे कह दूँ आपको लग जाये मेरी भी उम्र;
क्या पता अगले पल मेरी उम्र ही न हो।
----------
छुपा लूंगा तुझे इस तरह से मेरी बाहों में;
हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे;
हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह;
कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे।
----------
उधर ज़ुल्फ़ों में कंघी लग रही है और ख़म निकलता है;
इधर रग-रग से खिंच-खिंच के हमारा दम निकलता है;
इलाही ख़ैर कर उलझन पे उलझन पड़ती जाती है;
ना उनका ख़म निकलता है ना अपना दम निकलता है।

ख़म - उलझन
----------
इश्क़ नाज़ुक मिजाज़ है बे-हद;
अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता।
----------
तू ही बता ए दिल तुम्हें समझाऊं कैसे;
जिसे चाहता है तू उसे नज़दीक लाऊँ कैसे;
यूँ तो हर तमन्ना हर एहसास है वो मेरा;
मगर उस एहसास को ये एहसास दिलाऊं कैसे।
----------
क्या ज़रूरी है कि हम हार के जीतें 'तबिश';
इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है!
~ Abbas Tabish
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कभी लफ्ज़ भूल जाऊं, कभी बात भूल जाऊं;
तूझे इस क़द्र चाहूँ के अपनी ज़ात भूल जाऊं;
उठ के तेरे पास से जो में चल दूँ;
जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊं!
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अब मगर कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं हो सकता;
अपने जज़्बों से यह रंगीन शरारत न करो;
कितनी मासूम हो, नाज़ुक हो, हमाक़त न करो;
बार बार हाँ तुम से कहा था कि मोहब्बत न करो।
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फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी;
ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी;
थाम लो हाथ उसका जो प्यार करे तुमसे;
ये ज़िंदगी ठहरेगी नहीं जो गुज़र जायेगी।
~ Allama Iqbal
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जिस रंग में देखो उसे वो पर्दानशीं है;
और उस पे ये पर्दा है कि पर्दा ही नहीं है;
मुझ से कोई पूछे तेरे मिलने की अदायें;
दुनिया तो यह कहती है कि मुमकिन ही नहीं है।
~ Jigar Moradabadi
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कौन कहता है मोहब्बत की ज़ुबान होती है;
होंठों के बिना खुले ही हक़ीक़त बयां होती है;
इश्क़ वो खुदायी है मेरे दोस्त,
जो लफ़्ज़ों से नहीं आँखों से बयां होती है।
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सरे राह जो उनसे नज़र मिली,
तो नक़्श दिल के उभर गए;
हम नज़र मिला कर झिझक गए,
वो नज़र झुका कर चले गए।
~ Mirza Ghalib
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जब आंसू आए तो रो जाते हैं;
जब ख्वाब आए तो खो जाते हैं;
नींद आंखो में आती नहीं;
बस आप ख्वाबो में आयेंगे, यही सोच कर सो जाते हैं।
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ना जाने इतनी मुहब्बत कहां से आई है उसके लिये;
कि मेरा दिल भी उसकी खातिर मुझसे रूठ जाता है।
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ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्रो-करार;
बेक़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी।
~ Bahadur Shah Zafar
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मोहब्बत के बाद मोहब्बत मुमकिन तो है;
पर टूट कर चाहना सिर्फ एक बार होता है​।
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​हज़ार चेहरों में उसकी मुशाहबतें मिले मुझ को;
पर दिल की ज़िद थी अगर वो नहीं तो उस जैसा भी नहीं।
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तोड़ कर देख लिया आईना-ए-दिल तूने;​
तेरी सूरत के सिवा और बता क्या निकला​।
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​उससे कहो के मेरी सजा को कुछ कम कर दे;
मैं आदि मुजरिम नहीं हूँ गलती से इश्क हुआ था।
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मेरे इन होंठों पर तेरा नाम अब भी है;
भले छीन ली तुमने मुस्कुराहट हमारी।
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हमारे प्यार का यूँ इम्तिहान ना लो;
करके बेरुखी मेरी तुम जान ना लो;
एक इशारा कर दो हम खुद मर जाएंगे;
हमारी मौत का खुद पर इल्ज़ाम ना लो।
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चाहने वाले की जानता है अजमत कोई-कोई;
दिल से करता है आज मोहब्बत कोई-कोई;
मोहब्बत में चाहते हैं सब अशूक यार;
दीवाने की माफिक चाहे तुरबत कोई-कोई।
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कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी;
​चंद सिक्कों के लिए तुने क्या नहीं खोया है;​
माना नहीं है मखमल का बिछोना मेरे पास;
पर तु ये बता, कितनी राते चैन से सोया है।
~ Lata Chaudhary
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तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो;
किस-किस को बताओगे घर क्यों नहीं जाते।
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अगर इश्क़ गुनाह है गुनाहगार है खुदा;
जिसने बनाया दिल किसी पर आने के लिए।
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मोहब्बत की हद्द है सितारों से आगे;
प्यार का जहाँ है बहारों से आगे;
वो दीवानों की कश्ती जब बहने लगी;
तो बहते बह गई किनारों से आगे।
