Dard shayari

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…
कौन कहता है की सिर्फ ‪चोट‬ ही ‪दर्द‬ देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online‬ आके भी Reply‬ नहीं देती…
बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…
तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…
फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता
बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.
तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।
तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ।
तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।
कुछ कदमों के फासले थे, हम दोनों के दरमीयान, उन्हें जमाने ने रोक़ लिया, और हमने अपने आपको।
उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती।
नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।
ये तो ज़मीन की फितरत है की, वो हर चीज़ को मिटा देती हे वरना, तेरी याद में गिरने वाले आंसुओं का, अलग समंदर होता।
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
काश वो भी आकर हम से कह दे मैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए।
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
वो मुजे नफ़रत करें या प्यार करें मैं तो एक दीवाना हूँ…
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
मेरा होकर भी गैर की जागीर लगता है, दिल भी साला मसला-ऐ-कश्मीर लगता है।
ख़ामोशी बहुत कुछ कहती हे कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो।
माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.
इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह… फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?
तेरा नजरिया मेरे नजरिये से अलग था, शायद तूने वक्त गुजारना था और हमे सारी जिन्दगी.
Kitne Dardnak The Wo Manjar Jab Hum Bichade The..Usne Kahaa Tha Jeena Bhi Nahi Or Rona Bhi Nahi.
यूँ तो मशहूर हैं अधूरी मोहब्बत के, किस्से बहुत से,मुझे अपनी मोहब्बत पूरी करके, नई कहानी लिखनी हैं.
वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाव नहीं,हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.
Tumhe Na Pana Shayad Behtar Hai,Paa Ke Phir Se Tumhe Gawane Se.
रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा,तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी.
ज़िन्दगी भी कमाल की हैं, तू गरीबो को महेल के सपने देखाती हैं, जिस में अमीरो को नींद नहीं आती!
रह में चले ये सोच कर के किसीको अपना बनना लेंगे, मगर इस तम्मना ने ज़िन्दगी भर का मुसाफिर बनना दिया!
ज़िन्दगी तु ही बता कैसे तुजसे प्यार करू, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र काम कर देती हैं!
आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!
हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!
तकलीफतो ज़िन्दगी देती हैं, मोतको तो लोगोने यूही बदनाम किया हैं!
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!
में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!
आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!
दर्द दिलो के कम होजाते अगर में और तुम हम होजाते!
सच केह रहा हैं ये दीवाना, दिल्ना किसीसे लगाना!
सच्ची मोहबत तो अक्सर दिलतोड़ने वालीसेही होती हैं!
अब नींदसे कोई वास्ता नहीं! मेरा कौन हैं, ये सोच सोच के रात गुज़र जाती हैं!
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!
इ सितमगर, कदर किया होती हैं तुजे वक़्क़त बताएगा!
साँसोका टूटजाना तो आमबात हैं, जहा अपने बदलजाये मोत तो तब आती हैं!
अगर वो मेरी होजाती, तो में दुन्यकी सारी कितबोसे लफ़्ज़े बेवफा मिटादेता!
सुन रहा हैं ना तू रो रही ही हु में…
जिसकी सजा तुम हो, मुझे एसा गुनाह करना हैं!
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह, फिर हल्का सा मुस्कराया और कहा, मोहब्बत की थी ना
मेरी दिल की दिवार पर तस्वीर हो तेरी _और तेरे हाथों में हो तकदीर मेरी!
वो शाम का दायरा मिटने नहीं देते, हमसे सुबहे का इंतज़ार होता नहीं है.
तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है!
तुम मुझे अच्छे या बुरे नहीं लगते बस अपने लगते हो.
एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये..पर ये कम्ब्खत Dil कभी उनसे रूठा ही नही.
क्या ऐसा नहीं हो सकता हम Pyaar मांगे… और तुम hme गले लगा के कहो, और कुछ?
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में. वो दिल नीलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी.
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभानेकी औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.
किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
वो बोलते रहे हम सुनते रहे, जवाब आँखों में था वो जुबान में ढूंढते रहे.
यूँ गुमसुम मत बैठो पराये से लगते हो, मीठी बातें नहीं करना है तो चलो झगड़ा ही कर लो.
हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.
काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, तुम आ कर गले लगा लो मुझे, मेरी इज़ाज़त के बगैर.
ज़िन्दगी जोकर सी निकली, कोई अपना भी नहीं….कोई पराया भी नहीं.
आने वाला कल अच्छा होगा, बस इसी सोच मे आज बीत जाता है.
मेरी कोशिश हमेशा से ही नाकाम रही पहले तुजे पाने की अब तुजे भुलाने की.
छोड दी हमने हमेशा के लिए उसकी, आरजू करना, जिसे मोहब्बत, की कद्र ना हो उसे दुआओ, मे क्या मांगना.
कहा था ना मैने “सोच लो तुम”, जिन्दगी भर रिश्ते निभाना आसान नहीं होता!
एक मैं हूँ, किया ना कभी सवाल कोई, एक तुम हो, जिसका कोई नहीं जवाब.
बहुत लम्बी ख़ामोशी से ग़ुजरा हूँ मैं किसी से कुछ कहने की तलाश में.
शौक से तोडो दिल मेरा, मुझे क्या परवाह, तुम्ही रहते हो इसमें, अपना ही घर उजाड़ोगे.
मेरी आँखों में आसूं… तुझसे हम दम क्या कहूं क्या है, ठहर जाये तो अंगारा है, बह जाये तो दरिया है.
सिर्फ दिल ही दाव पर लगाया था पर उसने तो मेरी जान ही ले ली.
एक चाहत थी तेरे_संग_जीने_की वरना, मौहब्बत तो किसी से भी हो सकती थी।
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है, मेरा जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है.
चाहने वालो को नही मिलते चाहने वाले. हमने हर दगाबाज़ के साथ सनम देखा है.
मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था, ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया.
सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो.
जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।
मरते तो तुझ पर लाखो होगें, मगर हम तो तेरे साथ मरना चाहते है।
ज़िन्दगी बहुत ख़ूबसूरत है, सब कहते थे। जिस दिन तुझे देखा, यकीन भी हो गया.
आज तो हम खूब रुलायेंगे उन्हें, सुना है उसे रोते हुए लिपट जाने की आदत है!
मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ़ हो जाती है, जब वो मुस्कुरा के पूछती है, नाराज हो क्या?
मोहब्बत किससे और कब हो जाये अदांजा नहीं होता, ये वो घर है, जिसका दरवाजा नहीं होता.
होता अगर मुमकिन, तुझे साँस बना कर रखते सीने में, तू रुक जाये तो मैं नही, मैं मर जाऊँ तो तू नही.
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।
जी भर गया है तो बता दो, हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं।
काश वो भी आकर हम से कह दे मैं भी तन्हाँ हूँ ,तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए।
दिल्लगी कर जिंदगी से, दिल लगा के चल जिंदगी है थोड़ी, थोडा मुस्कुरा के चल.
ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी मंजीले, मेरी अपनी दौड़.
मैंने समुन्दर से सीखा है जीने का सलीका, चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना.
मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग, पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे.
जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता.

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का,
रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है.

ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ,
रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.

फिर नही बसते वो दिल जो एक बार उजड् जाते है,
कब्रे जितनी भी सजा लो पर जिँदा कोई नही होता.

गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ऐ बादल,
ये प्यास किसी की लेने से बुझेगी तेरे बरसने से नहीं.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर,
हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

जरा ठहर ऐ जिंदगी तुझे भी सुलझा दूंगा,
पहले उसे तो मना लूं जिसकी वजह से तू उलझी है.

हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ,
शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं,
क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में,
बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

” इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग
दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..”

तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा,
मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को,
ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है,
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो;
वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.

इस दुनियाँ में सिर्फ बिना स्वार्थ के माँ बाप ही प्यार कर सकते हैं

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया… दुसरा दिजीए… ये तो टुटा हुआ है….!!?!!

कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते, पर अमीर जरूर बना देते हैं.

शाम को थक कर टूटे झोपड़े में सो जाता है वो मजदूर, जो शहर में ऊंची इमारतें बनाता है….

गठरी बाँध बैठा है अनाड़ी, साथ जो ले जाना था वो कमाया ही नहीं

मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ, वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए….

जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है,
मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

Mat puchh kaise guzar rahi hai zindagi,
Uss daur se guzar rahi hu jo guzarta hi nhi

कुछ नहीं है आज मेरे शब्दों के गुलदस्ते में,
कभी कभी मेरी खामोशियाँ भी पढ लिया करो…!!

Mausam ki misaal du ya tumhari,
Koi puchh baitha hai badalna kisko kehte hai

टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया
वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी !!

Hum na pa sake tujhe muddato se chahne ke baad, or
Kisi ne apna bana liya tujhe chnd rasmein nibhane k baad.

Hume soorat se kya matlab hum to seerat pe mrte hai,
Unse kehna tumhara husn dhal jaye toh bhi laut aana…!!

Ye dil hi toh janta hain meri pak mohabbat ka aalam,
Ke mujhe jeenay ke liye sanso ki nahin teri zarurat hain.

मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ,
वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए

कुछ रिशते ऐसे होते हैं..
जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता hai

तरस गए हैं तेरे Muh से कुछ सुनने को हम,
Pyaar की बात न सही कोई शिकायत ही कर दे..!!

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी
खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई

अपनी कमजोरियो का जिक्र कभी न करना
जमाने से लोग कटी पतंग को जम कर लुटा करते हैँ॥

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को,
हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।

पैसे तो ज़िंदगी भर कमा लेंगे
अभी तो दिल जितने की उम्र है हमारी

तेरा नाम था आज किसी अजनबी की जुबान पे,
बात तो जरा सी थी पर दिल ने बुरा मान लिया

लोग बातें दिल की करते है लेकिन,
मोहब्बत आज भी चेहरे से ही शुरू होती है.

मुझे आदत नहीं कहीं बहुत देर तक ठहरने की,
लेकिन जब से तुम से नजरे मिलीे है ये दिल कही और ठहरता नही !!

जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है,
कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।

फिर कोई दुःख मिलेगा तैयार रह,.ऐ दिल !
कुछ लोग पेश आ रहे हैं बहुत प्यार से!

ऐ जिंदगी ख़त्म कर अब ये तमासा♫
मैं थक गया हूँ दिल को तसल्लियाँ देते देते

बिल्कुल जुदा है मेरे महबूब की, सादगी का अंदाज..
नजरे भी मुझ पर है और नफरत भी मुझ ही से…!!

वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपनेमतलब” के लिये,
और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !

कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना,
मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं

जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं,
जिन्हें हम पा नही सकते सिर्फ चाह सकते हैं।

तु चाहे तो मेरे #दिल से #खेल सकती हो…!
लेकिन खिलौना समझ कर #तोड़ना मत…!

सुकुन मिलता है दो लफ्ज कागज पे उतार कर,
चीख भी लेता हू… ओर आवाज भी नही होती…!

खूबियाँ इतनी तो नही हम में कि तुम्हे कभी याद आएँगे पर
इतना तो ऐतबार है हमे खुद पर, आप हमे कभी भूल नही पाएँगे

जान दे देंगे ये हमारे बस मे है,
हम नही करते बात सितारे_तोड़ लाने की

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी,
और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गयी हूँ.

पैसे तो ज़िंदगी भर कमा लेंगे
अभी तो दिल जितने की उम्र है हमारी

Aksar chirag wohi bhujate h … jo pehle usse rosan karte h

Fiqr kar uski jo teri fiqr kare, yu to zindgi me bhut h hamdard

Hum tere bina ab reh nahi sakte tere bina kya wajood mera

Ye dil hi toh janta hain meri pak mohabbat ka aalam,
Ke mujhe jeenay ke liye sanso ki nahin teri zarurat hain…

Log kehte hai ki mohabbat ek bar hoti hain,
Lekin me jb jb use dekhu mujhe hr bar hoti h
Suna hain duaon ki keemat nahi hoti,
Fir bhi karobaar khub chalta hain iska…

Pyar or waar mein sab jayaz hain.

Tumse bichrey to maloom hua k mout koi cheez h ghalib
Zindigi to woh thi jo hum teri mehfil mein guzaar aaye…

Sun raha hain na tu ro raha hu main

Koyi mujhko yu mila hain jaise banjaare ko ghar

Raat bhar jalta raha yeh dil usi ki yaad mein..
Samajh nhi aata dard pyar krne se hota hya yad krne se

Waqt atcha ho to aapki galti bhi mazak lgti hai
Or waqt khrab ho to mazak bhi galti ban jati hain…..

Dil ko zubaan, aankhon ko sapne mil gaye

Salo lag jate pyar wale jakham bharne mein

Mujhe maar hi na dale in badlon ki sazish,
Ye jb se baras rahe hain tum yaad aa rhe ho.

Ye husn-e mosam, ye barish, ye hawayein,
Lgta hai mohabbat ne aaj kisi ka sath diya hai

Is barish k mausam me ajeeb si kashish h
Na chahte hue bhi koi shidat se yaad aata hai.

Ek Din Atitude Hum Bhe Dikhaynge.
Jee Bhar Ke Sab ko Hum Bhe Rulaynge.
Paidal Chal Rahe Honge Dost Sare
Aur Hum Aaram Se Kandho Pe Let Kar jayenge…
Dil Ne Jo Chaha Aaj Tak Naa Paaya,
Jhooti Muskan Se Humne Hmesha Gum Chupaya…!!

a Jane Aap Par Itna Yaken Kyu
Hai Aap Ka Khyal Bhi Itna
Haseen Kyu Hai, Suna H Pyar Ka
Dard Meetha Hota Htoh Phir Aankh
Se Nikla Aansu Namkeen Kyu Hai.

Jis Din Band Ho Jayengi Humari
Aankhe, Uss Din Kayi Aankho Me
Aansu Aa Jayenge, Jo Kehte Hai
Bahut Bolte Hai Hum, Dekhna Ek Din
Wahi Humari Sunne Ko Taras Jayenge.

Pahli Nazar Mai Hi Unse Pyar Ho
Gya, Usne Kuch Kahunga Ye
Sochata Hi Rah Gya, Jab
Aai Bari Pyar Ka Izhar Karne
Ki, Tab Tak Unke Dil Par Kisi
Aur Ke Pyar Ka Jadu Chal Gya.

Har Dil Me Dard Chupa Hota He,
Byan Karne Ka Andaz Juda Hota
He, Kuch Log Aankho Me Dard
Bata Dete He, Aur Kisi Ka
Dard Hassi Me Chupa Hota Hai.