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कहते हैं लोग खुदा की इबादत है;
ये मेरी समझ में तो एक जहालत है;
चैन न आए दिल को, रात जाग के गुजरे;
जरा बताओ दोस्तों क्या यही मोहब्बत है।
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है इश्क़ की मंज़िल में हाल के जैसे;
लुट जाए कहीं राह में सामान किसी का।
~ Bhaddurshah Zafar
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ना इश्क़ का इज़हार किया, ना ठुकरा सके हमें वो;
हम तमाम ज़िंदगी मज़लूम रहे, उनके वादा मोहब्बत के।
~ JD Ghai
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एहसास के दामन में आंसू गिराकर देखो;
प्यार कितना है आजमा कर देखो;
तुम्हें भूल कर क्या होगी दिल की हालत;
किसी आईने पे पत्थर गिराकर तो देखो।
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लोगों ने कहा तुम उसको याद क्यों करते हो;
जो तुम्हे याद ही नहीं करता;
तड़प कर दिल बोला;
मोहब्बत करने वाले कभी मुक़ाबला नहीं करते।
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​इश्क़ की बंदगी दी है तो हुस्न की इबादत जरूरी है;
इश्क़ से जीने की आस रहेगी और हुस्न से तड़प का सकून​।
~ JD Ghai
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आँखों में इश्क़, लब पे ख़ामोशी;
अंदाज़ में इकरार, जिस्म में इंकार;
कहाँ जाएं मोहब्बत करने वाले;
एक तरफ जन्नत, दूसरी तरफ जहन्नुम।
~ JD Ghai
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं, यह वो आतिश ग़ालिब;
के लगाए ना लगे और बुझाए ना बुझे।
~ Mirza Ghalib
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ये इश्क़ के घाव बहुत गहरे है;
दर्द भी देते हैं और भरते भी नहीं।
~ JD Ghai
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ना पूछ दिल की हक़ीक़त मगर ये कहता है;
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया।
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वो मेरे दिल पर सिर रखकर सोई थी बेखबर;
हमने धड़कन ही रोक ली कि कहीं उसकी नींद ना टूट जाए।
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आँसू आ जाते हैं आँखों में;
पर लबों पर हंसी लानी पड़ती है;
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो;
जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है।
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​रिश्तों का धागा इतना कच्चा नहीं होता;
किसी का दिल तोड़ना अच्छा नहीं होता;
प्यार तो दिल की आवाज़ है;
कौन कहता है एक तरफ़ का प्यार सच्चा नहीं होता​।
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कितना प्यार है उनसे काश वो ये जान लें;
वो ही है ज़िंदगी मेरी ये बात मान लें;
उनको देने को नहीं कुछ पास हमारे;
बस एक जान है हमारी जब चाहे मांग लें!
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जिनको हमने चाहा मोहब्बत की हदें तोड़ कर;
आज उसने देखा नहीं निगाह मोड़ कर;
ये जान कर बहुत दुःख हुआ मुझे;
कि वो खुद भी तन्हा हो गये मुझे छोड़ कर!
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ऐ मोहब्बत, तुझे पाने की कोई राह नहीं;
तू तो उसे ही मिलेगी, जिसे तेरी परवाह नहीं।
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कसूर ना उनका था ना हमारा;
हम दोनों ही रिश्तों की रसम निभाते रहे;
वो दोस्ती का एहसास जताते रहे;
और हम मोहब्बत को दिल में छुपाते रहे​।
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वो खुदा था मेरा अब मेरा ईमान है; ​​
चला गया छोड़ कर, इसलिए दिल उदास है;
बेवफा नही कहूंगा ​मैं उसको;
क्यूंकी इश्क़ करना उसका मुझ पर अहसान है।
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प्यार में कोई तो दिल तोड़ देता है;
दोस्ती मेँ कोई तो भरोसा तोड़ देता है;
जिंदगी जीना तो कोई गुलाब से सीखे;
जो खुद टूट कर दो दिलों को जोड़ देता है।
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कैसा सितम है आपका यह कि रोने भी नहीं देता;
करीब आते नहीं और खुद से जुदा होने भी नहीं देता।
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जिस तरह रगों में खून रहता है;
इस तरह तेरी चाहत का जुनून रहता है;
ज़िंदगी की हर ख़ुशी मंसूब है तुमसे;
बात हो तुमसे तो दिल को सुकून रहता है।
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अब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ;
लोग जल जल कर ख़ाक हुए जाते हैं;
उड़ता है दिल से जैसे धुआँ;
बस वो छूने से ही राख हुए जाते है।
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हाँ! मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं;
जा! किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।
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तलब करे तो मैं अपनी आँखें भी उन्हें देदू;
मगर ये लोग मेरी आँखों के ख्वाब मांगते हैं।
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बड़ी मुद्दत से चाहा है तुम्हे;
बड़ी दुआओ से पाया है तुम्हे;
तुझे भुलाने का सोचूं भी कैसे;
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुम्हें।​
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यह रात इतनी तन्हा क्यों होती है;
किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों होती है;
अजीब खेल खेलती है ये किस्मत भी;
जिसे पा नहीं सकते उसी से मोहब्बत क्यों होती है।
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​​मोहब्बत नहीं है क़ैद मिलने या बिछड़ने की​;​
ये इन खुदगर्ज़ लफ़्ज़ों से बहुत आगे की बात है।
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मुद्दत से दूर थे हम-तुम;
एक ज़माने के बाद मिलना अच्छा लगा;
सागर से गहरा लगा प्यार आपका;
तैरना तो आता था पर डूबना अच्छा लगा।
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कितने तोहफे देती है ये मोहब्बत भी यार;
दुःख अलग रुस्वाई अलग, जुदाई अलग तन्हाई अलग।
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उस एक चेहरे ने हमें ​तन्हा कर दिया वरना;​
हम तो ​अपने आप में ही एक महफ़िल हुआ करते थे।
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​इश्क़ ने हमें बेनाम कर दिया;
हर ख़ुशी से अनजान कर दिया;
हमने कभी नहीं चाहा कि हमें इश्क़ हो;
पर उनकी एक नज़र ने हमें नीलाम कर दिया।
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ना रूठना हमसे हम मर जाएंगे;
दिल की दुनिया तबाह कर जाएंगे;
प्यार किया है हमने कोई मज़ाक नहीं;
दिल की धड़कन तेरे नाम कर जाएंगे।
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​मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ​;​
मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ​;​
कब पूछा मैंने ​कि ​क्यूँ दूर हो मुझसे​;​
मैं दिल रखता हूँ तेरे हालात समझता हूँ​।
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​तु ही मिल जाए मुझे बस इतना ही काफी है​;​
मेरी हर सांस ने बस ये ही दुआ मांगी है​;​
जाने क्यूँ दिल खिंचा चला जाता है तेरी तरफ​;​
क्या तूने भी मुझे पाने की दुआ मांगी है​।
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​तेरे बगैर इस ज़िन्दगी की हमें जरुरत नहीं​;​
तेरे सिवा हमें किसी और की चाहत नहीं​;​
तुम ही रहोगे हमेशा मेरे दिल​ में​;​
किसी और को इस दिल में आने की इजाज़त नहीं​।
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​​एक अजनबी से बात क्या हुई क़यामत हो गयी​;
सारे शहर को इस चाहत की खबर हो गयी​​;​
​क्यूँ ना दोष दू ​इस ​दिल-ऐ-नादाँ को​;​
दोस्ती का इरादा था और मोहब्बत हो गयी​।
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​रुलाना हर किसी को आता है;​
​हँसाना भी हर किसी को आता है;​
​​रुला के जो मना ले वो सच्चा यार है;​​​
​​और जो रुला के खुद भी रो पड़े वही सच्चा प्यार है।
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​न​ज़​रे​ मिले तो प्यार हो जाता है;
पलके उठे तो इज़हार हो जाता हैं;
ना जाने क्या कशिश हैं चाहत में;
कि कोई अनजान भी हमारी;
जिंदगी हक़दार हो जाता है।
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लबों की हँसी आपके नाम कर देंगे;
हर खुशी आप पर कुर्बान कर देँगेँ;
जिस दिन होगी कमी मेरे प्यार;
उस दिन हम इस दुनिया को सलाम कर देंगे।
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मुहब्बत के लिए इक ज़िंदगी कम पड़ गयी होगी;
तभी तो सात जन्मों का खुदा ने कर दिया बंधन।
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जख्म बन जाने की आदत है उन्हें;
रुला कर मुस्कुराने की आदत है उन्हें;
मिलेंगे कभी तो खूब रुलाएंगे;
सुना हैं रोते हुए लिपट जाने की आदत है उन्हें।
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जो आपने न लिया हो, ऐसा कोई इम्तिहान न रहा;
इंसान आखिर मोहब्बत में इंसान न रहा;
है कोई बस्ती, जहां से न उठा हो ज़नाज़ा दीवाने का;
आशिक की कुर्बत से महरूम कोई कब्रिस्तान न रहा।
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जनाजा रोक कर वो मेरा कुछ इस अन्दाज़ मे बोले;
गली छोड्ने को कहा था, तुमने तो दुनियां ही छोड दी।
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तुम रख ना सकोगे मेरा तौफ़ा संभालकर;
वरना मैं अभी दे दूं जिस्म से रूह निकाल कर।
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किसी की क्या मजाल थी;
जो हमें खरीद सकता;
हम तो खुद ही बिक गये;
खरीददार देख के।
~ Mirza Ghalib
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अपनी तो यारो बस इतनी सी कहानी है;
कुछ तो खुद से ही बर्बाद थे;
कुछ इश्क की मेहरबानी है।
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अक्ल कहती है, ना जा कूचा-ए-क़ातिल की तरफ;
सरफ़रोशी की हवस कहती है चल क्या होगा।
~ Bedil Ajhimabadi
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इश्क की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सही;
दर्द कम हो कि ज्यादा हो, मगर हो तो सही।
~ Jhlal
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वो दिल लेकर हमें बेदिल ना समझें उनसे कह देना;
जो हैं मारे हुए नज़रों के उनकी हर नज़र दिल है।
~ Mir Taqi Mir
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ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्र-ओ-करार;
बेकरारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो ना थी।
~ Bhaddurshah Zafar
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जिस दिल में बसा था प्यार तेरा;
वो दिल तो कभी का तोड़ दिया;
बदनाम ना होने देंगे तुझे इसलिए;
तेरा नाम भी लेना छोड़ा दिया।
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गहराई प्यार में हो तो बेवफाई नहीं होती;