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न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की;
अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की!
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कुछ दिल में, कुछ कागजों पर किस्से आबाद रहे;
कैसे भूले उन्हें, जो हर धडकनों में याद रहे!
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कसूर मेरा था तो कसूर उनका भी था;
नज़र हमने जो उठाई थी तो वो झुका भी सकते थे!
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ये अलग बात है दिखाई न दे मगर शामिल ज़रूर होता है;
खुदकुशी करने वाले का भी कोई न कोई कातिल जरूर होता है!
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किसी ने कहा था मोहब्बत फूल जैसी है;
कदम रुक गये आज जब फूलों को बाजार में बिकते देखा!
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वो पत्थर कहाँ मिलता है बताना जरा ए दोस्त;
जिसे लोग दिल पर रखकर एक दूसरे को भूल जाते हैं!
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मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालो जरा ये तो बताओ;
जिस भीड़ में तुम खडे हो उसमें कौन तुम्हारा है!
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कहने की तलब नहीं कुछ बस;
तुम्हारे आस-पास होने की ख़्वाहिश है!
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कल तक उड़ती थी जो मुँह तक आज पैरों से लिपट गई;
चंद बूँदे क्या बरसी बरसात की धूल की फ़ितरत ही बदल गई!
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किसी ने यूँ ही पूछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है;
हमने हँसते हुए कहा, पता नहीं कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।
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ढूंढोगे कहाँ मुझको, मेरा पता लेते जाओ;
एक कबर नयी होगी एक जलता दिया होगा!
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रोज़ जले, फिर भी खाक न हुए;
अजीब है कुछ ख्वाब भी, बुझ कर भी न राख हुए!
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शतरंज खेलते रहे वो हमसे कुछ इस कदर;
कभी उनका इश्क़ मात देता तो कभी उनके लफ्ज़!
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तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में एक बार;
दर्द हो तो समझ लेना मोहब्बत अभी बाकी है!
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कल तुझसे बिछड़ने का फैसला कर लिया था;
आज अपने ही दिल को रिश्वत दे रहा हूँ!
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किसको बर्दाश्त है खुशी आजकल;
लोग तो दूसरों की अंतिम यात्रा की भीङ देखकर भी जल जाते हैं!
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⁠⁠⁠मेरी शायरी को इतनी शिद्दत से ना पढा करो;
गलती से कुछ समझ आ गया तो बेमतलब उलझ जाओगे!
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और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा;
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना!
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एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए;
दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए!
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समझौतों की भीड़-भाड़ में सबसे रिश्ता टूट गया;
इतने घुटने टेके हमने, आख़िर घुटना टूट गया;
देख शिकारी तेरे कारण एक परिन्दा टूट गया;
पत्थर का तो कुछ नहीं बिगड़ा, लेकिन शीशा टूट गया!
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बदल जाते हैं वो लोग वक्त की तरह;
जिन्हें हद से ज्यादा वक्त दिया जाता है!
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बरसों से कायम है इश्क़ अपने उसूलों पर;
ये कल भी तकलीफ देता था और ये आज भी तकलीफ देता है!
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कुछ मीठा सा नशा था उसकी झुठी बातों में;
वक्त गुज़रता गया और हम आदी हो गये!
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मेरी मौत पे किसी को अफ़सोस हो न हो ऐ दोस्त;
पर तन्हाई रोएगी कि मेरा हमसफर चला गया!
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शायद उम्मीदें ही होती हैं ग़म की वजह;
वरना ख़्वाहिशें रखना कोई गुनाह नही!
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ये तो अच्छा है कि दिल सिर्फ सुनता है;
अगर कहीं बोलता होता तो क़यामत आ जाती।!
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सिर्फ एक मोहब्बत की रौशनी ही बाकी है,
वर्ना जिस तरफ देखो दूर तक अँधेरा है।
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मैं उस का हूँ, ये राज़ तो वो जान गया है;
वो किस का है ये सवाल मुझे सोने नहीं देता।
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ना जाने वो कौन तेरा हबीब होगा;
तेरे हाथों में जिसका नसीब होगा;
कोई तुम्हें चाहे ये कोई बड़ी बात नहीं;
लेकिन तुम जिसको चाहो, वो खुश नसीब होगा!
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हम भी कभी मुस्कुराया करते थे;
उजाले में भी शोर मचाया करते थे;
उसी दिये ने जला दिया मेरे हाथों को;
जिस दिये को हम हवा से बचाया करते थे।
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कितने ही बरसों का सफर खाक हुआ;
उसने जब पूछा कहो कैसे आना हुआ!
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मैं नहीं इतना घाफिल कि अपने चाहने वालों को भूल जाऊं;
पीता ज़रूर हूँ लेकिन थोड़ी देर यादों को सुलाने के लिए!
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नाजुक लगते थे, जो हसीन लोग;
वास्ता पड़ा तो, पत्थर के निकले!
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मेरी मौत पे किसी को अफ़सोस हो न हो;
ऐ दोस्त पर तन्हाई रोएगी कि मेरा हमसफर चला गया!
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आँसू निकल पडे ख्वाब में उसको दूर जाते देखकर;
आँख खुली तो एहसास हुआ इश्क सोते हुए भी रुलाता है!
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मुस्कुराते इंसान की कभी जेबें टटोलना;
हो सकता है रुमाल गीला मिले!
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कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने;
कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने!
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जख्म तो हम भी अपने दिल में तुमसे गहरे रखते हैं;
मगर हम जख्मों पे मुस्कुराहटों के पहरे रखते हैं!
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निकले हम दुनिया की भीड़ में तो पता चला;
कि हर वह शख्स अकेला है जिसने मोहब्बत की है!
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जी भरके रोते हैं तो करार मिलता है;
इस जहान में कहाँ सबको प्यार मिलता है;
जिंदगी गुजर जाती है इम्तिहानों के दौर से;
एक जख्म भरता है तो दूसरा तैयार मिलता है।
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ये जो हालात हैं यकीनन एक दिन सुधर जायेंगे;
पर अफसोस के कुछ लोग दिलों से उतर जायेंगे!
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कुछ ऐसे हो गए हैं, इस दौर के रिश्ते;
जो आवाज़ तुम ना दो, तो बोलते वो भी नहीं!
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किसी को इतना भी ना चाहो कि, भुलाना मुश्किल हो जाए;
क्योंकि जिंदगी, इन्सान, और मोहब्बत तीनो बेवफा है!
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वक्त इशारा देता रहा हम इत्तेफाक़ समझते रहे;
बस यु ही धोखे खाते रहे ओर इस्तेमाल होते रहे!
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कौन चाहता है खुद को बदलना;
किसी को प्यार तो किसी को नफरत बदल देती है!
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कैसे छोड़ दूँ आखिर, तुमसे मोहब्बत करना,
तुम किस्मत में ना सही, दिल में तो हो!
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बेजुबां महफिल में शोर होने लगा;
ना जाने कौन पढ़ गया खामोशी मेरी!
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संगदिलों की दुनिया है ये, यहाँ सुनता नहीं फ़रियाद कोई;
यहाँ हँसते हैं लोग तभी, जब होता है बरबाद कोई!
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इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है;
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर!
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मत पूछो की कैसा हूँ मैं;
कभी भूल ना पाओगे वैसा हूँ मैं!
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फिर नहीं बसते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते है;
कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता!
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वो शमां की महफिल ही क्या, जिसमें दिल खाक ना हो;
मजा तो तब है चाहत का, जब दिल तो जले पर राख ना हो!
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ज़िंदा रहने की बस, अब ये तरकीब निकाली है;
ज़िंदा होने की खबर, बस सब से छुपा ली है!
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तुम्हारा दबदबा ख़ाली तुम्हारी ज़िंदगी तक है;
किसी की क़ब्र के अन्दर ज़मींदारी नही चलती!
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गुज़रते लम्हों में सदियाँ तलाश करतl हूँ;
ये मेरी प्यास है,नदियाँ तलाश करतl हूँ;
यहाँ लोग गिनाते है खूबियां अपनी;
मैं अपने आप में खामियां तलाश करतl हूँ!
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इक रात में सौ बार जला और बुझा हूँ;
मुफ़्लिस का दिया हूँ मगर आँधी से लड़ा हूँ!
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किसी के जख़्म का मरहम, किसी के ग़म का इलाज़;
लोगों ने बाँट रखा है, मुझे दवा की तरह!
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आज़मा ले मुझको थोडा और ए खुदा;
तेरा बंदा बस बिखरा है अभी तक टूटा नही!
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हमें तो प्यार के दो लफ्ज ही नसीब नहीं,
और बदनाम ऐसे जैसे इश्क के बादशाह थे हम।
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जीतने का दिल ही नहीं करता अब मेरे दोस्त,
एक शख्स को जब से हारा हूँ मैं।
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आज कुछ नहीं है मेरे शब्दों के गुलदस्ते में ऐ दोस्त,
कभी-कभी मेरी ख़ामोशियाँ भी पढ़ लिया करो।
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तुम ने तो सोचा होगा, मिल जायेंगे बहुत चाहने वाले,
ये भी ना सोचा कभी कि, फर्क होता है चाहतों में भी।
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एक अज़ीब सा रिश्ता है मेरे और ख्वाहिशों के दरमियाँ,
वो मुझे जीने नही देतीं और मैं उन्हें मरने नही देता।
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मुझे छोड़कर वो खुश हैं, तो शिकायत कैसी;
अब मैं उन्हें खुश भी न देखूं तो मोहब्बत कैसी।
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चैन से रहने का हमको मशवरा मत दीजिये,
अब मजा देने लगी है जिन्दगी की मुश्किलें।
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अल्फ़ाज़ चुराने की ज़रूरत ही ना पड़ी कभी;
तेरे बे-हिसाब ख्यालों ने बे-तहाशा लफ्ज़ दिए।
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किस ख़त में लिख कर भेजूं अपने इंतज़ार को तुम्हें;
बेजुबां हैं इश्क़ मेरा और ढूंढता है ख़ामोशी से तुझे।
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इश्क़ में हमने वही किया जो फूल करते हैं बहारों में;
खामोशी से खिले, महके और फिर बिखर गए।
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खुशनसीब हैं बिखरे हुए यह ताश के पत्ते;
बिखरने के बाद उठाने वाला तो कोई है इनको।
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कभी थक जाओ तुम दुनिया की महफ़िलों से,
हमें आवाज़ दे देना, हम अक्सर अकेले होते हैं।
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हमने कब माँगा है तुमसे वफाओं का सिलसिला;
बस दर्द देते रहा करो, मोहब्बत बढ़ती जायेगी।
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भरे बाज़ार से अक्सर मैं ख़ाली हाथ आता हूँ,
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते।
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कहाँ माँग ली थी कायनात मैंने, जो इतना दर्द मिला;
ज़िन्दगी में पहली बार खुदा तुझसे ज़िन्दगी ही तो मांगी थी।
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डूबी हैं मेरी उँगलियाँ मेरे ही खून में,
ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है।
----------
दर्द सहने की इतनी आदत सी हो गई है,
कि अब दर्द ना मिले तो बहुत दर्द होता है।
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तन्हा हुए तो एहसास हुआ,
कि कई घंटे होते है एक दिन में।
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छुपाने लगा हूँ आजकल कुछ राज अपने आप से;
सुना है कुछ लोग मुझको मुझसे ज्यादा जानने लगे हैं।
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वो मुस्कान थी, कहीं खो गयी;
और मैं जज्बात था कहीं बिखर गया।
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तू हवा के रुख पे चाहतों का दिया जलाने की ज़िद न कर;
ये क़ातिलों का शहर है यहाँ तू मुस्कुराने की ज़िद न कर।
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कुछ रूठे हुए लम्हें कुछ टूटे हुए रिश्ते,
हर कदम पर काँच बन कर जख्म देते हैं।
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लहरें टकरातीं हैं मुझ से और लौट जाती हैं;
कभी सूखा किनारा रहा होता एक सजदा सहारा रहा होता।
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हजारों हैं मेरे अल्फाज के दीवाने;
मेरी खामोशी सुनने वाला कोई होता तो क्या बात थी।
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बूँद बूँद टपकती हैं तेरी ज़ुल्फ़ों से बारिशें;
क़तरा क़तरा गिरती हैं मेरे छलनी दिल से ख़्वाहिशें।
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ख्यालों में तेरी तस्वीर रख कर चूम लेता हूँ,
हथेली पर तुम्हारा नाम लिख कर चूम लेता हूँ;
तुम्हारे आँख के आँसू जो मुझ को याद आते हैं,
तो मैं चुपके से खुद आँसू बहाकर चूम लेता हूँ।
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तकलीफ़ मिट गयी मगर एहसास रह गया;
ख़ुश हूँ कि कुछ न कुछ तो मेरे पास रह गया।
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एक कहानी सी दिल पर लिखी रह गयी,
वो नज़र जो मुझे देखती रह गयी;
लोग आ कर बाजार में बिक भी गए,
मेरी कीमत लगी की लगी रह गयी।
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हम तो बने ही थे तबाह होने के लिए;
तेरा छोड़ जाना तो महज़ एक बहाना बन गया।
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जिनकी दास्ताँ सुन हम गुजर गए,
वो फिर अपनी साँसों का झोला भर लाये।
----------
वो अक्सर मुझ से पूछा करती थी, तुम मुझे कभी छोड़ कर तो नहीं जाओगे,
आज सोचता हूँ कि काश मैंने भी कभी पूछ लिया होता।
----------
दिल से खेलना हमें आता नहीं,
इसलिए इश्क की बाज़ी हम हार गए;
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें,
इसलिए जिंदा ही मुझे वो मार गए।
----------
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया में अपने,
फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए।
----------
सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से,
या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता।
----------
जिंदगी अजनबी मोड़ पर ले आई है,
तुम चुप हो मुझ से और मैँ चुप हूँ सबसे।
----------
ना शाखों ने पनाह दी, ना हवाओं ने बक्शा,
पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता।
----------
हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो,
नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे।
----------
बड़ा फर्क है तेरी और मेरी मोहब्बत में,
तू परखता रहा और हमने ज़िंदगी यकीन में गुजार दी।
----------
खुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने,
बस एक शख्स को मांगा मुझे वही ना मिला।
~ Bashir Badr
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ऐसा नहीं कि दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी,
पर हाथो में तेरे नाम की लकीर नहीं थी।
----------
चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें,
दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का।
----------
यादें करवट बदल रही हैं दूर तलक मैं तन्हाँ हूँ,
वक़्त भी जिससे रूठ गया है मैं वो बेबस लम्हा हूँ।
----------
जब भी करीब आता हूँ बताने के लिए;
जिंदगी दूर कर देती है सताने के लिए;
महफ़िलों की शान न समझना मुझे;
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिए।
----------
गम किस को नहीं तुझको भी है मुझको भी है,
चाहत किसी एक की तुझको भी है मुझको भी है।
----------
ये कह कर खुदा ने कर दिया हर गुनाह से आज़ाद मुझे,
कि तू तो पहले से ही मोहब्बत किये बैठा है, अब इस से बड़ी कोई और सजा मेरे पास नही।
----------
नाम उसका ज़ुबान पर, आते आते रुक जाता है;
जब कोई मुझसे मेरी, आखिरी ख्वाहिश पूछता है।
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बहुत खूब है यूँ आपका शब्दों में मुझे लिखना,
वरना तो सबने मुझे सदा बेजुबां ही माना है।
----------
रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी,
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है।
----------
मुझे तो आज पता चला कि मैं किस क़दर तनहा हूँ,
पीछे जब भी मुड़ कर देखता हूँ तो मेरा साया भी मुँह फेर लेता है।
----------
ज़र्रा ज़र्रा जल जाने को हाज़िर हूँ,
बस शर्त है कि वो आँच तुम्हारी हो।
----------
उसकी जीत से होती है ख़ुशी मुझको,
यही जवाब मेरे पास अपनी हार का था।
----------
तमाम उम्र उम्मीद-ए-बहार में गुजरी,
बहार आई तो पैगाम मौत का लाई।
----------
सौ बार कहा दिल से कि भूल जा उसको,
हर बार दिल कहता है कि तुम दिल से नही कहते।
----------
मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं,
कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।
----------
कितनी जल्दी थी उसको रूठ जाने की,
आवाज़ तक न सुनी दिल के टूट जाने की।
----------
हमारे दिल से आज धुआँ निकल रहा है,
लगता है उसने मेरे ख्वाबों को जला डाला है।
----------
वो अपने ही होते हैं जो लफ्जों से मार देते हैं,
वरना गैरों को क्या खबर कि दिल किस बात पे दुखता है।
----------
दिल अब पहले सा मासूम नहीं रहा,
पत्थर तो नहीं बना मगर अब मोम भी नहीं रहा।
----------
ख़ुशी तक्दीरों में होनी चाहिए,
तस्वीरों में तो हर कोई खुश नज़र आता है।
----------
हमें देख कर जब उसने मुँह मोड लिया,
एक तसल्ली सी हो गयी कि चलो पहचानती तो है।
----------
मोहब्बत से, इनायत से, वफ़ा से चोट लगती है;
बिखरता फूल हूँ, मुझको हवा से चोट लगती है;
मेरी आँखों में आँसू की तरह इक रात आ जाओ,
तकल्लुफ़ से, बनावट से, अदा से चोट लगती है।
~ Bashir Badr
----------
हँस कर कबूल क्या करलीं सजाएँ मैंने,
ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया, हर इलज़ाम मुझ पर लगाने का।
----------
मिला के खाक में मुझको वो इस अंदाज़ में बोले,
मिट्टी का खिलौना था, कहाँ रखने के काबिल था।
----------
आसान नहीं है शायर बनना दोस्तो,
शब्द जोड़ने से पहले दिल टूटना ज़रूरी है।
----------
मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ,
कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है।
----------
इस तरह मिली वो मुझे सालों के बाद,
जैसे हक़ीक़त मिली हो ख्यालों के बाद,
मैं पूछता रहा उस से ख़तायें अपनी,
वो बहुत रोई मेरे सवालों के बाद।
----------
मुझे तो आज पता चला कि मैं किस क़दर तनहा हूँ,
पीछे जब भी मुड़ कर देखता हूँ तो मेरा साया भी मुँह फेर लेता है।
----------
रात को कह दो, कि जरा धीरे से गुजरे;
काफी मिन्नतों के बाद, आज दर्द सो रहा है।
----------
छोड़ दिया मुझको आज मेरी मौत ने यह कह कर,
हो जाओ जब ज़िंदा, तो ख़बर कर देना।
----------
जब तक था दम में दम न दबे आसमाँ से हम,
जब दम निकल गया तो ज़मीं ने दबा लिया।
~ Abid Jalalpuri
----------
चिलम को पता है अंगारों से आशिकी का अंजाम,
दिल में धुआँ और दामन में बस राख ही रह जाएगी।
----------
नींद भी नीलाम हो जाती है बाजार-ए-इश्क़ में,
इतना आसान भी नहीं किसी को भूल कर सो जाना।
----------
क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब;
ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, 'मोहब्बत' की है इसने।
----------
तजुर्बा एक ही काफी था बयान करने के लिए,
मैंने देखा ही नहीं इश्क़ दोबारा करके।
----------
आँखों की कतारों में पसरी नमी सी है,
आज सब कुछ है ज़िन्दगी में बस तुम्हारी कमी सी है।
~ Aks
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धुआँ धुआँ जला था दिल धीमे धीमे गुबार उठा,
राख के उस ढेर में बिखरा हुआ एक ख्वाब मिला।
----------
ना किया कर अपने दर्द को शायरी में ब्यान ऐ नादान दिल,
कुछ लोग टूट जाते हैं इसे अपनी दास्तान समझकर।
----------
मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं,
कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।
----------
हालात ने तोड़ दिया हमें कच्चे धागे की तरह,
वरना हमारे वादे भी कभी ज़ंजीर हुआ करते थे।
----------
मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी;
उस दौर से गुज़र रहा हूँ जो गुज़रता ही नहीं।
----------
ज़िद मत किया करो मेरी दास्तान सुनने की
मैं हँस कर कहूँगा तो भी तुम रोने लगोगे।
----------
बहुत ज़ालिम हो तुम भी, मोहब्बत ऐसे करते हो;
जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।
----------
मोहब्बत की तलाश में निकले हो तुम अरे ओ पागल,
मोहब्बत खुद तलाश करती है जिसे बर्बाद करना हो।
----------
रोज़ सोचा है भूल जाऊँ तुझे,
फिर रोज़ ये बात भूल जाता हूँ।
----------
अग़र मोहब्बत नही थी तो फक़त एक बार बताया तो होता,
ये कम्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशी को इश्क़ समझ बैठा।
----------
लोग कहते है हर दर्द की एक हद होती है,
कभी मिलना हमसे हम वो हद अक्सर पार करके जाते हैं।
----------
उसे उड़ने का शौक था और हमें उसके प्यार की कैद पसंद थी,
वो शौक पूरा करने उड़ गयी जो आखिरी सांस तक साथ देने को रजामंद थी।
----------
मेरी रूह गुलाम हो गई है तेरे इश्क़ में शायद,
वरना यूँ छटपटाना मेरी आदत तो ना थी।
----------
अब ये न पूछना कि ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ,
कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के, कुछ अपनी सुनाता हूँ।
----------
जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं,
वो आये न आये हम इंतज़ार करते हैं,
झूठा ही सही मेरे यार का वादा है,
हम सच मान कर ऐतबार करते हैं ।
----------
नया कुछ भी नहीं हमदम, वही आलम पुराना है;
तुम्हीं को भुलाने की कोशिशें, तुम्हीं को याद आना है।
----------
सुना है आज उस की आँखों मे आँसू आ गए,
वो किसी को सिखा रही थी कि मोहब्बत कैसे लिखते है।
----------
पूछते है सब जब बेवफा था वो तो उसे दिल दिया ही क्यों था,
किस किस को बतलाये कि उस शख्स में बात ही कुछ ऐसी थी
कि दिल नहीं देते तो कमबख्त जान चली जाती।
----------
अधूरी मोहब्बत मिली तो नींदें भी रूठ गयी,
गुमनाम ज़िन्दगी थी तो कितने सुकून से सोया करते थे।
----------
इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग,
दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग।
----------
मोहब्बत की मिसाल में बस इतना ही कहूँगा,
बेमिसाल सज़ा है किसी बेगुनाह के लिए।
----------
महफिल में हँसना मेरा मिजाज बन गया,
तन्हाई में मेरा रोना भी एक राज बन गया,
दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,
यही मेरे जीने का एक अंदाज़ बन गया।
----------
ज़मीं के नीचे धड़कता है कोई टूटा दिल,
यूँ ही नहीं आते ये तेज़ जलज़ले।
----------
टूटी चीजों का मैं भरोसा नहीं करता मगर,
दिल तो अब भी कहता है कि तुम मेरे हो।
----------
मोहब्बत की तलाश में निकले हो तुम अरे ओ पागल, मोहब्बत खुद तलाश करती है जिसे बर्बाद करना हो।
----------
तूने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया,
कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ,
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है,
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।
----------
मुस्कुराने की आदत कितनी महंगी पड़ी मुझे,
याद करना ही छोड़ दिया उसने ये सोचकर कि मैं बहुत खुश हूँ।
----------
जरुरी नही कि कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाये,
लहजा बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है।
----------
दर्द कभी कम नही होता ऐ सनम,
बस सहने की आदत सी हो जाती है।
----------
किसे सुनाएँ अपने गम के चन्द पन्नों के किस्से,
यहाँ तो हर शख्स भरी किताब लिए बैठा है।
----------
कितना कुछ जानता होगा वो शख्स मेरे बारे में;
मेरे मुस्कुराने पर भी जिसने पूछ लिया कि तुम उदास क्यों हो।
----------
एक नाम क्या लिखा तेरा साहिल की रेत पर,
फिर उम्र भर लहरों से मेरी दुश्मनी हो गयी।
----------
कितने मज़बूर हैं हम तकदीर के हाथो,
ना तुम्हे पाने की औकात रखतेँ हैँ, और ना तुम्हे खोने का हौसला।
----------
दिल को हल्का कर लेता हूँ लिख-लिख कर,
लोग समझते हैं मैं शायर हो गया हूँ।
----------
ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं,
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं,
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको,
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत हैं।
----------
रोज़ आता है मेरे दिल को तस्सली देने,
ख्याल-ए-यार को मेरा ख्याल कितना है।
----------
मिल जाएँगे हमारी भी तारीफ़ करने वाले,
कोई हमारी मौत की अफ़वाह तो फैलाओ यारों।
----------
जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं,
जिन्हें हम पा नही सकते सिर्फ चाह सकते हैं।
----------
हम वो ही हैं, बस जरा ठिकाना बदल गया हैं अब,
तेरे दिल से निकल कर, अपनी औकात में रहते हैं।
----------
अगर एहसास बयां हो जाते लफ्जों से,
तो फिर कौन करता तारीफ खामोशियों की।
----------
मोहब्बत कितनी भी सच्ची क्यों ना हो,
एक ना एक दिन तो आंसू और दर्द ज़रूर देती है।
----------
अजीब किस्सा है जिन्दगी का,
अजनबी हाल पूछ रहे हैं और अपनो को खबर तक नहीं।
----------
टूटे हुए काँच की तरह चकनाचूर हो गए,
किसी को लग ना जाये इसलिए सबसे दूर हो गए।
----------
तुम्हारा और मेरा इश्क है ज़माने से कुछ जुदा
एक तुम्हारी कहानी है लफ्जों से भरी एक मेरा किस्सा है ख़ामोशी से भरा।
----------
थोड़ा और बताओ ना मुझे मेरे बारे में,
सुना है बहुत अच्छे से जानते हो तुम मुझे।
----------
जब किसी ने पूछा हमसे कैसी है अब जिंदगी,
हमने भी मुस्कुरा कर कह दिया खुश है अब वो हमसे जुदा होकर।
----------
अनजान सी राहों पर चलने का तजुर्बा नहीं था,
पर उस राह ने मुझे एक हुनरमंद राही बना दिया।
----------
किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो,
रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते नहीं आते।
----------
करूँगा क्या जो हो गया नाकाम मोहब्बत में,
मुझे तो कोई और काम भी नहीं आता इसके सिवा।
----------
तेरी महफ़िल से दिल कुछ और तनहा होके लौटा है,
ये लेने क्या गया था और क्या घर लेके आया है।
----------
तेरी चाहत में हम रुस्वा सर ए बाजार हो गए,
हमने ही दिल खोया हम ही गुनहगार हो गए।
----------
उम्र कैद की तरह होते हैं कुछ रिश्ते,
जहाँ ज़मानत देकर भी रिहाई मुमकिन नहीं।
----------
डूबी हैं मेरी उँगलियाँ मेरे ही खून में,
ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है।
----------
सिखा ना सकी जो उम्र भर तमाम किताबें मुझे,
फिर करीब से कुछ चेहरे पढ़े और ना जाने कितने सबक सीख लिए।
----------
कोई मुझ सा मुस्तहके़-रहमो-ग़मख़्वारी नहीं,
सौ मरज़ है और बज़ाहिर कोई बीमारी नही;
इश्क़ की नाकामियों ने इस तरह खींचा है तूल,
मेरे ग़मख़्वारों को अब चाराये-ग़मख़्वारी नही।
~ Nazar Lakhnawi
----------
पतंग सी है ज़िन्दगी कहाँ तक जाएगी,
रात हो या उम्र एक ना एक दिन कट ही जाएगी।
----------
काँच जैसा बनने के बाद पता चलता है कि,
उसको टूटना भी उसी की तरह पड़ता है।
----------
जब्त कहता है ख़ामोशी से बसर हो जाये,
दर्द की ज़िद्द है कि दुनिया को खबर हो जाये।
----------
ना वो मिलती है ना मैं रुकता हूँ,
पता नहीं रास्ता गलत है या मंज़िल।
----------
हम मरीज इश्क़ के वो भी थे हकीम-ए-दिल,
दीदार की दवा दी कुछ पल के लिए फिर दर्द की पुड़िया बांध दी।
----------
भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें;
आ मेरे दिल मेरे ग़म-ख़्वार कहीं और चलें।
~ Aitbar Sajid
----------
उसकी पलकों से आँसू को चुरा रहे थे हम,
उसके ग़मो को हंसीं से सजा रहे थे हम,
जलाया उसी दिये ने मेरा हाथ,
जिसकी लो को हवा से बचा रहे थे हम।
----------
जिसके नसीब मे हों ज़माने भर की ठोकरें,
उस बदनसीब से ना सहारों की बात कर।
----------
तलाश में बीत गयी सारी ज़िंदगानी ए दिल,
अब समझा कि खुद से बड़ा कोई हमसफ़र नहीं होता।
----------
अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ,
वीरानियाँ तो सब मेरे दिल में उतर गईं।
~ Kaifi Azmi
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तुझे भूलकर भी ना भूल पायेंगे हम,
बस यही एक वादा निभा पायेंगे हम।
----------
आज तो मिल के भी जैसे न मिले हों तुझ से,
चौंक उठते थे कभी तेरी मुलाक़ात से हम।
~ Jaan Nisar Akhtar
----------
अपने क़दमों के निशान मेरे रास्ते से हटा दो,
कहीं ये ना हो कि मैं चलते चलते तेरे पास आ जाऊं।
----------
तेरी बातो मे ज़िक्र मेरा, मेरी बातो मे ज़िक्र तेरा;
अजब सा ये इश्क है ना तू मेरा ना मै तेरा।
----------
कुछ दिन तो अपनी यादें वापस ले ले हरजाई,
बड़े दिनों से मैं सोया नही।
----------
लगा कर आग सीने में चले हो तुम कहाँ,
अभी तो राख उड़ने दो तमाशा और भी होगा।
----------
हम ख़ास तो नहीं मगर बारिश की उन कतरों की तरह अनमोल हैं,
जो मिट्टी में समां जायें तो फिर कभी नहीं मिला करते।
----------
खतम हो गई कहानी, बस कुछ अलफाज बाकी हैं;
एक अधूरे इश्क की एक मुकम्मल सी याद बाकी है।
----------
नही है हमारा हाल, कुछ तुम्हारे हाल से अलग;
बस फ़र्क है इतना, कि तुम याद करते हो,
और हम भूल नही पाते।
----------
उस दिल की बस्ती में आज अजीब सा सन्नाटा है,
जिस में कभी तेरी हर बात पर महफिल सजा करती थी।
----------
बारिश में रख दो इस जिंदगी के पन्नों को, ताकि धुल जाए स्याही,
ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी - कभी।
----------
ये जो खामोश से अल्फाज़ लिखेे हैं ना,
पढना कभी ध्यान से चीखते कमाल हैं।
----------
ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो दर्द की तुम शिद्दत,
दर्द तो दर्द होता हैं, थोड़ा क्या और ज्यादा क्या।
----------
पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,
दिल में क्या है वो बात नही समझती,
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है,
पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती।
----------
कौन चाहता है खुद को बदलना,
किसी को प्यार तो किसी को नफरत बदल देती है।
----------
परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ;
अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था।
~ Mumtaz Rashid
----------
फुर्सत किसे है ज़ख्मों को सरहाने की;
निगाहें बदल जाती हैं अपने बेगानों की;
तुम भी छोड़कर चले गए हमें;
अब तम्मना न रही किसी से दिल लगाने की।
----------
ना कोई एहसास हैं, ना कोई जज्बात हैं;
बस एक रूह हैं, और कुछ अनकहे अल्फाज हैं।
----------
बेगाना हमने नहीं किया किसी को,
जिसका दिल भरता गया वो हमें छोड़ता गया।
----------
आज अचानक तेरी याद ने मुझे रुला दिया,
क्या करूँ तुमने जो मुझे भुला दिया,
न करती वफ़ा न मिलती ये सज़ा,
शायद मेरी वफ़ा ने ही तुझे बेवफा बना दिया।
----------
कभी कोई अपना अनजान हो जाता है,
कभी अनजान से प्यार हो जाता है,
ये जरुरी नही कि जो ख़ुशी दे उसी से प्यार हो,
दिल तोड़ने वालो से भी प्यार हो जाता है।
----------
ना जाने क्या कहा था डूबने वाले ने समंदर से,
कि लहरें आज तक साहिल पे अपना सर पटकती हैं।
----------
मुझमें और तवायफ में फर्के फक्त है इत्ता,
वो शब निकले, मैं सुब से निकलूँ साज़ो श्रृंगार में।
~ Raaz Dadwal
----------
ग़म वो मय-ख़ाना कमी जिस में नहीं;
दिल वो पैमाना है जो कभी भरता ही नहीं।
----------
मेरी फितरत मे नही है किसी से नाराज होना,
नाराज वो होते है जिनको अपने आप पर गुरुर होता है।
----------
बिछड़ के तुम से ज़िन्दगी सज़ा लगती है;
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;
तड़प उठता हूँ दर्द के मारे मैं;
ज़ख्मो को मेरे जब तेरे शहर की हवा लगती है।
----------
आयें हैं उसी मोड पे लेकिन अपना नही यहाँ अब कोई;
इस शहर ने इस दीवाने को ठुकराया है बार-बार,
माना कि तेरे हुस्न के काबिल नही हूँ मैं,
पर यह कमबख्त इश्क तेरे दर पे हमें लाया है बार-बार।
----------
जाने क्या था जाने क्या है जो मुझसे छूट रहा है,
यादें कंकर फेंक रही हैं और दिल अंदर से टूट रहा है।
----------
कभी संभले तो कभी बिखरते आये हम;
जिंदगी के हर मोड़ पर खुद में सिमटते आये हम;
यूँ तो जमाना कभी खरीद नहीं सकता हमें;
मगर प्यार के दो लफ्जो में सदा बिकते आये हम;
----------
कितना और बदलूँ खुद को, जीने के लिए ऐ ज़िन्दगी;
मुझमें थोडा सा तो मुझको बाकी रहने दे।
----------
एहसास बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं,
वरना नफरत और मोहब्बत एक ही दिल से होती है।
----------
ज़रूरी तो नहीं था हर चाहत का मतलब इश्क़ हो;
कभी कभी कुछ अनजान रिश्तों के लिए दिल बेचैन हो जाता है।
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गम तो है हर एक को, मगर हौसला है जुदा जुदा;
कोई टूट कर बिखर गया, कोई मुस्कुरा के चल दिया।
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मालूम जो होता हमें अंजाम-ए-मोहब्बत;
लेते न कभी भूल के हम नाम-ए-मोहब्बत।
~ Sheikh Ibrahim Zauq
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शिखर पर खड़ी हूँ मंज़िल के मैं;
पैरों को घेरे यह फिर कैसे भंवर हैं।
~ Parveen Sethi
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उदासी तुम पे बीतेगी तो तुम भी जान जाओगे कि,
कितना दर्द होता है नज़र अंदाज़ करने से।
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हम तो सोचते थे कि लफ्ज़ ही चोट करते हैं;
मगर कुछ खामोशियों के ज़ख्म तो और भी गहरे निकले।
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दर्द से हम अब खेलना सीख गए;
बेवफाई के साथ अब हम जीना सीख गए;
क्या बतायें किस कदर दिल टूटा है हमारा;
मौत से पहले हम कफ़न ओढ़ कर सोना सीख गए।
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तेरी याद में ज़रा आँखें भिगो लूँ;
उदास रात की तन्हाई में सो लूँ;
अकेले ग़म का बोझ अब संभलता नहीं;
अगर तू मिल जाये तो तुझसे लिपट कर रो लूँ।
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हमें भी याद रखें जब लिखें तारीख गुलशन की;
कि हमने भी लुटाया है चमन में आशियां अपना।
~ Aziz Indorvi
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मिसाल इसकी कहाँ है ज़माने में,
कि सारे खोने के ग़म पाये हमने पाने में,
वो शक्ल पिघली तो हर शय में ढल गयी जैसे,
अजीब बात हुई है उसे भुलाने में,
जो मुंतज़िर ना मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा,
कि हमने देर लगा दी पलट के आने में।
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मुझ को तो होश नहीं तुमको खबर हो शायद;
लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद कर दिया।
~ Josh Malihabadi
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मैंने रब से कहा वो चली गयी मुझे छोड़कर,
उसकी जाने क्या मज़बूरी थी;
रब ने मुझसे कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं,
यह कहानी मैंने लिखी ही अधूरी थी।
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ऐ आईने तेरी भी हालत अजीब है मेरे दिल की तरह;
तुझे भी बदल देते हैं यह लोग तोड़ने के बाद।
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मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी;
उस दौर से गुज़र रहा हूँ जो गुज़रता ही नहीं।
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तेरी दुनिया में जीने से तो बेहतर हैं कि मर जायें;
वही आँसू, वही आहें, वही ग़म है जिधर जायें;
कोई तो ऐसा घर होता जहाँ से प्यार मिल जाता;
वही बेगाने चेहरे हैं जहाँ जायें जिधर जायें।
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सब कुछ बदला बदला था जब बरसो बाद मिले;
हाथ भी न थाम सके वो इतने पराये से लगे।
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तेरे इश्क की दुनिया में हर कोई मजबूर है;
पल में हँसी पल में आँसू ये चाहत का दस्तूर है;
जिसे मिली न मोहब्बत उसके ज़ख्मो का कोई हिसाब नहीं;
ये मोहब्बत पाने वाला भी दर्द से कहाँ दूर है।
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टूटे हुए पैमाने में कभी जाम नहीं आता;
इश्क़ के मरीज़ों को कभी आराम नहीं आता;
ऐ दिल तोड़ने वाले तुमने यह नहीं सोचा;
कि टूटा हुआ दिल कभी किसी के काम नहीं आता।
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तेरे हसीन तस्सवुर का आसरा लेकर;
दुखों के काँटे में सारे समेट लेता हूँ;
तुम्हारा नाम ही काफी है राहत-ए-जान को;
जिससे ग़मों की तेज़ हवाओं को मोड़ देता हूँ।
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छोटी सी ज़िन्दगी में अरमान बहुत थे;
हमदर्द कोई न था इंसान बहुत थे;
मैं अपना दर्द बताता भी तो किसे बताता;
मेरे दिल का हाल जानने वाले अनजान बहुत थे।
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पढ़ तो लिए है मगर अब कैसे फेंक दूँ;
खुशबू तुम्हारे हाथों की इन कागज़ों में जो है।
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हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें;
दिल ही नहीं रहा है कि कुछ आरज़ू करें।
~ Khwaja Mir Dard
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आवारगी छोड़ दी हमने तो लोग भूलने लगे हैं;
वरना शोहरत कदम चूमती थी जब हम बदनाम हुआ करते थे।
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वक़्त बदला और बदली कहानी है;
संग मेरे हसीन पलों की यादें पुरानी हैं;
ना लगाओ मरहम मेरे ज़ख्मों पर;
मेरे पास उनकी बस यही एक बाकी निशानी है।
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लोग बेवजह ढूँढते हैँ खुदखुशी के तरीके हजार;
इश्क करके क्यों नहीँ देख लेते वो एक बार।
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तू देख या न देख, तेरे देखने का ग़म नहीं;
तेरा न देखना भी तेरे देखने से कम नहीं;
शामिल नहीं हैं जिसमे तेरी यादे;
वो जिन्दगी भी किसी जहन्नुम से कम नहीं।
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छुपे हैं लाख हक़ के मरहले गुम-नाम होंटों पर;
उसी की बात चल जाती है जिस का नाम चलता है।
~ Shakeel Badayuni
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सब का तो मुदावा कर डाला अपना ही मुदावा कर न सके;
सब के तो गिरेबाँ सी डाले अपना ही गिरेबाँ भूल गए।
~ Asrar ul Haq Majaz
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क्यों हिज्र के शिकवे करता है क्यों दर्द के रोने रोता है;
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है।
~ Hafeez Jalandhari
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वही रंजिशें वही हसरतें,
न ही दर्द-ए-दिल में कमी हुई;
है अजीब सी मेरी ज़िन्दगी,
न गुज़र सकी न खत्म हुई।
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आँखों के परदे भी नम हो गए हैं;
बातों के सिलसिले भी कम हो गए हैं;
पता नहीं गलती किसकी है;
वक़्त बुरा है या बुरे हम हो गए हैं।
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इक़रार कर गया कभी इंकार कर गया;
हर बात एक अज़ब से दो-चार कर गया;
रास्ता बदल के भी देखा मगर वो शख्स;
दिल में उतर कर सारी हदें पार कर गया।
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अपना ही समझते हैं तुम्हें दिल-ओ-जाना हम तुम्हें;
दुश्मनों को तो कभी दिल में बसाया नहीं जाता।
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कभी किसी से प्यार मत करना;
हो जाए तो इनकार मत करना;
निभा सको तो चलना उसकी राह पर;
वरना किसी की ज़िंदगी बरबाद मत करना।
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सुना है जब वो मायूस होते हैं तो हमें बहुत याद करते हैं;
तू ही बता ऐ खुदा अब दुआ उनकी खुशी की करुँ या मायूसी की।
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तुम ने जो दिल के अँधेरे में जलाया था कभी;
वो दिया आज भी सीने में जला रखा है;
देख आ कर दहकते हुए ज़ख्मों की बहार;
मैंने अब तक तेरे गुलशन को सजा रखा है।
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बिछड़ के तुम से ज़िन्दगी सजा लगती है;
यह साँस भी जैसे मुझ से खफा लगती है;
तड़प उठते हैं दर्द के मारे;
ज़ख्मों को मेरे जब तेरे दीदार की हवा लगती है।
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तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से;
जान जाओगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए।
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निगाहों से भी चोट लगती है जनाब,
जब कोई देख कर भी अनदेखा कर देता है।
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मेरे प्यार को वो समझ नहीं पाया;
रोते थे जब बैठ तनहा तो कोई पास नहीं आया;
मिटा दिया खुद को किसी के प्यार में;
तो भी लोग कहते हैं कि मुझे प्यार करना नहीं आया।
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मशरूफ रहने का अंदाज़ तुम्हें तनहा ना कर दे 'ग़ालिब';
रिश्ते फुर्सत के नहीं तवज्जो के मोहताज़ होते हैं।
~ Mirza Ghalib
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उदासियों के सन्नाटे बड़े एहतराम से रहते मुझ में;
अब दिल भी धड़कता है तो शोर लगता है।
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रिश्ते बनते और बिगड़ते रहते हैं;
लोग सफ़र में मिलते बिछड़ते रहते हैं;
शायर क्या जानेगे दौलत का हुनर;
लफ़्ज़ों की दुनिया में उलझे रहते हैं।
~ Shammi Jalandhari
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आरज़ू यह नहीं कि ग़म का तूफ़ान टल जाये;
फ़िक्र तो यह है कि कहीं आपका दिल न बदल जाये;
कभी मुझको अगर भुलाना चाहो तो;
दर्द इतना देना कि मेरा दम निकल जाये।
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पा लिया था दुनिया की सबसे हसीन को;
इस बात का तो हमें कभी गुरूर न था;
वो रह पाते पास कुछ दिन और हमारे;
शायद यह हमारे नसीब को मंज़ूर नहीं था।
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ये नज़र नज़र की बात है कि किसे क्या तलाश है;
तू हँसने को बेताब है मुझे तेरी मुस्कुराहटों की प्यास है।
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हम जानते तो इश्क़ न करते किसी के साथ;
ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ।
~ Mir Taqi Mir
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यह ग़ज़लों की दुनिया भी अजीब है;
यहाँ आँसुओं का भी जाम बनाया जाता है;
कह भी देते हैं अगर दर्द-ए-दिल की दास्तान;
फिर भी वाह-वाह ही पुकारा जाता है।
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हम पर जो गुज़री है क्या तुम सुन पाओगे;
नाज़ुक सा दिल रखते हो तुम रोने लग जाओगे;
बहुत ग़म मिले हैं इस दुनिया की भीड़ में;
कभी सुनो जो तुम इन्हें तुम भी मुस्कुराना भूल जाओगे।
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ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर';
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है।
~ Ameer Minai
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उसकी मोहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब सिलसिला था;
अपना भी नहीं बनाया और किसी का होने भी नहीं दिया।
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दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं;
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं।
~ Faiz Ahmad Faiz
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अजीब रंग का मौसम चला है कुछ दिन से;
नज़र पे बोझ है और दिल खफा है कुछ दिन से;
वो और थे जिसे तू जानता था बरसों से;
मैं और हूँ जिसे तू मिल रहा है कुछ दिन से।
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उनसे मिलने की जो सोचें अब वो ज़माना नहीं;
घर भी उनके कैसे जायें अब तो कोई बहाना नहीं;
मुझे याद रखना तुम कहीं भुला ना देना;
माना कि बरसों से तेरी गली में आना-जाना नहीं।
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माँगने से मिल सकती नहीं हमें एक भी ख़ुशी;
पाये हैं लाख रंज तमन्ना किये बगैर।
~ Qateel Shifai
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तुम्हें भूले पर तेरी यादों को ना भुला पाये;
सारा संसार जीत लिया बस एक तुम से ना हम जीत पाये;
तेरी यादों में ऐसे खो गए हम कि किसी को याद ना कर पाये;
तुमने मुझे किया तनहा इस कदर कि अब तक किसी और के ना हम हो पाये।
----------
ना हम रहे दिल लगाने के काबिल;
ना दिल रहा ग़म उठाने के काबिल;
लगे उसकी यादों के जो ज़ख़्म दिल पर;
ना छोड़ा उसने फिर मुस्कुराने के काबिल।
----------
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं​;
​रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं​;​
​​ ​​पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता हैं​;​
​अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं​।
~ Nida Fazli
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तुझको भी जब अपनी कसमें अपने वादे याद नहीं;
हम भी अपने ख्वाब तेरी आँखों में रख कर भूल गए।
~ Nazeer Baqri
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वो जज़्बों की तिजारत थी, यह दिल कुछ और समझा था;
उसे हँसने की आदत थी, यह दिल कुछ और समझा था;
मुझे देख कर अक्सर वो निगाहें फेर लेते थे;
वो दर-ए-पर्दा हकारत थी, यह दिल कुछ और समझा था।