सच्चे प्यार में कहीं तन्हाई नहीं होती;
मगर प्यार ज़रा संभल कर करना मेरे दोस्त;
प्यार के ज़ख्म की कोई दवा नहीं होती।
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वो सामने थी और हम पलके उठा ना सके;
चाहते थे पर पास उनके जा ना सके;
ना देख ले वो अपनी तस्वीर हमारी आँखों में;
बस यही सोच कर हम उनसे नज़रे मिला ना सके।
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हम नहीं जीत सके उनसे;
वो ऐसी शर्त लगाने लगे;
प्यारी सी आँखों को;
मेरी आँखों से लडाने लगे;
हम शायद जीत भी जाते;
पर पलके हमने तब झपकाई;
जब उनकी आँखों से आंसू आने लगे।
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दूर जाकर भी हम दूर जा ना सकेंगे;
कितना रोयेंगे हम बता ना सकेंगे;
गम इसका नहीं कि आप मिल ना सकोगे;
दर्द इस बात का होगा कि हम आप को भुला ना सकेंगे।
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ना चाहो किसी को ऐसे कि;
चाहत आपकी मज़बूरी बन जाए;
पर चाहो किसी को इतना कि;
आपका प्यार उसके लिए जरुरी बन जाए।
----------
तेरे इश्क का बुखार है मुझको;
और हर चीज खाने की मनाही है;
एक हुस्न के हकीम ने सिर्फ;
तेरे चमन की मौसमी बताई है।
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हर हसीं काफिरां के माथे पर;
अपनी रहमत का ताज रखता है;
तू भी परवरदिगार मेरी तरह;
आशिकाना मिज़ाज रखता है।
~ Narendra Kumar Shad
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अगर तुम किसी को दिल की गहराइयों से चाहों;
तो ये उम्मीद मत करो कि वो भी तुम्हे चाहे;
लेकिन चाहों उसे इस कदर टूट के कि;
तुम्हारे सिवा किसी और का प्यार उसे पसंद ही न आए।
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वो थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था;
आता न था नज़र तो नज़र का कुसूर था।
~ Jigar Moradabadi
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चुरा के मुट्ठी में दिल को छिपाए बैठे है;
बहाना यह है कि मेहंदी लगाए बैठे है।
~ Atish
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तुम बहारों की आरजू न करो;
हमने कांटों में फूल देखे हैं।
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जला कर शमा-ए-उल्फत आप ने फ़ौरन ही गुल कर दी;
खुदारा ये तो बता दीजिये कि अब परवानों का क्या होगा!
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मैं क़ाबिल-ए-नफ़रत, हूँ तो छोड़ दो मुझको;
मगर यूं मुझसे दिखावे की मोहब्बत ना किया करो।
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दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई;
दोनों को इक अदा में रजामंद कर गई;
शक हो गया है सीना, ख़ुशी लज्जते-फ़िराक;
तकलीफे-पर्दादारी-ए-ज़ख्म-जिगर गई!
----------
रिश्वत भी नहीं लेता कमबख्त जान छोड़ने की;
ये तेरा इश्क मुझे बहुत ईमानदार लगता है!
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वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज़ समझते रहे;
नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है!
----------
दिलों की जरुरत कोई क्या समझेगा;
रिश्तों की अहमियत कोई क्या समझेगा;
तेरी मुस्कान ही है मेरी ख़ुशी;
इस ख़ुशी की कीमत कोई क्या समझेगा!
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किसी का क्या जो क़दमों पर जबीं-ए-बंदगी रख दी;
हमारी चीज़ थी हमने जहां जानी वहां रख दी;
जो दिल माँगा तो वो बोले ठहरो याद करने दो;
ज़रा सी चीज़ थी हमने जाने कहाँ रख दी!
----------
हमें पता था की उसकी मोहब्बत के जाम में ज़हर है;
पर उसका पिलाने का अंदाज़ ही इतना प्यारा था की हम ठुकरा न सके!
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तुम्हें नींद नहीं आती तो कोई और वजह होगी;
अब हर ऐब के लिए कसूरवार इश्क तो नहीं।
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हर खामोशी का मतलब इंकार नहीं होता;
हर नाकामयाबी का मतलब हार नहीं होता;
तो क्या हुआ अगर हम तुम्हें न पा सके;
सिर्फ पाने का मतलब प्यार नहीं होता!
----------
जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है;
संग हर शख्स ने हाथों में उठा रखा है;
उसके दिल पर भी कड़ी इश्क में गुजरी होगी;
नाम जिसने भी मोहब्बत का सज़ा रखा है!
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हमने कब माँगा है तुमसे वफाओं का सिलसिला;
बस दर्द देते रहा करो, मोहब्बत बढ़ती जायेगी।
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ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है;
ज़ुल्फ़-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है;
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में;
इश्क ही इक हकीकत नहीं कुछ और भी है!
~ Sahir Ludhianvi
----------
तक़दीर के आईने में मेरी तस्वीर खो गई;
आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई;
मोहब्बत करके क्या पाया मैंने;
वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई!
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किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही;
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही;
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या;
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही!
----------
ये दिल न जाने क्या कर बैठा;
मुझसे बिना पूछे ही फैसला कर बैठा;
इस ज़मीन पर टूटा सितारा भी नहीं गिरता;
और ये पागल चाँद से मोहब्बत कर बैठा।
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हर बार दिल से ये पैगाम आए;
ज़ुबाँ खोलूं तो तेरा ही नाम आए;
तुम ही क्यूँ भाए दिल को क्या मालूम;
जब नज़रों के सामने हसीन तमाम आए|
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कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है;
कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है;
कब तलक बयाँ करूँ दिल की बात;
हर सांस में अब तेरा एहसास आ जाता है।
----------
मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं;
चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।
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कुछ चेहरे भुलाए नहीं जाते;
कुछ नाम दिल से मिटाए नहीं जाते;
मुलाक़ात हो न हो, अय मेरे यार;
प्यार के चिराग कभी बुझाए नहीं जाते।
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दुख मे खुशी की वजह बनती है मोहब्बत;
दर्द मे यादों की वजह बनती है मोहब्बत;
जब कुछ भी अच्छा नहीं लगता दुनिया में;
तब जीने की वजह बनती है मोहब्बत।
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तुझको पाकर भी न कम हो सकी बेताबि-ए-दिल;
इतना आसान तिरे इश्क़ गम था भी कहां।
~ Firaq Gorakhpuri
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आँखों में हया हो तो पर्दा दिल का ही काफी है;
नहीं तो नक़ाब से भी होते हैं, इशारे मोहब्बत के।
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वफा के बदले बेवफाई ना दिया करो;
मेरी उम्मीद ठुकरा कर इंकार ना किया करो;
तेरी मोहब्बत में हम सब कुछ खो बैठे;
जान चली जायेगी इम्तिहान ना लिया करो।
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लाखों में इन्तिख़ाब के क़ाबिल बना दिया;
जिस दिल को तुमने देख लिया, दिल बना दिया।
~ Jigar Moradabadi
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खुशबू ने फूल को एक अहसास बनाया;
फूल ने बाग को कुछ खास बनाया;
चाहत ने मोहब्बत को एक प्यास बनाया;
और इस मोहब्बत ने एक और देवदास बनाया।
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आँखों में आंसुओं की लकीर बन गई;
जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गई;
हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी;
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गई।
----------
राज़-ए-हक़ीकत जानने वाले देखिये अब क्या कहते हैं;
दिल को अपना दिल नहीं कहते, उनकी तमन्ना कहते हैं।
~ Fani Badayuni
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दिल की किताब में गुलाब उनका था;
रात की नींदों में ख्वाब उनका था;
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा;
मर जायेंगे तुम्हारे बिना यह जवाब उनका था।
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दिल में प्यार का आगाज हुआ करता है;
बातें करने का अंदाज हुआ करता है;
जब तक दिल को ठोकर नहीं लगती;
सबको अपने प्यार पर नाज हुआ करता है!
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कब तक रहोगे आखिर यूं दूर हमसे;
मिलना पड़ेगा आखिर एक दिन जरूर हमसे;
दामन बचाने वाले ये बेरुखी है कैसी?
कह दो अगर हुआ है कोई कसूर हमसे!
----------
बहते अश्कों की ज़ुबान नहीं होती;
लफ़्ज़ों में मोहब्बत बयां नही होती;
मिले जो प्यार तो कदर करना;
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नहीं होती।
----------
सब कुछ है मेरे पास पर दिल की दवा नहीं;
दूर वो मुझसे हैं पर मैं खफा नहीं;
मालूम है अब भी वो प्यार करते हैं मुझसे;
वो थोड़ा सा जिद्दी है, मगर बेवफा नहीं!
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Aksar Log Apni Chahat Ki Taarif Karte Hein;
Tanke Woh Khaafa Na Ho Jayein;
Hum Isliye Khamosh Rehte Hein;
Tanke Koi Aur Unpe Fida Na Ho Jaye!
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तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में, अय दोस्त;
दर्द हो तो समझ लेना कि महोब्बत अभी बाकी है।
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Kya Dhoondtey Ho Tum Ishq Ko Aye Bekhabar;
Yeh Khud Hi Dhond Leta Hai, Jisse Barbaad Karna Ho!
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धोखा दिया था जब तूने मुझे, जिंदगी से मैं नाराज था;
सोचा कि दिल से तुझे निकाल दूं, मगर कंबख्त दिल भी तेरे पास था।
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तुम्हारी दुनिया से जाने के बाद;
हम तुम्हें हर एक तारे में नज़र आया करेंगे;
तुम हर पल कोई दुआ माँग लेना;
और हम हर पल टूट जाया करेंगे।
----------
जब भी उनकी गली से गुज़रता हूँ;
मेरी आंखें एक दस्तक दे देती हैं;
दुःख ये नहीं, वो दरवाजा बंद कर देते हैं;
खुशी ये है, वो मुझे अब भी पहचान लेते हैं!