शब्दार्थ
हकारत = नफरत
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मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना;
तुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जाना;
तुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई;
तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना।
~ Aitbar Sajid
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दर्द-ए-दिल कम ना होगा ऐ सनम;
आपकी महफ़िल से जाने के बाद;
नाम बदनाम हमारा होगा;
आपकी ज़िन्दगी से जाने के बाद।
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एक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा;
मैं नहीं तो कोई तुझ को दूसरा मिल जाएगा;
भागता हूँ हर तरफ़ ऐसे हवा के साथ साथ;
जिस तरह सच मुच मुझे उस का पता मिल जाएगा।
~ Adeem Hashmi
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हमें क्या पता था, मौसम ऐसे रो पड़ेगा;
हमने तो आसमां को बस अपनी दास्ताँ सुनाई थी।
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खुलेगी इस नज़र पे चश्म-ए-तर आहिस्ता आहिस्ता;
किया जाता है पानी में सफ़र आहिस्ता आहिस्ता;
कोई ज़ंजीर फिर वापस वहीं पर ले के आती है;
कठिन हो राह तो छूटता है घर आहिस्ता आहिस्ता।
~ Parveen Shakir
----------
अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये;
जाने वाले जल्दी में मिलकर जाना भूल गये;
मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने;
जैसे कुछ जरुरी था, जो वो हमें बताना भूल गये;
वक़्त-ए-रुखसत भी रो रहा था हमारी बेबसी पर;
उनके आंसू तो वहीं रह गये, वो बाहर ही आना भूल गये।
----------
बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता;
जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता;
वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ मैं;
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता।
----------
आओ किसी शब मुझे टूट के बिखरता देखो;
मेरी रगों में ज़हर जुदाई का उतरता देखो;
किस किस अदा से तुझे माँगा है खुदा से;
आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो।
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किसी ने यूँ ही पूछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है;
हमने हँसते हुए कहा, "पता नहीं... कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।
----------
फुर्सत किसे है ज़ख्मों को सरहाने की;
निगाहें बदल जाती हैं अपने बेगानों की;
तुम भी छोड़कर चले गए हमें;
अब तम्मना न रही किसी से दिल लगाने की।
----------
परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ;
अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था।
~ Mumtaz Rashid
----------
जब रूह किसी बोझ से थक जाती है;
एहसास की लौ और भी बढ़ जाती है;
मैं बढ़ता हूँ ज़िन्दगी की तरफ लेकिन;
ज़ंजीर सी पाँव में छनक जाती है।
----------
दिल की हालात बताई नहीं जाती;
हमसे उनकी चाहत छुपाई नहीं जाती;
बस एक याद बची है उनके चले जाने के बाद;
हमसे तो वो याद भी दिल से निकाली नहीं जाती।
----------
उन गलियों से जब गुज़रे तो मंज़र अजीब था;
दर्द था मगर वो दिल के करीब था;
जिसे हम ढूँढ़ते थे अपनी हाथों की लकीरों में;
वो किसी दूसरे की किस्मत किसी और का नसीब था।
----------
निकले हम कहाँ से और किधर निकले;
हर मोड़ पे चौंकाए ऐसा अपना सफ़र निकले;
तूने समझाया क्या रो-रो के अपनी बात;
तेरे हमदर्द भी लेकिन बड़े बे-असर निकले।
----------
लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में;
किसकी बनी है आलम-ए-ना पैदार में;
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें;
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दागदार में।
~ Bahadur Shah Zafar
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अब जिस के जी में आये वही पाये रौशनी;
हम ने तो दिल जला कर सरेआम रख दिया।
~ Qateel Shifai
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बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मेँ अपने;
फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए।
----------
तनहाइयों के शहर में एक घर बना लिया;
रुसवाइयों को अपना मुक़द्दर बना लिया;
देखा है हमने यहाँ पत्थर को पूजते हैं लोग;
इसलिए हमने भी अपने दिल को पत्थर बना लिया।
----------
प्यार तो ज़िन्दगी को सजाने के लिए है;
पर ज़िन्दगी बस दर्द बहाने के लिए है;
मेरे अंदर की उदासी काश कोई पढ़ ले;
ये हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है।
----------
बिछड़ गए हैं जो उनका साथ क्या मांगू;
ज़रा सी उम्र बाकी है इस गम से निजात क्या मांगू;
वो साथ होते तो होती ज़रूरतें भी हमें;
अपने अकेले के लिए कायनात क्या मांगू।
----------
चुपके चुपके कोई गम का खाना हम से सीख जाये;
जी ही जी में तिलमिलाना कोई हम से सीख जाये;
अब्र क्या आँसू बहाना कोई हमसे सीख जाये;
बर्क क्या है तिलमिलाना कोई हम से सीख जाये।
~ Sheikh Ibrahim Zauq
----------
कुछ लोग पसंद करने लगे हैं अल्फाज मेरे;
मतलब मोहब्बत में बरबाद और भी हुए हैं।
----------
तुझे अपना बनाने की हसरत थी,
जो बस दिल में ही रह गयी;
चाहा था तुझे टूट कर हमने;
चाहत थी बस चाहत बन कर रह गयी।
----------
इसी ख्याल से गुज़री है शाम-ए-दर्द अक्सर;
कि दर्द हद से जो गुज़रेगा मुस्कुरा दूंगा।
~ Mohsin Naqvi
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दुःख देते हो खुद और खुद ही सवाल करते हो;
तुम भी ओ सनम, कमाल करते हो;
देख कर पूछ लिया है हाल मेरा;
चलो शुक्र है कुछ तो ख्याल करते हो।
----------
डूबी हैं मेरी उँगलियाँ खुद अपने लहू में;
ये काँच के टुकड़ों को उठाने के सज़ा है।
~ Parveen Shakir
----------
दर्द दे गए सितम भी दे गए;
ज़ख़्म के साथ वो मरहम भी दे गए;
दो लफ़्ज़ों से कर गए अपना मन हल्का;
और हमें कभी ना रोने की कसम दे गए।
----------
साँस थम जाती है पर जान नहीं जाती;
दर्द होता है पर आवाज़ नहीं आती;
अजीब लोग हैं इस ज़माने में ऐ दोस्त;
कोई भूल नहीं पाता और किसी को याद नहीं आती।
----------
बस यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ;
धूप कितनी भी तेज़ हो समंदर नहीं सूखा करते।
----------
बहुत दर्द हैं ऐ जान-ए-अदा तेरी मोहब्बत में;
कैसे कह दूँ कि तुझे वफ़ा निभानी नहीं आती।
----------
वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं;
कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं;
दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद;
वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।
----------
रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी;
कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी;
ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी;
बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।
----------
ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है;
हद्द-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है।
~ Shahryar
----------
किसी ने यूँ ही पुछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है;
हमने हँसते हुए कहा, पता नहीं कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।
----------
सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली;
एक तुझको भूल जाने की मोहलत न मिली;
करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर;
हमको तेरे ख्याल से कभी फुर्सत न मिली।
----------
मोहब्बत में किसी का इंतजार मत करना;
हो सके तो किसी से प्यार मत करना;
कुछ नहीं मिलता मोहब्बत कर के;
खुद की ज़िन्दगी बेकार मत करना।
----------
बस यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ;
धूप कितनी भी तेज़ हो समन्दर नहीं सूखा करते।
----------
एक पल में ज़िन्दगी भर की उदासी दे गया;
वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया;
नोच कर शाखों के तन से खुश्क पत्तों का लिबास;
ज़र्द मौसम बाँझ रुत को बे-लिबासी दे गया।
~ Mohsin Naqvi
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न वो सपना देखो जो टूट जाये;
न वो हाथ थामो जो छूट जाये;
मत आने दो किसी को करीब इतना;
कि उसके दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।
----------
ना जाने क्यों कोसते हैं लोग बदसूरती को;
बर्बाद करने वाले तो हसीन चेहरे होते हैं।
----------
बढ़ी जो हद से तो सारे तिलिस्म तोड़ गयी;
वो खुश दिली जो दिलों को दिलों से जोड़ गयी;
अब्द की राह पे बे-ख्वाब धड़कनों की धमक;
जो सो गए उन्हें बुझते जगो में छोड़ गयी।
~ Majeed Amjad
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भूल शायद बहुत बड़ी कर ली;
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली;
तुम मोहब्बत को खेल कहते हो;
हम ने बर्बाद ज़िन्दगी कर ली।
~ Bashir Badr
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हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे;
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे;
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया;
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।
----------
क्या कुछ न किया है और क्या कुछ नहीं करते;
कुछ करते हैं ऐसा ब-खुदा कुछ नहीं करते;
अपने मर्ज़-ए-गम का हकीम और कोई है;
हम और तबीबों की दवा कुछ नहीं करते।
~ Bahadur Shah Zafar
----------
हुआ जब इश्क़ का एहसास उन्हें;
आकर वो पास हमारे सारा दिन रोते रहे;
हम भी निकले खुदगर्ज़ इतने यारो कि;
ओढ़ कर कफ़न, आँखें बंद करके सोते रहे।
----------
ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें;
यूँ ही कब तलक खुदाया ग़म-ए-ज़िंदगी निबहेँ।
~ Majrooh Sultanpuri
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खून से जब जला दिया एक दिया बुझा हुआ;
फिर मुझे दे दिया गया एक दिया बुझा हुआ;
महफ़िल-ए-रंग-ओ-नूर की फिर मुझे याद आ गयी;
फिर मुझे याद आ गया एक दिया बुझा हुआ।
~ Pirzada Qasim
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इस बार उन से मिल के जुदा हम जो हो गए;
उन की सहेलियों के भी आँचल भिगो गए;
चौराहों का तो हुस्न बढ़ा शहर के मगर;
जो लोग नामवर थे वो पत्थर के हो गए।
~ Azhar Inayati
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बुझते हुए अरमानों का इतना ही फ़साना है;
इश्क़ में तेरे हर पल हम को रहना है;
चाहे सितमगर कितने भी ज़ख़्म दे हमें;
इश्क़ में हर ज़ख्म हमें हँसते हुए सहना है।
----------
नशे में भी तेरा ही नाम लबों पर आता है;
चलते हुए मेरे पाँव लड़खड़ाते हैं;
एक टीस सी उठती है दिल में मेरे;
जब भी तेरा दिया हुआ दर्द याद आता है।
----------
दर्द-ए-दिल कम ना होगा ऐ सनम;
आपकी महफ़िल से जाने के बाद;
नाम बदनाम हमारा होगा;
आपकी ज़िन्दगी से जाने के बाद।
----------
किसको दोष लगाएं अपनी बरबादी का हम;
इश्क़ की राहों में हम खुद ही गुनाहगार हैं;
जो लम्हें बिताये थे साथ मिलकर कभी;
आज वही लम्हें मेरे सितमगर हैं।
----------
लुटा चुका हूँ बहुत कुछ, अपनी जिंदगी में यारो;
मेरे वो ज़ज्बात तो ना लूटो, जो लिखकर बयाँ करता हूँ।
----------
ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले;
तुझ सा नहीं मिला कोई, लोग तो कम नहीं मिले;
एक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है;
जिन को न सह सके ये दिल, ऐसे तो गम नहीं मिले।
~ Aitbar Sajid
----------
खुद से भी ज्यादा उन्हें प्यार किया करते थे;
उनकी ही याद में दिन रात जिया करते थे;
गुज़रा नहीं जाता अब उन राहों से;
जहाँ रुक कर हम उनका इंतज़ार किया करते थे।
----------
तन्हाइयों के शहर में एक घर बना लिया;
रुसवाइयों को अपना मुक़द्दर बना लिया;
देखा है यहाँ पत्थर को पूजते हैं लोग;
हमने भी इसलिए अपने दिल को पत्थर बना लिया।
----------
दिल के दर्द को दिल तोड़ने वाले क्या जाने;
प्यार की रस्मों को यह ज़माने वाले क्या जाने;
होती है कितनी तकलीफ कब्र के नीचे;
यह ऊपर से फूल चढ़ाने वाले क्या जाने।
----------
ताबीर जो मिल जाएं तो एक ख्वाब बहुत था;
जो शख्स गंवा बैठी हूं नायाब बहुत था;
मैं भला कैसे बचा लेती कश्ती-ए-दिल को सागर से;
दरिया-ए- मोहब्बत में सैलाब बहुत था।
----------
वक़्त गुज़रेगा तो हम संभाल जाएँगे;
मौत आने से पहले समझ जाएँगे;
कि बेवफ़ाई उनकी फ़ितरत है, ना की मजबूरी;
तन्हाई में ही सही, हम फिर से बस जाएँगे।
----------
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।
~ Faiz Ahmad Faiz
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खुशबु की तरह साथ लगा ले गयी हम को;
कूचे से तेरे बाद-ए-सबा ले गयी हम को;
पत्थर थे कि गौहर थे अब इस बात का क्या ज़िक्र;
इक मौज बहर-हाल बहा ले गयी हम को।