----------
कोई चाँद से मोहब्बत करता है;
कोई सूरज से मोहब्बत करता है;
हम उनसे मोहब्बत करते हैं;
जो हमसे मोहब्बत करते हैं।
----------
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो;
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो;
कुछ यूँ चला है तेरे 'इश्क' का जादू;
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।
----------
इश्क है वही जो हो एक तरफा;
इजहार है इश्क तो ख्वाईश बन जाती है;
है अगर इश्क तो आँखों में दिखाओ;
जुबां खोलने से ये नुमाइश बन जाती है।
----------
एक जनाजा और एक बारात टकरा गए;
उनको देखने वाले भी चकरा गए;
ऊपर से आवाज आई-ये कैसी विदाई है;
महबूब की डोली देखने साजन कि अर्थी भी आई है।
----------
मोहब्बत नापने का कोई पैमाना नहीं होता;
कहीं तू बढ़ भी सकता है, कहीं तू मुझ से कम होगा।
~ Wasim Barelvi
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लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं;
खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं;
जान बाकी है वो भी ले लीजिये;
दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं।
----------
ना जाने वो कौन तेरा हबीब होगा;
तेरे हाथों में जिसका नसीब होगा;
कोई तुम्हें चाहे ये कोई बड़ी बात नहीं;
लेकिन तुम जिसको चाहो, वो खुश नसीब होगा!
----------
आँखों में आंसुओं की लकीर बन गई;
जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गई;
हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी;
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गई!
----------
जिस्म तो बहुत संवार चुके रूह का सिंगार कीजिये;
फूल शाख से न तोड़िए खुशबुओं से प्यार कीजिये!
----------
जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते;
यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते;
खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी;
इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!
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तस्वीर में ख्याल होना तो लाज़मी सा है;
मगर एक तस्वीर है, जो ख्यालों में बनी है!
ग़ालिब मिर्ज़ा!
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Unke Dekhne Se Jo Aa Jaatie Hai Munh Par Raunaq;
Woh Samajhte Hain Ke Beemaar Ka Haal Achcha Hai!
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वफ़ा का लाज हम वफा से निभायेगें;
चाहत के दीप हम आँखों से जलाएंगे;
कभी जो गुजरना हो तुम्हें दूसरे रास्तों से;
हम फूल बनकर तेरी राहों में बिखर जायेंगे!
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ना आना लेकर उसे मेरे जनाजे में;
मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी;
मैं चार लोगो के कंधे पर हूंगा;
और मेरी जान पैदल होगी!
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कोई छुपाता है, कोई बताता है;
कोई रुलाता है, तो कोई हंसाता है;
प्यार तो हर किसी को ही किसी न किसी से हो जाता है;
फर्क तो इतना है कि कोई अजमाता है और कोई निभाता है!
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हम रूठे तो किसके भरोसे, कौन आएगा हमें मनाने के लिए;
हो सकता है, तरस आ भी जाए आपको;
पर दिल कहाँ से लाये, आप से रूठ जाने के लिए!
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रात होगी तो चाँद दुहाई देगा;
ख्वाबों में आपको वह चेहरा दिखाई देगा;
ये मोहब्बत है, ज़रा सोचकर करना;
एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा!
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अगर हो सके तो वापस कर दो;
बिना दिल के हमारा दिल नहीं लगता!
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इश्क का जिसको ख्वाब आ जाता है;
समझो उसका वक़्त खराब आ जाता है;
महबूब आये या न आये;
पर तारे गिनने का तो हिसाब आ ही जाता है!
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दो दिलो की मोहब्बत से जलते हैं लोग;
तरह-तरह की बातें तो करते हैं लोग;
जब चाँद और सूरज का होता है खुलकर मिलन;
तो उसे भी "सूर्य ग्रहण" तक कहते हैं लोग!
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तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको;
मेरी बात और है, मैने तो मोहब्बत की है!
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छुपा लूं तुझको अपनी बाँहों में इस तरह, कि हवा भी गुजरने की इजाज़त मांगे;
मदहोश हो जाऊं तेरे प्यार में इस तरह, कि होश भी आने की इजाज़त मांगे!
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खुद को वो चाहे लाख मुकमल समझें;
लेकिन मेरे बिना, वो मुझे अधुरा ही लगता है!
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तमाम नींदें गिरवी हैं हमारी उसके पास;
जिससे ज़रा सी मुहब्बत की थी हमनें!
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बस इतना ही कहा था, कि बरसो के प्यासे हैं हम;
उसने अपने होठों पे होंठ रख के, हमे खामोश कर दिया!
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उनके आने के इंतज़ार में हमनें;
सारे रास्ते दिएँ से जलाकर रोशन कर दिए!
उन्होंने सोचा कि मिलने का वादा तो रात का था;
वो सुबह समझ कर वापस चल दिए।
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बेवाफायों की इस दुनियां में संभलकर चलना मेरे दोस्तों;
यहाँ बर्बाद करने के लिए, मुहब्बत का भी सहारा लेते हैं लोग!
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अगर हो सके तो वापस कर दो वो हमें;
जिस दिल के बिना, हमारा दिल नहीं लगता!
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मेरे इश्क ने सीख ली है, अब वक़्त की तकसीम...
वो मुझे बहुत कम याद आता है;
सिर्फ इतना - दिल की हर एक धड़कन के साथ!
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बड़ी मुददत के बाद मिलने वाली थी कैद से आज़ादी;
पर किस्मत तो देखो, जब आज़ादी मिलने वाली थी;
तब तक पिंजरे से प्यार हो चुका था!
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मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही;
वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही;
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो;
सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही!
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खफा न होना हमसे, अगर तेरा नाम जुबां पर आ जाये;
इंकार हुआ तो सह लेंगे और अगर दुनिया हंसी, तो कह देंगे;
कि मोहब्बत कोई चीज़ नहीं, जो खैरात में मिल जाये;
चमचमाता कोई जुगनू नहीं, जो हर रात में मिल जाये;
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हमसे बदल गये वो निगाहें तो क्या हुआ
जिंदा हैं कितने लोग मोहब्बत किये बगैर!
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अजीब खेल है ये मोहब्बत का;
किसी को हम न मिले, कोई हमें ना मिला!
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सोचता हूँ कि अब तेरे दिल में उतर कर देखूं;
कौन है वहां, जो मुझको तेरे दिल में बसने नहीं देता!
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फूल खिलते रहे जिंदगी की राह में;
हंसी चमकती रहे आपकी निगाह में;
कदम कदम पर मिले ख़ुशी की बाहर आपको;
दिल देता है यही दुआ बार-बार आपको;
वेलेंटाइन डे की शुभकामनाए!
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कभी हँसता है प्यार, कभी रुलाता है प्यार;
हर पल की याद दिलाता है यह प्यार;
चाहो या न चाहो पर आपके होने का एहसास दिलाता है ये प्यार;
वेलेंटाइन डे की शुभकामनाए!
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खींच लेती है मुझे उसकी मोहब्बत;
वरना मै बहुत बार मिला हूँ आखरी बार उससे!
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उसने देखा ही नहीं अपनी हथेली को कभी;
उसमे हलकी सी लकीर मेरी भी थी!
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तुम्हारे पास नहीं तो फिर किस के पास है?
वो टुटा हुआ दिल, आखिर गया कहाँ!
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ये डूबने वाले का ही होता हे कोई फन;
आँखों में किसी के भी समंदर नहीं होता!
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दिल की धड़कन और मेरी सदा है वो;
मेरी पहली और आखिरी वफ़ा है वो;
चाहा है उसे चाहत से बड़ कर;
मेरी चाहत और चाहत की इंतिहा है वो!
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तुम मुझे मौका तो दो ऐतबार बनाने का;
थक जाओगे मेरी वफाओं के साथ चलते चलते!
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आज असमान के तारों ने मुझे पूछ लिया;
क्या तुम्हें अब भी इंतज़ार है उसके लौट आने का!
मैंने मुस्कुराकर कहा;
तुम लौट आने की बात करते हो;
मुझे तो अब भी यकीन नहीं उसके जाने का!
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माना आज उन्हें हमारा कोई ख़याल नहीं;
जवाब देने को हम राज़ी है, पर कोई सवाल नहीं!
पूछो उनके दिल से क्या हम उनके यार नहीं;
क्या हमसे मिलने को वो बेकरार नहीं!
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रेत पर नाम कभी लिखते नहीं;
रेत पर नाम कभी टिकते नहीं;
लोग कहते है कि हम पत्थर दिल हैं;
लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं!
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महोब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे;
मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चोका हूँ!
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इश्क के रिश्ते कितने अजीब होते है?
दूर रहकर भी कितने करीब होते है;
मेरी बर्बादी का गम न करो;
ये तो अपने अपने नसीब होते हैं!
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वो खुद पर गरूर करते है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं!
जिन्हें हम चाहते है, वो आम हो ही नहीं सकते!
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कोई ठुकरा दे तू हंस के सह लेना;
मोहब्बत की ताबित में ज़बरदस्ती नहीं होती!
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ये वफ़ा तो उस वक्त की बात है ऐ फ़राज़;
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे!
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कोई अच्छा लगे तो उनसे प्यार मत करना;
उनके लिए अपनी नींदे बेकार मत करना;
दो दिन तो आएँगे खुशी से मिलने;
तीसरे दिन कहेंगे इंतज़ार मत करना!
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कृष्ण ने राधा से पूछा: ऐसी एक जगह बताओ, जहाँ में नहीं हूँ?
राधा ने मुस्कुराके कहा, `बस मेरे नसीब में`!
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चहरे पर हंसी छा जाती है!
आँखों में सुरूर आ जाता है!
जब तुम मुझे अपना कहते हो,
अपने पर गुरुर आ जाता है!
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अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता!
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता!
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का!
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता!
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तुम्हारे नाम को होंठों पर सजाया है मैंने!
तुम्हारी रूह को अपने दिल में बसाया है मैंने!
दुनिया आपको ढूंढते ढूंढते हो जायेगी पागल!
दिल के ऐसे कोने में छुपाया है मैंने!
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मोहब्बत मुझे थी उसी से सनम!
यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा!
मौत भी मेरी चाहत को रोक न सकी!
कब्र में भी यह दिल धड़कता रहा!
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जब तक तुम्हें न देखूं!
दिल को करार नहीं आता!
अगर किसी गैर के साथ देखूं!
तो फिर सहा नहीं जाता!
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इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं!
गम - ऐ - जुदाई से सब डरते हैं
हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत!
हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!
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माना की तुम जीते हो ज़माने के लिये!
एक बार जी के तो देखो हमारे लिये!
दिल की क्या औकात आपके सामने!
हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये!
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उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ!
सामने न सही पर आस-पास हूँ!
पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे!
मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ!
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मोहब्बत ऐसी थी कि उनको दिखाई न दी!
चोट दिल पर थी इसलिए दिखाई न गयी!
चाहते नहीं थे उनसे दूर होना पर!