शब्दार्थ:
बाद-ए-सबा = सुबह की ठंडी हवा
गौहर = मोती
~ Irfan Siddiqi
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वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं;
कहाँ से लायें लफ्ज़ जब हम को मिलते ही नहीं;
दर्द की जुबान होती तो बता देते शायद;
वो ज़ख्म कैसे दिखायें जो दिखते ही नहीं।
----------
आइना भी भला कब किसी को सच बता पाया है;
जब भी देखो दायाँ तो बायां ही नज़र आया है।
----------
अब हवा जिधर जाये मैं भी उधर जाऊंगा;
मैं खुश्बू हूँ हवाओं में बिखर जाऊंगा;
अफ़सोस तुम्हें होगा मुझे सताओगे अगर;
मेरा क्या जितना भी जलाओगे उतना ही निखर जाऊंगा।
----------
अपनी हर बात रखने का दावा किया उसने;
लगा जैसे हकीकत में जीने का बहाना किया उसने;
टूट गया कोई अल्फ़ाज़ों से उनके उनको पता तक नहीं;
ज़िंदगी सिर्फ नाम नहीं मोहब्बत का यह भी सिखाया उसने।
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तुम न आए तो क्या सहर न हुई;
हाँ मगर चैन से बसर न हुई;
मेरा नाला सुना ज़माने ने;
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई।

शब्दार्थ:
सहर = सुबह
बसर = गुजरना
नाला = रोना-धोना, शिकवा
~ Mirza Ghalib
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कैसे बयान करे अब आलम दिल की बेबसी का;
वो क्या समझे दर्द इन आंखों की नमी का;
चाहने वाले उनके इतने हो गए हैं कि;
अब एहसास ही नहीं उन्हें हमारी कमी का।
----------
इश्क़ में जिसके ये अहवाल बना रखा है;
अब वही कहता है इस वजह में क्या रखा है;
ले चले हो मुझे इस बज्म में यारो लेकिन;
कुछ मेरा हाल भी पहले से सुना रखा है।
~ Saleem Ahmed
----------
मोहब्बत और मौत की पसंद तो देखो;
एक को दिल चाहिए और दूसरे को धड़कन।
----------
मुझ से ऐ आईने मेरी बेकरारियाँ मत पूछ;
टूट जाएगा तू भी मेरी खामोशियाँ सुन के।
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दिलों की बंद खिड़की खोलना अब जुर्म जैसा है;
भरी महफिल में सच बोलना अब जुर्म जैसा है;
हर ज्यादती को सहन कर लो चुपचाप;
शहर में इस तरह से चीखना जुर्म जैसा है।
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तुम्हारे चाँद से चेहरे पे ग़म अच्छे नहीं लगते;
हमें कह दो चले जाओ जो हम अच्छे नहीं लगते;
हमें वो ज़ख्म दो जाना जो सारी उम्र ना भर पायें;
जो जल्दी भर के मिट जाएं वो ज़ख्म अच्छे नहीं लगते।
~ Syed Wasi Shah
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जब तक अपने दिल में उनका गम रहा;
हसरतों का रात दिन मातम रहा;
हिज्र में दिल का ना था साथी कोई;
दर्द उठ-उठ कर शरीक-ए-गम रहा।
~ Ahsan Marahravi
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है परेशानियाँ यूँ तो, बहुत सी ज़िंदगी में;
तेरी मोहब्बत सा मगर, कोई तंग नहीं करता।
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दर्द आँखों में झलक जाता है पर होंठों तक नहीं आता;
ये मज़बूरी है मेरे इश्क़ की जो मिलता है खो जाता है;
उसे भूलने का जज़्बा तो हर रोज़ दिल में आता है;
पर कैसे भुला दे दिल, हर जर्रे में उसको पाता है।
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फुर्सत किसे है ज़ख्मों को सरहाने की;
निगाहें बदल जाती हैं अपनों-बेगानों की;
तुम भी छोड़कर चले गए हो हमें ओ सनम;
अब तो तमन्ना ही नहीं रही किसी और से दिल लगाने की।
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किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे;
गुज़र गयी जरस-ए-गुल उदास करके मुझे;
मैं सो रहा था किसी याद के शबिस्ताँ में;
जगा के छोड़ गए काफिले सहर के मुझे।

शब्दार्थ:
जरस-ए-गुल = फूलों की लड़ी
शबिस्ताँ = बिस्तर
~ Nasir Kazmi
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न मेरी कोई मंज़िल है न किनारा;
तन्हाई मेरी महफ़िल और यादें मेरा सहारा;
तुम से बिछड़ कि कुछ यूँ वक़्त गुज़ारा;
कभी ज़िंदगी को तरसे तो कभी मौत को पुकारा।
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ज़रा देखो ये दरवाज़े पर दस्तक किसने दी है;
अगर इश्क़ हो तो कहना यहाँ दिल नही रहता।
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प्यार किसी से जितना किया रुस्वाई ही मिली है;
वफ़ा चाहे जितनी भी की बेवफाई ही मिली है;
जितना भी किसी को अपना बना कर देखा;
जब आँख खुली तो तन्हाई ही मिली है।
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उसकी याद में हम बरसों रोते रहे;
बेवफ़ा वो निकले बदनाम हम होते रहे;
प्यार में मदहोशी का आलम तो देखिये;
धूल चेहरे पे थी और हम आईना साफ़ करते रहे।
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किस फ़िक्र किस ख्याल में खोया हुआ सा है;
दिल आज तेरी याद को भूला हुआ सा है;
गुलशन में इस तरह कब आई थी फसल-ए-गुल;
हर फूल अपनी शाख से टूटा हुआ सा है।

शब्दार्थ:
फसल-ए-गुल = बहार का मौसम
~ Shahryar
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हर वक़्त तेरी यादें तडपाती हैं मुझे;
आखिर इतना क्यों ये सताती है मुझे;
इश्क तो किया था तूने भी बड़े शौंक से;
अब क्यों नहीं यह एहसास दिलाती है तुझे।
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काश उसे चाहने का अरमान ना होता;
मैं होश में रहते हुए अनजान ना होता;
ना प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको;
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता।
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कोई 'अनीस' कोई आश्ना नहीं रखते;
किसी आस बग़ैर अज खुदा नहीं रखते;
किसी को क्या हो दिलों की शिकस्तगी की खबर;
कि टूटने में यह दिल सदा नहीं रखते।

शब्दार्थ:
शिकस्तगी = उदासी
सदा = आवाज़
~ Meer Anees
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मोहब्बत हर इंसान को आज़माती है;
किसी से रूठ जाती है किसी पे मुस्कुराती है;
यह मोहब्बत का खेल ही कुछ ऐसा है;
किसी का कुछ नहीं जाता और किसी की जान चली जाती है।
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सबके दुःख हैं एक से मगर हौंसले हैं जुदा-जुदा;
कोई टूट कर बिखर गया तो कोई यूँ ही मुस्कुरा कर चल दिया।
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इश्क़ पाने की तमन्ना में कभी कभी ज़िंदगी खिलौना बन जाती है;
जिसे दिल में बसाना चाहते हैं वो सूरत सिर्फ याद बन रह जाती है।
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'मजरूह' लिख रहे हैं वो अहल-ए-वफ़ा का नाम;
हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह।

शब्दार्थ:
अहल-ए-वफ़ा = वफ़ा के चाहने वाले लोग
~ Majrooh Sultanpuri
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इधर से आज वो गुज़रे तो मुँह फेरे हुए गुज़रे;
अब उन से भी हमारी बे-कसी देखी नहीं जाती।
~ Asar Lakhnavi
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मत पूछना ख़फ़ा होने का सबब मुझसे;
कैसे-कैसे खेले हैं किस्मत ने खेल मुझसे;
अब कैसे छिपाऊं अश्क इन आँखों में;
क्या बताऊँ अब क्या छूट गया है मुझसे।
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ज़ख़्म देने का अंदाज़ कुछ ऐसा है;
ज़ख़्म देकर पूछते हैं कि हाल कैसा है;
किसी एक से गिला अब क्या करें हम;
यहाँ तो सारी दुनिया का मिज़ाज़ एक जैसा है।
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राह-ए-वफ़ा में हम को ख़ुशी की तलाश थी;
दो गाम ही चले थे कि हर गाम रो पड़े।
~ Sudarshan Faakir
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मैं अपनी वफाओं का भरम ले के चली हूँ;
हाथों में मोहब्बत का आलम लेकर चली हूँ;
चलने ही नहीं देती यह वादे की ज़ंज़ीर;
मुश्किल था मगर इश्क़ के सारे सितम लेकर चली हूँ।
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अब तो ये भी नहीं रहा एहसास दर्द होता है या नहीं होता;
इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता।
~ Jigar Moradabadi
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दर्द कितने हैं यह बता नहीं सकता;
ज़ख़्म हैं कितने यह भी दिखा नहीं सकता;
आँखों से समझ सको तो समझ लो;
आँसू गिरे हैं कितने यह गिना नहीं सकता।
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मेरे सुर्ख़ लहू से चमकी कितने हाथों में मेहंदी;
शहर में जिस दिन क़त्ल हुआ मैं ईद मनाई लोगों ने।
~ Bahadur Shah Zafar
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तड़पते हैं न रोते हैं न हम फ़रियाद करते हैं;
सनम की याद में हर-दम ख़ुदा को याद करते हैं;
उन्हीं के इश्क़ में हम नाला-ओ-फ़रियाद करते हैं;
इलाही देखिये किस दिन हमें वो याद करते हैं।
~ Atish
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शोला था जल बुझा हूँ, हवाएं मुझे न दो;
मैं तो कब का जा चुका हूँ, सदायें मुझे न दो;
वो ज़हर भी पी चुका हूँ, जो तुमने मुझे दिया था;
आ गया हम मौत के आग़ोश में अब मुझे ज़िंदगी की दुआएं न दो।
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तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी;
मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी;
रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी ये कशमकश बराबर;
ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी।
~ Khwaja Mir Dard
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इरादों में अभी भी क्यों इतनी जान बाकी है;
तेरे किये वादों का इम्तिहान अभी बाकी है;
अधूरी क्यों रह गयी तुम्हारी यह बेरुखी;
जबकि दिल के हर टुकड़े में तेरा नाम बाकी है।
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जिनकी आँखें आँसुओं से नम नहीं;
क्या समझते हो कि उन्हें कोई ग़म नहीं;
तुम तड़प कर रो दिए तो क्या हुआ;
ग़म छुपा कर हँसने वाले भी कम नहीं।
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देख कर उसको अक्सर हमे एहसास होता है;
कभी कभी गम देने वाला भी बहुत ख़ास होता है;
ये और बात है वो हर पल नही होता पास हमारे;
मगर उसका दिया गम अक्सर हमारे पास होता है।
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मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो;
काफ़िर अगर हज़ार बरस दिल में तू न हो;
क्या लुत्फ़-ए-इंतज़ार जो तू हीला-जू न हो;
किस काम का विसाल अगर आरज़ू न हो।

शब्दार्थ:
हीला-जू = बहाना करने वाला
विसाल = मिलन
~ Daagh Dehlvi
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एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया;
जितना खाया था नमक मेरा, मेरे जख्मों पर लगा दिया।
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ये सानेहा भी मोहब्बत में बार-हा गुज़रा;
कि उस ने हाल भी पूछा तो आँख भर आई।

शब्दार्थ:
सानेहा = घटना
~ Nasir Kazmi
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हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले;
न थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले;
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें;
तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले।
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तुझ को पा कर भी न कम हो सकी बे-ताबी-ए-दिल;
इतना आसान तेरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं।
~ Firaq Gorakhpuri
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जिसको भी चाहा उसे शिद्दत से चाहा है 'फ़राज़';
सिलसिला टूटा नहीं है दर्द की ज़ंजीर का।
~ Ahmad Faraz
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हर ज़ख़्म किसी ठोकर की मेहरबानी है;
मेरी ज़िंदगी की बस यही एक कहानी है;
मिटा देते सनम के हर दर्द को सीने से;
पर ये दर्द ही तो उसकी आखिरी निशानी है।
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ज़रूरी नहीं कि जीने का कोई सहारा हो;
ज़रूरी नहीं कि जिसके हम हों वो भी हमारा हो;
कुछ कश्तियाँ डूब जाया करती हैं;
ज़रूरी नहीं कि हर कश्ती के नसीब में किनारा हो।
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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना;
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।
~ Mirza Ghalib
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रौशनी करता हूँ अँधेरा मिटाने के लिए;
शराब पीता हूँ मैं तुझको भुलाने के लिए;
क्यों न बन सकी तुम मेरी ज़िंदगी;
आज भी रोता हूँ सोच कर गुज़रे ज़माने के लिए।
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ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है;
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है।
~ Shad Azeembadi
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फुर्सत किसे है ज़ख्मों को सरहाने की;
निगाहें बदल जाती हैं अपने बेगानों की;
तुम भी छोड़कर चले गए हमें;
अब तम्मना न रही किसी से दिल लगाने की।
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आज उसने एक और दर्द दिया तो खुदा याद आया;
कि हमने भी दुआओं में उसके सारे दर्द माँगे थे।
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आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है;
जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है।
~ Jigar Moradabadi
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चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ;
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ।

अनुवाद:
नशात = खुशियां
महव-ए-यास = दुखों में खोया
~ Sahir Ludhianvi
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कांच के दिल थे जिनके उनके दिल टूट गए;
हमारा दिल था मोम का पिघलता ही चला गया।
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मेरे दिल का दर्द किसने देखा है;
मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है;
हम तन्हाई में बैठे रोते हैं;
लोगों ने हमें महफ़िल में हँसते देखा है।
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उसे कह दो वो मेरा है किसी और का हो नहीं सकता;
बहुत नायाब है मेरे लिए वो कोई और उस जैसा हो नहीं सकता;
तुम्हारे साथ जो गुज़ारे वो मौसम याद आते हैं;
तुम्हारे बाद कोई मौसम सुहाना हो नहीं सकता।
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महफ़िल भी रोयेगी, महफ़िल में हर शख्स भी रोयेगा;
डूबी जो मेरी कश्ती तो चुपके से साहिल भी रोयेगा;
इतना प्यार बिखेर देंगे हम इस दुनिया में कि;
मेरी मौत पे मेरा क़ातिल भी रोयेगा।
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मरहम न सही कोई ज़ख्म ही दे दो ऐ ज़ालिम;
महसूस तो हो कि तुम हमें अभी भूले नहीं हो।
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अब किस से कहें और कौन सुने जो हाल तुम्हारे बाद हुआ;
इस दिल की झील सी आँखों में एक ख़्वाब बहुत बर्बाद हुआ;
यह हिज्र-हवा भी दुश्मन है उस नाम के सारे रंगों की;
वो नाम जो मेरे होंठों पर खुशबू की तरह आबाद हुआ।
~ Noshi Gilani
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लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;
हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;
कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;
वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।
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कैसे बयान करें आलम दिल की बेबसी का;
वो क्या समझे दर्द आंखों की इस नमी का;
उनके चाहने वाले इतने हो गए हैं अब कि;
उन्हे अब एहसास ही नहीं हमारी कमी का।
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वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;
हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।
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एक दिन की बात हो तो उसे भूल जाएँ हम;
नाज़िल हों दिल पे रोज़ बलाएँ तो क्या करें।
~ Akhtar Sheerani
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हमारा ज़िक्र छोड़ो, हम ऐसे लोग हैं कि जिन्हे;
नफ़रत कुछ नहीं करती, मोहब्बत मार देती है।
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खून बन कर मुनासिब नहीं दिल बहे;
दिल नहीं मानता कौन दिल से कहे;
तेरी दुनिया में आये बहुत दिन रहे;
सुख ये पाया कि हमने बहुत दुःख सहे।
~ Hafeez Jalandhari
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आज ये तन्हाई का एहसास कुछ ज्यादा है;
तेरे संग ना होना का मलाल कुछ ज्यादा है;
फिर भी काट रहे हैं जिए जाने की सज़ा यही सोचकर;
शायद इस ज़िंदगानी में मेरे गुनाह कुछ ज्यादा हैं।
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सोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी करना;
प्यार निभाते-निभाते लगता है हमने अपनी ही कदर खो दी।
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एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए;
कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए;
उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था;
वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।
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दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में;
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।
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फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं;
जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे वहीं मातम भी होते हैं।
~ Daagh Dehlvi
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दिल के दर्द छुपाना बड़ा मुश्किल है;
टूट कर फिर मुस्कुराना बड़ा मुश्किल है;
किसी अपने के साथ दूर तक जाओ फिर देखो;
अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है।
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ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है;
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है।
~ Shad Azeembadi
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हम रूठे दिलों को मनाने में रह गए;
गैरों को अपना दर्द सुनाने में रह गए;
मंज़िल हमारी, हमारे करीब से गुज़र गयी;
हम दूसरों को रास्ता दिखाने में रह गए।
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अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे;
इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे;
उनसे क्या गिला करें, भूल तो हमारी थी;
जो बिना दिल वालों से ही दिल लगा बैठे।
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बर्बाद कर गए वो ज़िंदगी प्यार के नाम से;
बेवफाई ही मिली हमें सिर्फ वफ़ा के नाम से;
ज़ख़्म ही ज़ख़्म दिए उस ने दवा के नाम से;
आसमान भी रो पड़ा मेरी मोहब्बत के अंजाम से।
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उसके ना होने से कुछ भी नहीं बदला मुझ में;
बस जहाँ पहले दिल रहता था वहाँ अब सिर्फ दर्द रहता है।
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तेरे इश्क़ में सब कुछ लुटा बैठे;
हम ज़िंदगी भी अपनी गँवा बैठे;
अब जीने की तमन्ना भी नहीं बाकी;
सारे अरमान हम अपने दफना बैठे।
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उसकी जफ़ाओं ने मुझे एक तहज़ीब सिखा दी है 'फ़राज़';
मैं रोते हुए सो जाता हूँ पर शिकवा नहीं करता।
~ Ahmad Faraz
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हर ख़ुशी के पहलू हाथों से छूट गए;
अब तो खुद के साये भी हमसे रूठ गए;
हालात हैं अब ऐसे ज़िंदगी में हमारी;
प्यार की राहों में हम खुद ही टूट गए।
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दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना;
अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना;
कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं;
फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना।
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ठोकरें खा कर भी ना संभले तो मुसाफ़िर का नसीब;
वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज़ निभा ही दिया।
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वो हमें भूल भी जायें तो कोई गम नहीं;
जाना उनका जान जाने से भी कम नहीं;
जाने कैसे ज़ख़्म दिए हैं उसने इस दिल को;
कि हर कोई कहता है कि इस दर्द की कोई मरहम नहीं।
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तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते;
भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते;
हमारे गिरते हुए आँसुओं को पढ़ कर देखो;
वो भी कहते हैं कि हम आपके बिन रह नहीं सकते।
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ग़म इसका नहीं कि तू मेरा न हो सका;
मेरी मोहब्बत में मेरा सहारा ना बन सका;
ग़म तो इसका भी नहीं कि सुकून दिल का लुट गया;
ग़म तो इसका है कि मोहब्बत से भरोसा ही उठ गया।
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उम्र की राह में रास्ते बदल जाते हैं;
वक़्त की आंधी में इंसान बदल जाते हैं;
सोचते हैं तुम्हें इतना याद ना करें लेकिन;
आँख बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं।
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वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;
हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे;
हमें ही मिल गया बेवफ़ा का ख़िताब क्योंकि;
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।
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माना कि तुम्हें मुझसे ज्यादा ग़म होगा;
मगर रोने से ये ग़म कभी कम न होगा;
जीत ही लेंगे दिल की नाकाम बाजियां हम;
अगर मोहब्बत में हमारी दम होगा।
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कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा;
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा;
वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गई;
दिल-ए-मुंतज़िर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा।
~ Amjad Islam Amjad
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तेरे इश्क़ में सब कुछ लुटा बैठा;
मैं तो ज़िंदगी भी अपनी गँवा बैठा;
अब जीने की तमन्ना न रही बाकी;
सारे अरमान मैं अपने दफना बैठा।
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तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से;
जान जाओगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए।
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पा लिया था दुनिया की सबसे हसीन को;
इस बात का तो हमें कभी गुरूर न था;
वो रह पाते पास कुछ दिन और हमारे;
शायद यह हमारे नसीब को मंज़ूर नहीं था।
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इस बहते दर्द को मत रोको;
यह तो सज़ा है किसी के इंतज़ार की;
लोग इन्हे आँसू कहे या दीवानगी;
पर यह तो निशानी है किसी के प्यार की।
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इन्हीं रास्तों ने जिन पर मेरे साथ तुम चले थे;
मुझे रोक रोक पूछा तेरा हम-सफ़र कहाँ है।
~ Bashir Badr
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कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी;
लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी।
~ Daagh Dehlvi
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बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी;
बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी;
मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ;
खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
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मेरे दिल में न आओ वरना डूब जाओगे;
ग़म-ए-अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं अंदर;
अगर एक बार रिसने लगा जो पानी;
तो कम पड़ जायेगा भरने के लिए समंदर।
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आज उसने हमें एक और दर्द दिया तो हमें याद आया;
कि दुआओं में हमने ही तो उसके सारे दर्द मांगे थे।
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खुश रहे तू है जहाँ, ले जा दुआएं मेरी;
तेरी राहों से जुदा हो गयी हैं राहें मेरी;
कुछ नहीं पास मेरे अब खाली हाथ हैं;
किसी और की नहीं सब खतायें हैं मेरी।
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जमीन छुपाने के लिए गगन होता है;
दिल छुपाने के लिए बदन होता है;
शायद मरने के बाद भी छुपाये जाते हैं गम;
इसीलिए हर लाश पे कफ़न होता है।
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शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को;
कोशिशें की बहुत मगर भुला न पाए तेरे एक नाम को।
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ऐ दिल मत कर इतनी मोहब्बत किसी से;
इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा;
एक दिन टूट कर बिखर जायेगा अपनों के हाथों से;
किसने तोडा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा।
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जो आँसू दिल में गिरते हैं वो आँखों में नहीं रहते;
बहुत से हर्फ़ ऐसे होते हैं जो लफ़्ज़ों में नहीं रहते;
किताबों में लिखे जाते हैं दुनिया भर के अफ़साने;
मगर जिन में हकीकत हो किताबों में नहीं रहते।
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रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने;
कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने;
हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो;
अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।
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जाये है जी नजात के ग़म में;
ऐसी जन्नत गयी जहन्नुम में;
आप में हम नहीं तो क्या है अज़ब;
दूर उससे रहा है क्या हम में;
बेखुदी पर न 'मीर' की जाओ;
तुमने देखा है और आलम में।
~ Mir Taqi Mir
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वक़्त के मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है;
ज़ख़्म दिल का ज़ुबाँ पर आया है;
न रोते थे कभी काँटों की चुभन से;
आज न जाने क्यों फूलों की खुशबू से रोना आया है।
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दिल मेरा जो अगर रोया न होता;
हमने भी आँखों को भिगोया न होता;
दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को;
ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता।
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मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है झरने के रूप में;
मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है सावन की धूप में;
घुल-मिल कर बहुत रहते हैं लोग जो शातिर हैं बहुत;
मैंने अपनों को तनहा देखा है बेगानों के रूप में।
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कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता, हमारी हालात तुम्हारी होती;
जो रात गुज़ारी मर कर वो रात तुमने गुज़ारी होती।
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इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ;
सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ;
जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश;
मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।
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डूबी हैं मेरी उंगलियां खुद अपने लहू में;
यह काँच के टुकड़ों को उठाने की सजा है।
~ Parveen Shakir
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वो रात दर्द और सितम की रात होगी;
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी;
उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर;
कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी।
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मुद्दत गुज़र गयी कि यह आलम है मुस्तक़िल;
कोई सबब नहीं है मगर दिल उदास है।
~ Ehsaan Danish
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वक्त नूर को बेनूर कर देता है;
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है;
कौन चाहता है अपनों से दूर होना;
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।
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अंगुलिया टूट गई, पत्थर तराशते तराशते;
जब बनी सूरत यार की तो खरीददार आ गये!
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इसी से जान गया मैं कि वक़्त ढलने लगे;
मैं थक के छाँव में बैठा और पाँव चलने लगे;
मैं दे रहा था सहारे तो एक हजूम में था;
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे।
~ Farhat Abbas Shah
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आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये;
तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये;
कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें;
और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।
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देर तो लगती है भरने में उस को;
जिस ज़ख्म में हो अपनों की इनायत।
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दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में;
और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता।
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फिर आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए;
गुज़र गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।
~ Firaq Gorakhpuri
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एक अजीब सा मंजर नज़र आता है;
हर एक आँसूं समंदर नज़र आता है;
कहाँ रखूं मैं शीशे सा दिल अपना;
हर किसी के हाथ मैं पत्थर नज़र आता है।
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ज़िन्दगी लोग जिसे मरहम-ए-ग़म जानते हैं;
जिस तरह हम ने गुज़ारी है वो हम जानते हैं।
~ Mohsin Naqvi
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दिल पे क्या गुज़री वो अनजान क्या जाने;
प्यार किसे कहते है वो नादान क्या जाने;
हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का;
कैसे बना था घौंसला वो तूफान क्या जाने।
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आज फिर तेरी याद आयी बारिश को देख कर;
दिल पे ज़ोर न रहा अपनी बेबसी को देख कर;
रोये इस कदर तेरी याद में;
कि बारिश भी थम गयी मेरी बारिश को देख कर।
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हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने;
तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने;
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।
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अभी जिन्दा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ खल्वत में;
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने।
~ Sahir Ludhianvi
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कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते;
हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते;
अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा;
बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।
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कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं;
इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं;
झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी;
इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।
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बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;
तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है;
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;
मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।
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हर सितम सह कर कितने गम छिपाए हमने;
तेरी ख़ातिर हर दिन आँसू बहाए हमने;
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।
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रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है;
ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है;
हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू;
ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।
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अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे;
तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे;
ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;
सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।
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उल्फत का यह दस्तूर होता है;
जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है;
दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे;
कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है!
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सबने कहा इश्क़ दर्द है;
हमने कहा यह दर्द भी क़बूल है;
सबने कहा इस दर्द के साथ जी नहीं पाओगे;
हमने कहा इस दर्द के साथ मरना भी क़बूल है।
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दोस्ती जब किसी से की जाये तो दुश्मनों की भी राय ली जाये;
मौत का ज़हर है फिज़ाओं में अब कहाँ जा कर सांस ली जाये;
बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ कि ये नदी कैसे पार की जाये;
मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे हैं आज फिर कोई भूल की जाये।
~ Rahat Indori
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जो नजर से गुजर जाया करते हैं;
वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं;
कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते,
बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।
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धड़कन बिना दिल का मतलब ही क्या;
रौशनी के बिना दिये का मतलब ही क्या;
क्यों कहते हैं लोग कि मोहब्बत न कर दर्द मिलता है;
वो क्या जाने कि दर्द बिना मोहब्बत का मतलब ही क्या।
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उम्मीद तो मंज़िल पे पहुँचने की बड़ी थी, तक़दीर मगर न जाने कहाँ सोयी पड़ी थी;
खुश थे कि गुजारेंगे रफाकत में सफ़र, तन्हाई मगर अब बाहों को फैलाये खड़ी थी।
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बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की;
कोई किसी को टूट कर चाहता है;
और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।
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उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को;​
अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा।
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समझौतों की भीड़-भाड़ में सबसे रिश्ता टूट गया;
इतने घुटने टेके हमने आख़िर घुटना टूट गया;
ये मंज़र भी देखे हमने इस दुनिया के मेले में;
टूटा-फूटा ​ बचा​ रहा है, अच्छा ख़ासा टूट गया।
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बड़े सुकून से रहता है वो आजकल मेरे बगैर​;​
​जैसे किसी उलझन से छुटकारा मिल गया हो उसे...
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​शहर क्या देखें, के हर मंज़र में जाले पड़ गए​;​
ऐसी गर्मी है, कि पीले फूल काले पड़ गए​;​
मैं अँधेरों से बचा लाया था अपने आप को​;​
मेरा दुख ये है, मेरे पीछे उजाले पड़ गए।
~ Rahat Indori
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मुझे मालूम है मैं उस के बिना ज़ी नहीं सकता​;
​उस का भी यही हाल है मगर किसी और के लिए​। ​
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अश्क़ आँखों से दिल से बददुआ निकली;
सितम किया याद जब कभी सितमगर का।
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हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम;
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम;
अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला;
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
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दुनिया वालों ने तो फकत उसको हवा दी थी;​
​ लोग तो घर ही के थे आग लगाने वाले।
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चूम कर कफ़न मेँ लिपटे मेरे चेहरे को;
उसने तड़प के कहा नये कपड़े क्या पहन लिए;
मेरी तरफ देखते भी नही।
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इतना, आसान हूँ कि हर किसी को समझ आ जाता हूँ​;​
शायद तुमने ही पन्ने छोड़ छोड़ कर पढ़ा है मुझे​।
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तेरी यादों के सितम सहते हैं हम;
आज भी पल-पल तेरी यादों में मरते हैं हम;
तुम तो चले गए बहुत दूर, हमको इस दुनियां में तन्हा छोड़कर;
पर तुम क्या जानो, बैठकर तन्हाई में किस कदर रोते हैं हम।
~ Sarab Sandhu
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इतना भी इख्तियार नहीं मुझको वज़्म में;
शमाएँ अगर बुझें तो मैं दिल को जला सकूँ।
~ Qateel Shifai
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दिल में है तड़प आँखों में आंसू;
क्या इसी का नाम जुदाई है लोगो।
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जुबां पे मोहर लगाना कोई बड़ी बात नहीं;
बदल सको तो बदल दो मेरे खयालों को।
~ Habib Jalib
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वो भी बहुत अकेला है शायद मेरी तरह;
उस को भी कोई चाहने वाला नहीं मिला।
~ Bashir Badr
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किया इश्क़ ने मेरा हाल कुछ ऐसा;
ना अपनी खबर ना ही दिल का पता है;
कसूरवार थी मेरी ये दौर-ए-जवानी;
मैं समझता रहा सनम की खता है।
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कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं;
जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते है।
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उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक;
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।
~ Mirza Ghalib
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जब लगा था "तीर" तब इतना "दर्द" न हुआ ग़ालिब...
"ज़ख्म" का एहसास तब हुआ जब "कमान" देखी अपनों के हाथ में।
~ Mirza Ghalib
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कोई नहीं करता अब इम्दाद मेरे दिल की;
दुश्मन तो दुश्मन, अपने भी तड़पाते हैं।
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ग़म के दरियाओं से मिलकर बना है यह सागर;
आप क्यों इसमें समाने की कोशिश करते हो;
कुछ नहीं है और इस जीवन में दर्द के सिवा;
आप क्यों इस ज़िंदगी में आने की कोशिश करते हो।
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​फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे​:​
ये हथेली आज फिर खुजला रही है​।
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मोहब्बत करने वालों का यही हश्र होता है;
दर्द-ए-दिल होता है, दर्द-ए-जिगर होता है;
बंद होंठ कुछ ना कुछ गुनगुनाते ही रहते हैं;
खामोश निगाहों का भी गहरा असर होता है।
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देख कर मेरा नसीब मेरी तक़दीर रोने लगी;
लहू के अल्फाज़ देख कर तहरीर रोने लगी;
हिज्र में दीवाने की हालत कुछ ऐसी हुई;
सूरत को देख कर खुद तस्वीर रोने लगी।
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वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;
हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे;
और हमें बेवफ़ा का नाम मिला;
क्योंकि हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।
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कितने वर्षों का सफ़र ख़ाक हुआ;
जब उसने पुछा कहो कैसे आना हुआ।
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टूटे हैं शीशा दिल हाय दिल इतने के हल-ए-दर्द;
रखते हैं पाँव ख़ाक पर सौ बार देख कर।
~ Mirza Ghalib
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बहुत तड़पाया है किसी की बेबस यादों ने;
ऐ ज़िंदगी खत्म हो जा, अब और तड़पा नहीं जाता।
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यह कह कर मेरा दुश्मन मुझे हँसते हुए छोड़ गया;
कि तेरे अपने ही बहुत हैं तुझे रुलाने के लिए।
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हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला;
होश तब आया जब उस ने कहा कि खुदा किसी एक का नहीं होता।
~ Mirza Ghalib
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चीज़ बेवफ़ाई से बढ़कर क्या होगी;
ग़म-ए-हालात जुदाई से बढ़कर क्या होगी;
जिसे देनी हो सज़ा उम्र भर के लिए;
सज़ा तन्हाई से बढ़कर क्या होगी।
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टूटा हो दिल तो दुःख होता है;
करके मोहब्बत किसी से ये दिल रोता है;
दर्द का एहसास तो तब होता है;
जब किसी से मोहब्बत हो और उसके दिल में कोई और होता है।
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ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;
आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;
ये मत पूछना किसने दर्द दिया;
वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।
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हो चुके अब तुम किसी के;
कभी मेरी ज़िंदगी थे तुम;
भूलता है कौन मोहब्बत पहली;
मेरी तो सारी ख़ुशी थे तुम।
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जिंदगी भर दर्द से जीते रहे;
दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे;
कई बार सोचा कह दू हाल-ए-दिल उससे;
पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे।
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भूल जाना उसे मुश्किल तो नहीं है लेकिन;
काम आसान भी हमसे कहाँ होते हैं!
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ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है!
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दर्द कितना है बता नहीं सकते;
ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते;
आँखों से समझ सको तो समझ लो;
आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।
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हर तमाशाई फक़त साहिल से मंज़र देखता;
कौन दरिया को उलटता कौन गौहर देखता।

Translation:
फक़त : सिर्फ
गौहर : मोती
~ Ahmad Faraz
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क्या ज़रूरत थी दूर जाने की;
पास रहकर भी तो तड़पा सकते थे!
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वो देता है दर्द बस हमी को;
क्या समझेगा वो इन आँखों की नमी को;
​चाहने वालों की भीड़ से घिरा है जो हर वक़्त;
वो महसूस ​क्या ​करेगा ​बस ​एक हमारी कमी को। ​
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चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत है;
हम उसकी याद में परेशान बहुत हैं;
वो हर बार दिल तोड़ता है यह कह कर;
मेरी उम्मीदों के दुनियाँ में अभी मुकाम बहुत हैं।
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रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ है जिन्दगी की;
कि सुबह का दर्द शाम को, पुराना हो जाता है।
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दिल के छालों को कोई शायरी कहे तो दर्द नहीं होता;
तक़लीफ़ तो तब होती है जब लोग वाह-वाह करते है।
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​ज़िस्म से मेरे तडपता दिल कोई तो खींच लो​;​
मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब ​ये यकीन ​है।
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तुम फिर ना आ सकोगे, बताना तो था ना मुझे;
तुम दूर जा कर बस गए, और मैं ढूँढता रह गया।
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लौट जाती है दुनिया गम हमारा देख कर;
जैसे लौट जाती हैं लहरें किनारा देखकर;
तुम कंधा ना देना मेरे जनाज़े को;
कहीं फिर से ज़िंदा ना हो जाऊँ तेरा सहारा देखकर।
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ना ये महफिल अजीब है, ना ये मंजर अजीब है;
जो उसने चलाया वो खंजर अजीब है;
ना डूबने देता है, ना उबरने देता है;
उसकी आँखों का वो समंदर अजीब है।
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​वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है;
इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
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हमने कब माँगा है तुम से अपनी वफाओं का सिला;
बस दर्द देते रहा करो मोहब्बत भर्ती जाएगी।
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​दर्द से अब हम खेलना सीख गए;​
​हम बेवफाई के साथ जीना सीख गए;​
​ क्या बताएं किस कदर दिल टूटा है मेरा​;​
​मौत से पहले, कफ़न ​ओढ़ कर सोना सीख गए।
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​ना जाने क्यूँ नज़र लगी ज़माने की;
अब वजह मिलती नहीं मुस्कुराने की;
तुम्हारा गुस्सा होना तो जायज़ था;
हमारी आदत छूट गयी मनाने की।
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​क्या गिला करें उन बातों से​;
​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​;
​​कहें भला किसकी खता इसे हम​;
​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से​।
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तुम्हारे पास नहीं तो फिर किस के पास है;
वो टूटा हुआ दिल आखिर गया कहाँ?
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​मुझको ऐसा दर्द मिला जिसकी दवा नहीं;​
​फिर भी खुश हूँ मुझे उस से कोई गिला नहीं​;
​​और कितने आंसू बहाऊँ उस के लिए​;
​​जिसको खुदा ने मेरे नसीब में लिखा ही नहीं।
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मेरा ख़याल ज़ेहन से मिटा भी न सकोगे;
एक बार जो तुम मेरे गम से मिलोगे;
तो सारी उम्र मुस्करा न सकोगे।
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बेखुदी ले गई कहाँ हमको;
देर से इंतज़ार है अपना;
रोते फिरते हैं सारी-सारी रात;
अब यही बस रोज़गार है अपना।
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फिर नहीं बस्ते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते है;​
क़ब्रें जितनी भी संवारो वहाँ रौनक नहीं होती।
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नया दर्द एक और दिल में जगा कर चला गया​;​
​​ कल फिर वो मेरे शहर में आकर चला गया​;​
​​ जिसे ढूंढ़ता रहा मैं लोगों ​की भीड़ में;​
​​ मुझसे वो अप​ने आप ​को छुपा कर चला गया।
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दर्द की महफ़िल में एक शेयर हम भी अर्ज़ किया करते हैं;
न किसी से मरहम न, दुआओं कि उम्मीद किया करते हैं;
कई चेहरे लेकर लोग यहाँ जिया करते हैं;
हम इन आँसुओं को एक चेहरे के लिए पिया करते हैं|
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तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है;
जिसका रास्ता बहुत खराब है;
मेरे ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा;
दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है।
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कही ईसा, कहीं मौला, कहीं भगवान रहते है;
हमारे हाल से शायद सभी अंजान रहते हैं;
चले आये, तबीयत आज भारी सी लगी अपनी;
सुना था आपकी बस्ती में कुछ इंसान रहते है।
----------
वक़्त की रफ़्तार रुक गई होती;
शर्म से आँखे झुक गई होती;
अगर दर्द जानती शमा परवाने का;
तो जलने से पहले बुझ गई होती।
----------
दर्द से दोस्ती हो गई यारों;
जिंदगी बे दर्द हो गई यारों;
क्या हुआ जो जल गया आशियाना हमारा;
दूर तक रोशनी तो हो गई यारो।
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आँसू गिरने की आहट नही होती;
दिल के टूटने की आवाज नहीं होती;
गर होता उन्हें एहसास दर्द का;
तो दर्द देने की उन्हें आदत नहीं होती।
----------
कोई समझता नहीं उसे इसका गम नहीं करता;
पर तेरे नजरंदाज करने पर हल्का सा मुस्कुरा देता है;
उसकी हंसी में छुपे दर्द को महसूस तो कर;
वो तो हंस के यूँ ही खुद को सजा देता है।
----------
कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता;
गंभीर है किस्सा सुनाया नहीं जाता;
एक बार जी भर के देख लो इस चहेरे को;
क्योंकि बार-बार कफ़न उठाया नहीं जाता।
----------
आज आपके प्यार में कमी देखी;
चाँद की चांदनी में कुछ नमी देखी;
उदास होकर लौट आए हम;
जब महफ़िल आपकी गैरों से सजी देखी।
----------
ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक है;
तु सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक है;
वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी;
हमें तो देखना है कि तु बेवफ़ा कहाँ तक है।
----------
दर्द का मेरे यकीं आप करें या ना करें;
अर्ज़ इतनी है कि इस राज़ का चर्चा ना करें।
~ Vahshat Kalkttwi
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मुझको ढून्ढ लेता है;
हर रोज़ नए बहाने से;
दर्द हो गया है वाकिफ;
मेरे हर ठिकाने से।
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आँखों में रहा दिल में उतर कर ना देखा;
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर ना देखा;
पत्थर मुझे कहता है मुझे चाहने वाला;
मैं मोम हूँ उसने मुझे छु कर ना देखा।
----------
दर्द हमेशा अपने ही देते है;
वरना गैरो को क्या पता कि;
तकलीफ किस बात से होती है।
----------
हर बात में आंसू बहाया नहीं करते;
दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते;
लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है;
दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।
----------
जो मेरा था वो मेरा हो नहीं पाया;
आँखों में आंसू भरे थे पर मैं रो नहीं पाया;
एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि;
हम मिलेंगे ख़्वाबों में पर मेरी बदकिस्मती तो देखिये;
उस रात तो मैं ख़ुशी के मारे सो भी नहीं पाया।
----------
एक दिन जब हुआ प्यार का अहसास उन्हें;
वो सारा दिन आकर हमारे पास रोते रहे;
और हम भी इतने खुद गर्ज़ निकले यारों कि;
आँखे बंद कर के कफ़न में सोते रहे।
----------
कभी आंसू कभी ख़ुशी बेची;
हम गरीबों ने बेकसी बेची;
चंद सांसे खरीदने के लिए;
रोज थोड़ी सी जिन्दगी बेची।
~ Abu Talib
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कभी दूर जा के रोये कभी पास आके रोये;
हमें रुलाने वाले हमें रुला के रोये;
मरने को तो मरते हैं सभी यारों;
पर मरने का तो मजा ही तब है;
जो दुश्मन भी जनाजे पे आ के रोये।
----------
भूले हैं रफ्ता-रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम;
किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हम से पूछिए।
----------
मंजिलों से बेगाना आज भी सफ़र मेरा;
रात बेसहर मेरी दर्द बेअसर मेरा।

अनुवाद:
बेसहर:कभी ख़त्म न होने वाली
बेअसर:अप्रभावित
~ Taban Ghulam Rabbani
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यूँ तो हर चीज़ रफ़ू होती है;
मगर दिल का घाव सिलाया नही जा सकता।
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मौसम की तरह बदल देते हैं लोग हमनफस अपना;
हमसे तो अपना सितमगर भी बदला नहीं जाता!
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राह यूँ ही नामुक्क्मल, ग़म-ए-इश्क का फ़साना;
कभी मुझको नींद नहीं आयी, कभी सो गया ज़माना!
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ज़रा सी देर को आये ख्वाब आँखों में;
फिर उसके बाद मुसलसल अज़ाब आँखों में;
वो जिस के नाम की निस्बत से रौशनी था वजूद;
खटक रहा है वही आफताब आँखों में!
~ Iftikhar Arif
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बहुत ही तल्ख़ तजुर्बे का नाम है 'चाहत';
जो तुमको अच्छा लगे, बस उससे प्यार मत करना।
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अभी सूरज नहीं डूबा ज़रा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाउंगा मुझे नाकाम होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते हो क्यों;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो!
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मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना;
भूल जाना मेरा ख्याल ना करना;
हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे;
पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!
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न कोई इलज़ाम न कोई तंज़, न कोई रुसवाई मीर;
दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की!
~ Khwaja Mir Dard
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उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है;
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है;
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर;
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!
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आप गैरों की बात करते हैं हमने अपने भी आजमायें हैं;
लोग कांटो से बच के चलते हैं, हमनें फूलों से ज़ख्म खाए हैं!
----------
अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश;
मुद्दतों जीस्त को नाशाद किया है मैंने;
तूने तो एक ही सदमे से किया था दो-चार;
दिल को हर तरह से बर्बाद किया है मैंने!
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हर दिल में दर्द छुपा होता है, बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है;
कुछ लोग आँखों से दर्द बहा लेते हैं और किसी की हंसी में भी दर्द छुपा होता है!
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अब नींद से कहो हम से सुलह कर ले फ़राज़;
वो दौर चला गया जिसके लिए हम जागा करते थे!
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शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत, मर्सिये ने दिल को मेरे भी रुलाया है बहुत;
दी-ओ-कोहसर में रोता हूँ दहाड़े मार-मार, दिलबरान-ए-शहर ने मुझ को सताया है बहुत;
नहीं होता किसी से दिल गिरिफ़्ता इश्क़ का,ज़ाहिरा ग़मगीं उसे रहना ख़ुश आया है बहुत!
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वो तो अपने दर्द रो-रो के सुनते रहे;
हमारी तन्हाइयों से आँख चुराते रहे;
और हमें बेवफा का नाम मिला क्योंकि;
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!
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ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे;
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे;
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया;
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।
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बीते हुए कुछ दिन ऐसे हैं;
तन्हाई जिन्हें दोहराती है;
रो-रो के गुजरती हैं रातें;
आंखों में सहर हो जाती है!
~ Ahsaan Danish
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गुलाब तो टूट कर बिखर जाता है;
पर खुशबु हवा में बरकरार रहती है;
जाने वाले तो छोड़ के चले जाते हैं;
पर एहसास तो दिलों में बरकरार रहते हैं।
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दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया;
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया;
मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने;
यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।
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दर्द अगर काजल होता तो आँखों में लगा लेते;
दर्द अगर आँचल होता तो अपने सर पर सजा लेते;
दर्द अगर समुंदर होता तो दिल को हम साहिल बना लेते;
और दर्द अगर तेरी मोहब्बत होती तो उसको चाहत-ऐ ला हासिल बना लेते।
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हमनें जब किया दर्द-ए-दिल बयां, तो शेर बन गया;
लोगों ने सुना तो वाह वाह किया, दर्द और बढ़ गया;
मोहब्बत की पाक रूह मेरे साँसों में है;
ख़त लिखा जब गम कम करने के लिए तो गम और बढ़ गया।
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शायद कि इधर आके कोई लौट गया है;
बेताबी से यूं मुंह को कलेजा नहीं आता।
~ Nizam Rampuri
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जुबां पर जब किसी के दर्द का अफ़साना आता है;
हमें रह-रह कर अपना दिल-ए-दीवाना आता है।
~ Sadiq Jaisi
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धरती के गम छुपाने के लिए गगन होता है;
दिल के गम छुपाने के लिए बदन होता है;
मर के भी छुपाने होंगे गम शायद;
इसलिए हर लाश पर कफ़न होता है।
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जब्र है, कह्र है, क़यामत है;
दिल जो बेइखित्यार होता है।
~ Mir Taqi Mir
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कुछ इन रोज़ो दिल अपना सख्त बे आराम रहता है;
इसी हालत में लेकर सुबह से तो शाम रहता है।
~ Mir Asar
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हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे;
लफ्ज कागज पर उतर जादूगरी करने लगे;
कामयाबी जिसने पाई उनके घर बस गए;
जिनके दिल टूटे वो आशिक शायरी करने लगे।
----------
बिन बात के ही रूठने की आदत है;
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
आप खुश रहें, मेरा क्या है;
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है!
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भटकते रहे हैं बादल की तरह;
सीने से लगालो आँचल की तरह;
गम के रास्ते पर ना छोड़ना अकेले;
वरना टूट जाएँगे पायल की तरह।
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मिलना इत्तिफाक था, बिछड़ना नसीब था;
वो उतना ही दूर चला गया जितना वो करीब था;
हम उसको देखने क लिए तरसते रहे;
जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था।
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समझा ना कोई दिल की बात को;
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया;
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।
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बिन बात के ही रूठने की आदत है;
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
आप खुश रहें, मेरा क्या है;
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।
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लिखूं कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है;
मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है;
गिर पड़ते हैं मेरे आंसू मेरे ही कागज पर;
लगता है कि कलम में स्याही का दर्द ज्यादा है!
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Na Koi Ilzaam, Na Koi Tanz, Na Koi Ruswai Mir;
Din Bohat Hogaye Yaron Ne Koi Inayat Nahi Ki!
~ Khwaja Mir Dard
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दर्द से दोस्ती हो गई यारो;
जिंदगी बेदर्द हो गई यारो;
क्या हुआ, जो जल गया आशियाना हमारा;
दूर तक रोशनी तो हो गई यारो!
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कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता;
गंभीर है किस्सा सुनाया नहीं जाता;
एक बार जी भर के देख लो इस चहेरे को;
क्योंकि बार-बार कफ़न उठाया नहीं जाता!
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उल्फत में अक्सर ऐसा होता है;
आँखे हंसती हैं और दिल रोता है;
मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी;
हमसफर उनका कोई और होता है!
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जब भी करीब आता हूँ बताने के किये;
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये!
महफ़िलों की शान न समझना मुझे;
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये!
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वो अपने फायदे की खातिर फिर आ मिले थे हमसे;
हम नादाँ समझे कि हमारी दुआओं में असर बहुत है!
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क़दम क़दम पर सिसकी और क़दम क़दम पर आहें;
खिजाँ की बात न पूछो सावन ने भी तड़पाया मुझे!
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इस दिल की दास्ताँ भी बड़ी अजीब होती है;
बड़ी मुस्किल से इसे ख़ुशी नसीब होती है;
किसी के पास आने पर ख़ुशी हो न हो;
पर दूर जाने पर बड़ी तकलीफ होती है!
----------
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं;
अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते हैं;
इस दिल का दर्द दिखाएँ किसे;
मल्हम लगाने वाले ही जखम दे जाते हैं!
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किसी के दिल का दर्द किसने देखा है;
देखा है, तो सिर्फ चेहरा देखा है;
दर्द तो तन्हाई मे होता है;
लेकिन तन्हाइयो मे लोगों ने हमे हँसते हुए देखा है!
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जी तो चाहता है, चीर के रख दूं तुझे;
ए दिल, न तूं रहे तुझमे और न तूं रहे मुझमें!
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मेरी फितरत में नहीं अपना गम बयां करना;
अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ तो महसूस कर तकलीफ मेरी!
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दिए हैं ज़ख़्म तो मरहम का तकल्लुफ न करो;
कुछ तो रहने दो, मेरी ज़ात पे एहसान अपना!
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रोशनी बिना दिए का मतलब ही क्या;
क्यों कहते है लोग कि मोहब्बत न कर दर्द मिलता है;
वो क्या जाने कि दर्द बिना मोहब्बत का मतलब ही क्या!
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खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है?
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता!
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जीने के लिये सोचा ही नहीं, दर्द संभालने होंगे;
मुस्कुराये तो, मुस्कुराने के क़र्ज़ उतरने होंगे!
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जहाँ खामोश फिजा थी, साया भी न था;
हमसा कोई किस जुर्म में आया भी न था!
न जाने क्यों छिनी गई हमसे हंसी;
हमने तो किसी का दिल दुखाया भी न था!
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आईना बन के बात करती धूप, दिल की दीवार पर बरसती धूप;
मेरे अन्दर भी धूप का आलम, मेरे बाहर भी रक्स करती धूप!
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आईना बन के बात करती धूप, दिल की दीवार पर बरसती धूप;
मेरे अन्दर भी धूप का आलम, मेरे बाहर भी रक्स करती धूप!
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ये भी अच्छा है सिर्फ सुनता है;
दिल अगर बोलता तो कयामत हो जाती!
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दिल के छालों को कोई शायरी कहे तो परवाह नहीं;
तकलीफ तो तब होती है जब कोई वाह-वाह करता है!
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वो मुझे भूल ही गया होगा;
इतनी मुदत कोई खफा नहीं रहता!
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तुम्हारे प्यार में हम बैठें हैं चोट खाए!
जिसका हिसाब न हो सके उतने दर्द पाये!
फिर भी तेरे प्यार की कसम खाके कहता हूँ!
हमारे लब पर तुम्हारे लिये सिर्फ दुआ आये!
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हर वक़्त तेरे आने की आस रहती है!
हर पल तुझसे मिलने की प्यास रहती है!
सब कुछ है यहाँ बस तू नही!
इसलिए शायद ये जिंदगी उदास रहती है!
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सोचा याद न करके थोड़ा तड़पाऊं उनको!
किसी और का नाम लेकर जलाऊं उनको!
पर चोट लगेगी उनको तो दर्द मुझको ही होगा!
अब ये बताओ किस तरह सताऊं उनको!
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मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाए हमने!
अफ़सोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं!
मत पूछो क्या गुजरती है दिल पर!
जब वो कहते है हमें तुमसे प्यार नहीं!
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वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते!
खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते!
मर गए पर खुली रखी आँखें!
इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते!
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न जाने क्यों हमें आँसू बहाना नहीं आता!
न जाने क्यों हाल-ऐ-दिल बताना नहीं आता!
क्यों सब दोस्त बिछड़ गए हमसे!
शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता!
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दिल टूटा तो एक आवाज आई!
चीर के देखा तो कुछ चीज निकल आई!
सोचा क्या होगा इस खली दिल में!
लहू से धो कर देखा, तो तेरी तस्वीर निकल आई!
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जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है!
मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हसाना चाहता है!
जाने क्या बात झलकती है मेरे इस चेहरे से!
हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है!
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कांटो सी चुभती है तन्हाई!
अंगारों सी सुलगती है तन्हाई!
कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे!
मैं रोता हूँ तो रोने लगती है तन्हाई!
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उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है!
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है!
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर!
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!
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दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते!
गम के आंसू न बहते तो और क्या करते!
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ!
हम खुद को न जलाते तो और क्या करते!
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वक़्त नूर को बेनूर बना देता है!
छोटे से जख्म को नासूर बना देता है!
कौन चाहता है अपनों से दूर रहना पर वक़्त सबको मजबूर बना देता है!
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दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं!
हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ!
कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब!
मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं!
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वो दर्द ही क्या जो आँखों से बह जाए!
वो खुशी ही क्या जो होठों पर रह जाए!
कभी तो समझो मेरी खामोशी को!
वो बात ही क्या जो लफ्ज़ आसानी से कह जायें!
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दिल के टूटने से नही होती है आवाज़!
आंसू के बहने का नही होता है अंदाज़!
गम का कभी भी हो सकता है आगाज़!
और दर्द के होने का तो बस होता है एहसास!
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काश यह जालिम जुदाई न होती!
ऐ खुदा तूने यह चीज़ बनायीं न होती!
न हम उनसे मिलते न प्यार होता!
ज़िन्दगी जो अपनी थी वो परायी न होती!
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Vo IShQ hi kYa.. Jo Aankho Se na Tapke!

Tajurbe ne ek baat sikhai hai... Ek naya Dard hi...Purane Dard ki dawai hai!

प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..

कौन कहता है की सिर्फ ‪चोट‬ ही ‪दर्द‬ देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू ‪ online‬ आके भी ‪reply‬ नहीं देती

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬..!!!

तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे..।

फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर.. कोई ज़िंदा नहीं होता …

उन लम्हों की यादें ज़रा संभाल के रखना.. जो हमने साथ बिताये थे.. क्यों की.. हम याद तो आयेंगे मगर लौट कर नहीं !

बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना 'मेहमान-ए-ख़ास' हो तुम…!!

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया !

सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते !!

तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये ।

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी.. और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ ..!!

तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे.. बेटा घर जल्दी आ जाना..!

कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता.. ।।

पी है शराब हर गली की दुकान से, दोस्ती सी हो गयी है शराब की जाम से, गुज़रे है हम कुछ ऐसे मुकाम से, की आँखें भर आती है मोहब्बत के नाम से..!

फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है !

कुछ कदमों के फासले थे, हम दोनों के दरमीयान, उन्हें जमाने ने रोक़ लिया, और हमने अपने आपको..!!

उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती..!!

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है ।

खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता!

ये तो ज़मीन की फितरत है की, वो हर चीज़ को मिटा देती हे वरना, तेरी याद में गिरने वाले आंसुओं का, अलग समंदर होता…!!

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

Kaash tum mout hoti, Toh ek din jaroor meri hoti.

Ek hi shaks se matlab tha.. Wo bhi matlabi nikla..!!

है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.

Fikr toh teri aaj bhi karte hain, Bas jikr karne ka hak nahi raha

Mausam ki misaal du ya tumhari, Koi puch betha h badalna kisko kehte hai

काश वो भी आकर हम से कह दे मैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !

Auron se to umeed ka rishta bhi nahi tha.. Tum itne badal jaoge socha bi nai tha..!!

Mat puchh kaise guzar rahi hai zindagi, Us daur se guzar rahi hu jo guzarta hi nahi

वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह.. फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना.??

Jo guzari na ja saki humse, Humne wo zindagi guzari hai tumhare bagair..

Dard to tab hua jab alvida kahte-kahte wo khud ro diye

Aaj Usne Ek Baat Keh Ke Mujhe Rula Diya.. Jab Dard Bardaasht Nahi Kar Sakte To Mohabbat Kyun Ki..

hum wo dard hain jo ankho se jhalakte hain.

Tum Zindagi mein aa to gaye magar khyal rakhna.. Hum jaan de dete hain magar jaane nahi dete.

Kuch rishton ke liye pyar kabhi kam nahi hota.

Itna bhi gumaan na kar apni jeet par ae bekhabar.. Shahar mein tere jeet se jyada charche to meri haar ke hai.

pyar to mohabbat ka karishma hai warna pathar ke mahal ko taj mahal kaun kehta

Mohabbat hai meri isliye door hai mujhse.. Agar zidd hoti to shaam tak bahon mein hoti

Khabar marne ki jab aaye to yeh na samajhna hum dagebaaz the.. Kismat ne gum itne diye, bas zara se pareshan the..

Maine samundar se sikha hai jeene ka salika, Chupchap se behna aur apni mauj mein rehna.

Tum to dur rahkar satate ho magar, wo yaadein paas aakar rulaya karti hain

Hath Unka Chu Jaye Humare Chehre Ko.. Isi Umeed Mein Hum khud ko Rulate Hain.

Vo khus par guroor karte hain, To isme hairat ki koi baat nahi.. Jinhe hum chahte hai, vo aam ho hi nahi sakte

Mere bare mein itna mat sochna, Dil mein aata hun, samajh mein nahi.

Shayad chupke se rona bhi zindagi hai

Hum bhi mohabbat karke gunehgar ho gaye.. pehle phool the ab khak ho gaye

Peene Ko To Pee Jaun Zeher Bhi Uske Haatho Se Main.. Par Shart Ye Hai Ki Girte Waqt Wo Apni Baahon Mein Sambhale Mujhko..

Yeh Mana Ki Tumhari Nazar Mein Kuch Bhi Nahi Hai hum, Arey Zara Jakar Unse Pucho Jinhe Haasil Nahi Hai Hum..

Tum khush-kismat ho jo hum tumko chahte hain warna.. Hum to vo hai jinke khwabon mein bhi log izazat lekar aate hai.

Humare Ansu Poch Kar Wo Muskurate Hain.. Aysi Ada Se Wo Dil Ko Churate Hain

Wafa ka naam na lo yaaro, wafa dil ko dukhati hai.. Wafa ka naam lete hi ek bewafa ki yaad aati hai!!!

Khud hi de jaoge to behtar hai, Warna hum dil chura bhi lete hain..!

TADAP KAR DEKHO KISI KI CHAHAT MEIN.. PATA CHALEGA INTEZAR KYA HOTA HAI

Kuch din kate hai ghum mein to kuch din khushi ke saath, Hota raha mazaq meri zindagi ke saath..

Uski hansi mein chuppy dard ko mehsoos to kar.. Wo to yunhi hans hans ke khud ko saza deta hai..

Tum Badlo To Majburiyan Hain Bahut.. Hum Badlein To Bewafa ho gaye..

Jane Duniya Mein Aisa Kyun Hota Hai.. Jo Sab Ko Khushi De Wahi Rota Hai

Wo aai meri mazar par mehboob k sath, kaun kahta hai marne k baad Jalaya nahin jata.

Bahut bheed hai is mohabbat k shahar main, ek baar jo bichhada dobara nahin milta.

Roz sochtaa hun tumhe bhul jau, roz yahi baat bhul jata hun.

Meri khamoshi mere andar chipe dard ka dusra naam hai.

Apnaane k liye hazaar khubiya b kam hain, chhodne k liye ek kami hi kaafi hai.

Tumse bichde to malum hua k maut b koi cheez h ghalib.. Zindigi toh woh thi jo hum teri mehfil mein guzaar aaye

Tere na hone se zindagi mein bus itni si kami rehti hai, Main chahe lakh muskurau in ankho mein nami rehti hai

Agar nend aa jaaye toh so bhi liya karo. Raato ko jagne se muhabbat lota nahi karti

Ye dil hi to janta hai meri pak mohabbat ka aalam.. Ke mujhe jeene ke liye sanso ki nahi teri jarurat hain

Raat bhar jalta raha ye dil usi ki yaad mein.. samaj nhi aata dard pyar karne se hota h ya yaad karne se