दुरिया इतनी थी कि मिटाई न गयी!
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प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता!
ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता!
दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की!
उसके बिना जिया नहीं जा सकता!
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इस से पहले कि दिलो में नफरत जागे!
आओ एक शाम मोहब्बत में बिता दी जाये!
करके कुछ मोहब्बत की बातें!
इस शाम की मस्ती बड़ा दी जाये!
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देखो मेरी आँखों में ख्बाब किसका है!
देखो मेरे दिल में तूफ़ान किसका है!
तुम कहते हो मेरे दिल के रास्ते से कोई नहीं गुज़रा!
तो फिर यह पैरों के निशान किसके हैं!
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न कोई सुबह है और न कोई शाम है!
हर लम्हा आपका ही नाम है!
इससे मजाक मत समझ लेना!
यह हमारी तरफ से प्यार का पैगाम है!
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बड़ी मुद्दत से चाहा है तुझे!
बड़ी दुआओं से पाया है तुझे!
तुझे भुलाने की सोचूं भी तो कैसे!
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे!
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कभी-कभी ऐसा भी होता है!
प्यार का असर जरा देर से होता है!
आपको लगता है हम कुछ नहीं सोचते आपके बारे में!
पर हमारी हर बात में आपका ही जिक्र होता है
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फिजा में महकती एक शाम हो तुम!
प्यार में छलकता जाम हो तुम!
सीने में छुपाये फिरते है हम याद तुम्हारी!
मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!
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हर खामोशी का मतलब इंकार नहीं होता!
हर नाकामयाबी का मतलब हार नहीं होता!
तो क्या हुआ अगर हम तुम्हें न पा सके!
सिर्फ पाने का मतलब प्यार नहीं होता!
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क्यों किसी से इतना प्यार हो जाता है!
एक पल का इंतज़ार भी दुश्वार हो जाता है!
लगने लगते है अपने भी पराये!
और एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है!
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हम रूठे तो किसके भरोसे!
कौन है जो आयेगा हमे मनाने के लिए!
हो सकता है तरस आ भी जाये आपको!
पर दिल कहाँ से लायें आपसे रूठ जाने के लिये!
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हमारा हर लम्हा चुरा लिया आपने!
आँखों को एक चाँद दिखा दिया आपने!
हमें ज़िन्दगी तो दी किसी और ने!
पर प्यार इतना देकर जीना सिखा दिया आपने!
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आँखों में तेरी डूब जाने को दिल चाहता है!
इश्क में तेरे बर्बाद होने को दिल चाहता है!
कोई संभाले मुझे, बहक रहे है मेरे कदम!
वफ़ा में तेरी मर जाने को दिल चाहता है!
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इस कदर हम उनकी मुहब्बत में खो गए!
कि एक नज़र देखा और बस उन्हीं के हम हो गए!
आँख खुली तो अँधेरा था देखा एक सपना था!
आँख बंद की और उन्हीं सपनो में फिर सो गए!
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किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नहीं !
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नहीं !
गुनाह हो यह ज़माने की नज़र में तो क्या !
ज़माने वाले कोई खुदा तो नहीं !
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किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है?
जो नहीं मिल सकता उसी से मुहब्बत क्यों है?
कितने खायें है धोखे इन राहों में!
फिर भी दिल को उसी का इंतजार क्यों है?
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कभी किसी से प्यार मत करना!
हो जाये तो इंकार मत करना!
चल सको तो चलना उस राह पर!
वरना किसी की ज़िन्दगी ख़राब मत करना!
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प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता!
ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता!
दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की!
उस के बिना जिया नहीं जा सकता!
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तुझे भूलकर भी न भूल पायेगें हम!
बस यही एक वादा निभा पायेगें हम!
मिटा देंगे खुद को भी जहाँ से लेकिन!
तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम!
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मुहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं!
प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं!
मुद्दतें बीत जाती हैं किसी के इंतज़ार में!
ये सिर्फ पल-दो-पल का काम नहीं!
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जब कोई ख्याल दिल से टकराता है!
दिल न चाह कर भी, खामोश रह जाता है!
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है!
कोई कुछ न कहकर भी, सब बोल जाता है!
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दिल को था आपका बेसबरी से इंतजार!
पलके भी थी आपकी एक झलक को बेकरार!
आपके आने से आयी है कुछ ऐसी बहार!
कि दिल बस मांगे आपके लिये खुशियाँ बेशुमार!
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कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है!
कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है!
पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है
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वो वक़्त वो लम्हे कुछ अजीब होंगे!
दुनिया में हम खुश नसीब होंगे!
दूर से जब इतना याद करते है आपको!
क्या होगा जब आप हमारे करीब होंगे?
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बेताब तमन्नाओ की कसक रहने दो!
मंजिल को पाने की कसक रहने दो!
आप चाहे रहो नज़रों से दूर!
पर मेरी आँखों में अपनी एक झलक रहने दो!
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उगता हुआ सूरज दुआ दे आपको!
खिलता हुआ फूल खुशबू दे आपको!
हम तो कुछ देने के काबिल नहीं है!
देने वाला हज़ार खुशिया दे आपको!
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गम ने हसने न दिया, ज़माने ने रोने न दिया!
इस उलझन ने चैन से जीने न दिया!
थक के जब सितारों से पनाह ली!
नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया!